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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लिया गया बड़ा निर्णय : उद्योग विभाग को सौंपा जाएगा जशप्योर का ट्रेडमार्क

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जशप्योर बनेगा ग्लोबल ब्रांड – जशपुर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच का मार्ग प्रशस्त

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लिया गया बड़ा निर्णय : उद्योग विभाग को सौंपा जाएगा जशप्योर का ट्रेडमार्क
 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लिया गया बड़ा निर्णय : उद्योग विभाग को सौंपा जाएगा जशप्योर का ट्रेडमार्क
 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लिया गया बड़ा निर्णय : उद्योग विभाग को सौंपा जाएगा जशप्योर का ट्रेडमार्क

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचल जशपुर की आदिवासी महिलाओं के समूह द्वारा प्राकृतिक वनोपज का प्रसंस्करण कर तैयार की गई विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों का ब्रांड जशप्योर अब जशपुर और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कदमताल करने को तैयार है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल अभियान को आत्मसात करते हुए एक अहम निर्णय लिया गया है जिसके तहत जशपुर जिले की महत्वाकांक्षी महिला केंद्रित ब्रांड जशप्योर का ट्रेडमार्क अब उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक निर्णय जशप्योर को व्यापक उत्पादन, संस्थागत ब्रांडिंग और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच दिलाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है।

जशप्योर – परंपरा को उद्यमिता से जोड़कर खोली उन्नति की राह

जशप्योर ब्रांड महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला उपक्रम है, जिसे जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक, पोषणयुक्त और रसायनमुक्त खाद्य उत्पादों का निर्माण करते हुए स्थानीय समुदायों को रोजगार उपलब्ध कराना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

इस ब्रांड का लक्ष्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि और वनोपज का प्रसंस्करण कर खाद्य उत्पादों के रूप में तैयार करना तथा रोजगार से जोड़ते हुए व्यावसायिक स्तर पर इन्हें व्यापक पहचान दिलाना है।

जशप्योर के उत्पादों की मुख्य विशेषता यह है कि ये पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। इनमें किसी भी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव, रंग या कृत्रिम स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता और ये सस्टेनेबल पैकेजिंग में उपलब्ध हैं। जशप्योर केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी माटी की महक, आदिवासी बहनों की मेहनत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का प्रतीक बन चुका है।

जशप्योर के उत्पाद बना रहे हैं अपनी अलग पहचान

जशप्योर द्वारा महुआ और अन्य वनोपज को शामिल करते हुए कई प्रकार के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें महुआ आधारित उत्पाद जैसे महुआ नेक्टर, महुआ वन्यप्राश, महुआ कुकीज़, रागी महुआ लड्डू, महुआ कैंडी और महुआ नेक्टर कोकोआ शामिल हैं। इसके अलावा, ढेकी कूटा जवा फूल चावल, मिलेट आधारित पास्ता और कोदो, कुटकी, रागी तथा टाऊ से बने विभिन्न उत्पाद भी पूरे भारत में अपनी पहचान बना रहे हैं।

महिला उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा

जशप्योर ब्रांड का उद्देश्य केवल व्यापार नहीं है, बल्कि यह आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने का एक सशक्त प्रयास भी है। इस ब्रांड के माध्यम से महिलाओं को रोजगार का अवसर मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं।
जशप्योर द्वारा निर्मित हर उत्पाद आदिवासी महिलाओं की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है। ये उत्पाद देशभर के विभिन्न स्टोर्स पर उपलब्ध हैं, जो ब्रांड की व्यापक पहुँच का प्रमाण हैं।

जशप्योर के सभी उत्पाद पूर्णतः प्राकृतिक हैं। इनमें किसी भी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव, कृत्रिम रंग या स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता। यह उत्पाद श्रृंखला न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पोषण से भरपूर और पर्यावरण-संवेदनशील पैकेजिंग में उपलब्ध है।

जशप्योर के प्रमुख उत्पादों में महुआ नेक्टर, महुआ वन्यप्राश, रागी महुआ लड्डू, महुआ कुकीज़, महुआ कोकोआ ड्रिंक, कोदो, कुटकी, रागी आधारित पास्ता और ढेकी कूटा चावल शामिल हैं।

जशप्योर की सबसे खास बात इसकी महिला प्रधान कार्यशक्ति है। यहां 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी आदिवासी महिलाएं हैं, जो उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इस मंच के माध्यम से ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि परंपरागत ज्ञान और तकनीकों को आधुनिक बाजार में प्रस्तुत करने में भी सक्षम हो रही हैं।

वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया

20 सितंबर 2024 को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 में जशप्योर का स्टॉल सभी के आकर्षण का केंद्र बना रहा। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वाले उपभोक्ताओं, पोषण विशेषज्ञों और उद्यमियों ने विशेष रुचि के साथ महुआ और मिलेट से बने उत्पादों की सराहना की। इन उत्पादों में कोई एडिटिव, प्रिज़र्वेटिव या स्टेबलाइजर नहीं है, जिससे ये पूरी तरह से प्राकृतिक, सुरक्षित और पोषणयुक्त हैं।

रेयर प्लेनेट के साथ ऐतिहासिक समझौता

जशप्योर की पहुँच अब देशभर के प्रमुख एयरपोर्ट स्टोर्स तक होगी। रेयर प्लेनेट के साथ हुए समझौते के तहत पहले चरण में पाँच एयरपोर्ट्स पर महुआ और अन्य उत्पादों की बिक्री शुरू की जा रही है। यह पहल जशप्योर को राष्ट्रीय उपभोक्ताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा ऑनलाइन माध्यम से किए गए, जो राज्य के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

जशप्योर – लोकल टू ग्लोबल की राह पर अग्रसर

जशप्योर से जुड़े जशपुर जिले के युवा वैज्ञानिक श्री समर्थ जैन ने बताया कि जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ शासन के प्रयासों से “महुआ को अब केवल शराब तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे फॉरेस्ट गोल्ड या ग्रीन गोल्ड के रूप में भी देखा जाएगा।” जशप्योर ने यह साबित कर दिया है कि स्वास्थ्यवर्धक भोजन स्वादिष्ट भी हो सकता है। उनका मानना है कि शासन की इस पहल से जशप्योर को लोकल टू ग्लोबल ब्रांड बनाने में मदद मिलेगी और निश्चित ही यह निर्णय प्रदेश भर में वनोपज और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।

ब्रांड ट्रेडमार्क हस्तांतरण के इस ऐतिहासिक निर्णय से जशप्योर को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही कच्चे माल की माँग में वृद्धि होगी और आदिवासी महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। इस निर्णय से जशप्योर ब्रांड का ट्रेडमार्क उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा, ताकि इसके दायरे और प्रभाव को और व्यापक बनाया जा सके। इससे जशप्योर के उत्पादों को विश्वस्तरीय बनाने, उत्पादन में वृद्धि के लिए उन्नत मशीनें लगाने और प्रभावी मार्केटिंग सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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कोरबा

कोरबा में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा साइंस सेंटर, 25 करोड़ की लागत से होगा निर्माण

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मंत्री लखन लाल देवांगन ने किया पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर साइंस एवं कन्वेंशन सेंटर का भूमिपूजन
आधुनिक विज्ञान और तकनीक से रूबरू होंगे के विद्यार्थी
साइंस सेंटर का निर्माण कोरबा के इतिहास में एक नया वैज्ञानिक अध्याय – मंत्री लखन लाल देवांगन
कोरबा 15 अक्टूबर 2026। औद्योगिक नगरी कोरबा के विकास में अब विज्ञान और आधुनिक तकनीक का एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। शहर के रिस्दी रोड पर 25 करोड़ रुपये की लागत से छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा साइंस सेंटर बनाया जाएगा। वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने आज पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर साइंस एवं कन्वेंशन सेंटर का विधि-विधान से भूमिपूजन किया। अडानी फाउंडेशन के सहयोग से सीएसआर मद के अंतर्गत बनने वाला यह केंद्र विद्यार्थियों को विज्ञान के सिद्धांतों, वैज्ञानिक प्रयोगों और अत्याधुनिक तकनीकों को करीब से समझने का अवसर प्रदान करेगा। यह परियोजना न केवल कोरबा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की दुनिया से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि साइंस सेंटर का निर्माण कोरबा के इतिहास में एक नया वैज्ञानिक अध्याय लिखेगा। इस केंद्र से जिले के बच्चों सहित पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सीखने के नए अवसर मिलेंगे। विद्यार्थी यहां वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से नई-नई चीजों को समझ सकेंगे और चंद्रयान एवं मंगलयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग होने वाली तकनीकों के बारे में जान सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह केंद्र बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत-2047 की संकल्पना को साकार करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना और तकनीक सहित सभी क्षेत्रों में निरंतर प्रगति आवश्यक है। साइंस सेंटर जैसी परियोजनाएं बच्चों को ज्ञान और कौशल से सशक्त बनाती हैं तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए जिलेवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह केंद्र कोरबा को विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।

