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15 Stocks to buy: भारतीय शेयर बाजार पर Goldman Sachs का अनुमान, इन 15 शेयरों पर जताया भरोसा
मुंबई, एजेंसी। ग्लोबल ब्रोकरेज गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर अपना नया आउटलुक जारी किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी 50 जून 2027 तक 26,500 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो इसके मौजूदा रिकॉर्ड हाई 26,373 से भी ऊपर होगा। ब्रोकरेज का मानना है कि हाल के सप्ताहों में भारत की आर्थिक तस्वीर पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।
भारत के आउटलुक में सुधार की वजहें
रिपोर्ट के अनुसार, कमोडिटी कीमतों में नरमी, रुपए की स्थिरता, घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती, दूसरी तिमाही में बेहतर कॉर्पोरेट आय की उम्मीद और कुछ प्रमुख सेक्टरों में संभावित रिकवरी ने भारतीय बाजार के प्रति भरोसा बढ़ाया है।
निकट अवधि में रह सकती है अस्थिरता
हालांकि गोल्डमैन सैक्स ने यह भी कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निकट अवधि में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद ब्रोकरेज को भरोसा है कि जून 2027 तक Nifty 50 लगभग 26,500 के स्तर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक यह मौजूदा स्तरों से करीब 10 फीसदी की संभावित बढ़त का संकेत देता है।
किन सेक्टरों पर बुलिश है ब्रोकरेज?
Goldman Sachs ने रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों को लंबी अवधि के लिहाज से आकर्षक बताया है। सेक्टर स्तर पर ब्रोकरेज ने Utilities की रेटिंग बढ़ाकर Overweight कर दी है। इसके अलावा Banking, Energy Refiners, Technology, Media & Telecommunications (TMT) और Defence सेक्टर पर भी सकारात्मक रुख बनाए रखा है।
वहीं Exporters, Downstream Oil और Materials सेक्टर के कुछ हिस्सों पर ब्रोकरेज ने Underweight रेटिंग बरकरार रखी है।
दूसरी छमाही के लिए 15 पसंदीदा Largecap शेयर
Goldman Sachs ने साल की दूसरी छमाही के लिए जिन 15 लार्जकैप शेयरों को अपनी टॉप पसंद बताया है, उनमें शामिल हैं:
- Reliance Industries
- HDFC Bank
- Adani Enterprises
- Adani Power
- Kotak Mahindra Bank
- NTPC
- Hindustan Aeronautics (HAL)
- Eternal
- Power Grid
- Adani Green Energy
- InterGlobe Aviation
- HDFC Life Insurance
- Indian Hotels
- Mazagon Dock Shipbuilders
- MakeMyTrip
ब्रोकरेज का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों और चुनिंदा सेक्टरों में सुधार की संभावना के चलते भारतीय बाजार लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम और बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव पर भी नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
मार्च में घटाया था लक्ष्य
गौरतलब है कि गोल्डमैन सैक्स ने 27 मार्च को भारतीय बाजार की रेटिंग घटाकर Marketweight कर दी थी। उस समय तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए ब्रोकरेज ने Nifty 50 का लक्ष्य 29,500 से घटाकर 25,300 कर दिया था। साथ ही 2026 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान भी घटाकर 5.9 फीसदी कर दिया गया था।
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सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान
मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
क्यों सस्ता होगा सोना?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।
केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे
सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।
निवेशकों के लिए सलाह
का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।
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RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%
मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।
RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?
भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।
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देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर
नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।
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