प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार की जानकारी देते हुए मंत्री लखन लाल ने कहा कि राज्य सरकार ने नई उद्योग नीति लागू की है और इसके माध्यम से औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में उद्योग स्थापना की दिशा में धरातल पर कार्य हो रहे हैं। डाटा सेंटर, सेमीकंडक्टर पार्क और टेक्सटाइल पार्क जैसी परियोजनाओं के विकास से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि कोरबा तेजी से महानगर के स्वरूप में आगे बढ़ रहा है। शहर में सड़क, पुल-पुलियों और यातायात सुविधाओं के विकास के लिए सीएसआर एवं डीएमएफ मद से विभिन्न कार्य कराए जा रहे हैं। सीतामढ़ी से उरगा रोड, बरबसपुर से दर्री रोड तथा ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक होते हुए रिस्दी चौक तक सड़क निर्माण एवं मरम्मत के कार्यों से आवागमन सुगम होगा और यातायात व्यवस्था बेहतर बनेगी।  उन्होंने बताया कि शहर संजयनगर के पास  अंडरब्रिज का कार्य भी शुरू हुआ है।  साथ ही जल्द ही सुनालिया, सर्वमंगला और बेलगिरी सहित अन्य स्थानों पर पुल-पुलियों के निर्माण किया जाएगा। इन विकास कार्यों से शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने कहा कि साइंस सेंटर के निर्माण से कोरबा के बच्चों को विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को जानने और आधुनिक तकनीक को समझने का अवसर मिलेगा। यह केंद्र विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने, उनकी जिज्ञासा बढ़ाने और उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में सहायक होगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए जिला प्रशासन और अडानी फाउंडेशन को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि  साइंस सेंटर  जिला प्रशासन और सीएसआर  के सहयोग से साकार होने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने कहा कि लगभग 1.30 लाख वर्गफीट क्षेत्र में विकसित होने वाला यह केंद्र विद्यार्थियों को विज्ञान से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं जिला स्तर पर उपलब्ध कराएगा। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े साइंस सेंटर के रूप में विकसित होने वाली इस परियोजना में बच्चों को प्रयोगों, गतिविधियों और व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से विज्ञान सीखने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों की जिज्ञासा को प्रोत्साहन मिलेगा और विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को समझना आसान होगा।

कलेक्टर ने बताया कि साइंस सेंटर में रोबोटिक्स जोन, स्पेस जोन, प्लेनेटोरियम, माइनिंग एक्सपीरियंस जोन, कल्चरल सेंटर तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियलिटी आधारित सुविधाओं सहित आधुनिक तकनीक से जुड़े विभिन्न क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थी विज्ञान और तकनीक को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय प्रत्यक्ष अनुभव के जरिए समझ सकेंगे। इससे उनकी बुनियादी वैज्ञानिक समझ मजबूत होगी और तकनीक के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा। उन्होंने बताया कि  इस वर्ष जिले के पीएम श्री विद्यालयों के विद्यार्थियों के अहमदाबाद स्थित साइंस सेंटर भ्रमण के दौरान वहां उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन किया गया था। कोरबा में भी इस स्तर की सुविधाएं विकसित होने से विद्यार्थियों को अपने जिले में ही विज्ञान और नवाचार से जुड़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

कलेक्टर श्री दुदावत ने कहा कि कोरबा एक प्रमुख औद्योगिक नगरी है और शासन का प्रयास है कि शहर के विकास में उद्योग भी महत्वपूर्ण भागीदार बनें। इस दिशा में सीएसआर मद से कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। बालको द्वारा शहर के भीतर फोरलेन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, इसी प्रकार  एसईसीएल ने सीतामढ़ी-उरगा सड़क निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। स्वामी विवेकानंद शैक्षणिक परिसर में लाइब्रेरी का निर्माण भी सीएसआर मद से किया जायेगा। इसके अतिरिक्त शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अन्य कार्यों को भी सीएसआर मद से स्वीकृति मिली है। उन्होंने कहा कि उद्योगों की सहभागिता से विकास कार्यों को गति मिल रही है और स्थानीय नागरिकों को इसका लाभ प्राप्त हो रहा है।

उन्होने कहा कि 25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह साइंस सेंटर कोरबा के शैक्षणिक और तकनीकी विकास को नई दिशा देगा। आधुनिक विज्ञान, प्रयोगों और नवाचार पर आधारित सुविधाओं से सुसज्जित यह केंद्र विद्यार्थियों के लिए ज्ञान-विज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बनने के साथ छत्तीसगढ़ को विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। गोपाल मोदी ने कहा कि कोरबा में बनने वाला साइंस सेंटर छत्तीसगढ़ में विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
इस अवसर पर  सभापति नगर निगम नूतन सिंह ठाकुर,  सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन, निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, डॉ राजीव सिंह, नरेंद्र देवांगन, सहित अन्य एमआईसी सदस्य, सीईओ अडानी फाउंडेशन वैभव टंडन, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक विभागीय अधिकारी  उपस्थित थे।

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कोरबा

पक्के घर में सुरक्षित हुआ सीमा सिंह का परिवार

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प्रधानमंत्री आवास योजना से बारिश की चिंता से मिली राहत
कोरबा 15 अक्टूबर 2026। शहर के वार्ड क्रमांक 32 स्थित पूरी बहार, आदर्श नगर की निवासी सीमा सिंह पहले कच्चे मकान में रहती थीं। बारिश का मौसम उनके लिए कई परेशानियां लेकर आता था। खपरैल की छत से पानी टपकता और घर का जरूरी सामान भीग जाता। मिट्टी की दीवारें भी बारिश में उखड़ने लगती थीं। हर बारिश के बाद उन्हें दीवारों की दोबारा छबाई करनी पड़ती थी।

सीमा सिंह को जब पता चला कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत शहर में रहने वाले पात्र परिवारों को भी पक्का मकान बनाने के लिए सहायता दी जा रही है, तो उन्होंने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया। कुछ महीने बाद उनका नाम योजना में शामिल हुआ और उनके बैंक खाते में सहायता राशि की पहली किस्त पहुंची। पक्का घर बनाने की उम्मीद पूरी होते देख उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
पहली किस्त मिलने पर उन्होंने मकान का निर्माण शुरू कराया। इसके बाद दूसरी और तीसरी किस्त प्राप्त होने पर निर्माण कार्य आगे बढ़ता गया और उनका घर पूरा हो गया। आज सीमा सिंह अपने परिवार के साथ पक्के मकान में रह रही हैं। अब बारिश में छत से पानी टपकने या दीवारों के उखड़ने की चिंता नहीं रहती।
पक्के घर ने उनके परिवार को सुरक्षित आश्रय दिया है और भविष्य के प्रति भरोसा भी बढ़ाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए केवल मकान पाने का माध्यम नहीं बनी, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की नई शुरुआत का आधार बनी है।

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कोरबा

किसान सम्मान निधि से खेती को मिला संबल, सुमेर सिंह के लिए बनी भरोसे की राह

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कोरबा 15 अक्टूबर 2026। कोरबा जिले के विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम उच्चलेंगा, पोस्ट मोरगा निवासी किसान सुमेर सिंह बिंझवार खेती-किसानी के सहारे अपने परिवार का जीवनयापन करते हैं। खेती में बीज, खाद और अन्य जरूरी सामग्री समय पर जुटाना किसान के लिए अहम होता है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच खेती के खर्चों की व्यवस्था करना कई बार चुनौती बन जाता है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की जानकारी मिलने पर सुमेर सिंह ने योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया पूरी की। उन्हें 20 जून 2026 को योजना के अंतर्गत रू.2,000 की राशि प्राप्त हुई। यह आर्थिक सहायता खेती के आवश्यक कामों में उपयोगी बनी और खेती-किसानी के समय पर उन्हें सहारा मिला।
सुमेर सिंह के लिए यह राशि केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि मेहनत से जुड़ी उम्मीदों को आगे बढ़ाने का संबल है। समय पर मिली सहायता से खेती के छोटे-बड़े खर्चों की चिंता कुछ कम होती है और किसान अपने काम को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा पाते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएँ किसानों को खेती के मौसम में सहयोग देकर उनके परिश्रम का सम्मान करती हैं। सुमेर सिंह को मिला यह लाभ भी उनके लिए आत्मविश्वास और भरोसे का एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण आधार बना।

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