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राजस्थान के नागौर में सड़क पर मछलियां तैरीं:काशी की कॉलोनियों में बाढ़, पटना में गंगा का लेवल बढ़ा, श्रीनगर NH पर देवल ब्रिज में लैंडस्लाइड

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नई दिल्ली,एजेंसी। राजस्थान में हो रही भारी बारिश आफत बन गई है। नागौर में तालाब भर गए हैं और पानी बाहर आ गया है, सड़क पर सैकड़ों मछलियां तैर रही है। वहीं, पिछले 24 घंटों में बारिश के कारण अलग-अलग हादसों में 7 लोगों की मौत हो गई।

यूपी में लगातार बारिश से गंगा, यमुना और मंदाकिनी जैसी नदियां उफान पर हैं। काशी में 84 घाट डूबने के बाद अब गंगा का पानी अस्सी घाट की सड़क तक पहुंच गया है। गंगा के साथ वरुणा नदी में बाढ़ आ गई है।

उधर बिहार के कई नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। पटना में गंगा नदी उफान पर है। पटना DM ने जिले के 78 स्कूलों को 21 जुलाई तक बंद रखने का आदेश दिया है।

वहीं, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर समरोली में देवल ब्रिज में लैंडस्लाइड के चलते कश्मीर जाने वाला रास्ता बंद हो गया है।

मौसम विभाग ने कर्नाटक, बिहार, सिक्किम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, उत्तर-दक्षिण कर्नाटक और उत्तराखंड में कुमाऊं क्षेत्र के कुछ हिस्सों में रविवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, हिमाचल में कुल 141 सड़कें अभी भी बंद हैं।

देशभर में बारिश-बाढ़ की तस्वीरें…

नागौर में इस साल मानसून मेहरबान रहा है। जिले भर में अच्छी बारिश के कारण नदी-तालाब इन दिनों छलक रहे हैं। रियाबड़ी में लाम्पोलाई के तालाब से मछलियां तालाब से बाहर आ गईं।

नागौर में इस साल मानसून मेहरबान रहा है। जिले भर में अच्छी बारिश के कारण नदी-तालाब इन दिनों छलक रहे हैं। रियाबड़ी में लाम्पोलाई के तालाब से मछलियां तालाब से बाहर आ गईं।

राजस्थान के कोटा बैराज के 2 गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है।

राजस्थान के कोटा बैराज के 2 गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है।

तस्वीर वाराणसी के दशाश्वमेध घाट की है। घाट किनारे बनी जल पुलिस चौकी में 5 फीट पानी भर गया।

तस्वीर वाराणसी के दशाश्वमेध घाट की है। घाट किनारे बनी जल पुलिस चौकी में 5 फीट पानी भर गया।

वाराणसी का मणिकर्णिका घाट डूब गया है, लेकिन फिर भी अंतिम संस्कार के लिए यहां शव लाए जा रहे हैं।

वाराणसी का मणिकर्णिका घाट डूब गया है, लेकिन फिर भी अंतिम संस्कार के लिए यहां शव लाए जा रहे हैं।

कोलकाता में भारी बारिश के बाद सड़कों पर 3 फीट पानी भर गया, लोग बचने के लिए चबूतरों पर बैठे नजर आए।

कोलकाता में भारी बारिश के बाद सड़कों पर 3 फीट पानी भर गया, लोग बचने के लिए चबूतरों पर बैठे नजर आए।

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मारुति सुजुकी का बड़ा फैसला, लागू होगा Work From Home, विदेशी यात्राओं पर रोक

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मुंबई, एजेंसी। देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) ने मंगलवार को कहा कि उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है। कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। 

मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है। 

इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे टिकाऊ आवागमन उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है।

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विदेशों में छाया भारतीय आम, एक्सपोर्ट से हुई रिकॉर्ड कमाई, UAE बना सबसे बड़ा खरीदार

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय आम एक बार फिर दुनिया भर में अपनी मिठास और खुशबू से लोगों का दिल जीत रहे हैं। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप, अमेरिका और सिंगापुर तक भारतीय आमों की भारी मांग देखने को मिल रही है। बढ़ते एक्सपोर्ट, बेहतर लॉजिस्टिक्स और विदेशी बाजारों में बढ़ती लोकप्रियता के चलते भारत के आम निर्यात ने नया रिकॉर्ड बना दिया है।

एक्सपोर्ट से 470 करोड़ रुपए की कमाई

एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का निर्यात किया। इससे देश को 470 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत मानी जाती है।

विदेशों में बढ़ी भारतीय आमों की मांग

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कतर, कुवैत और सिंगापुर जैसे देशों में भी भारतीय आमों की मांग तेजी से बढ़ रही है। सिंगापुर में भारतीय आमों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है और सुपरमार्केट में आम तेजी से बिक रहे हैं।

अल्फांसो अब भी सबसे पसंदीदा

महाराष्ट्र का Alphonso Mango आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब भी ‘आमों का राजा’ माना जाता है। वहीं गुजरात का केसर, दक्षिण भारत का तोतापरी और उत्तर भारत के लंगड़ा व चौसा आम भी विदेशी ग्राहकों को खूब पसंद आ रहे हैं। खासतौर पर किफायती कीमत के कारण केसर आम की मांग तेजी से बढ़ रही है।

आधुनिक हुआ एक्सपोर्ट सिस्टम

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आम निर्यात के लिए कोल्ड-चेन नेटवर्क, पैकेजिंग और फाइटोसैनिटरी मानकों में काफी सुधार किया है। इसके साथ ही भारतीय दूतावासों और APEDA द्वारा विदेशों में फूड फेस्टिवल और प्रमोशनल इवेंट आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे भारतीय आमों की ब्रांडिंग मजबूत हुई है।

चुनौतियां अब भी बरकरार

भारी मांग के बावजूद निर्यातकों को सीमित सीजन, महंगी एयर कार्गो लागत और कई देशों के सख्त आयात नियमों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भारतीय आम वैश्विक बाजार में लगातार अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।

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‘कमाई अठन्नी और खर्चा रुपया’ जानिए 12 दिनों से महंगाई आम आदमी को कैसे लूट रही है? देखिए पूरी Report Card

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मुंबई, एजेंसी। देश में पिछले दो हफ्तों से कम समय के भीतर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में ऐसी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इससे आम आदमी की जेब का खर्च बढ़ गया है। आम आदमी को पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, दूध, सोने- चांदी जैसे सभी क्षेत्रों से महंगाई की मार पड़ी है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित मिडिल क्लास हुई है।

12 दिन में 4 बार बढ़ीं ईंधन की कीमतें

बीते 12 दिनों में ईंधन की कीमतों में 4 बार बढ़ोतरी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के चलते तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, इस वैश्विक दबाव का सीधा खामियाजा आम वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा CNG की कीमत में भी 4 बार बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद ऑटो और कैब चालकों का कहना है कि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ गैस भरवाने में ही खर्च हो रहा है, जिसके कारण कई संगठनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है।

रसोईघर का भी हिला बजट

दूध और राशन महंगे महंगाई की यह तपिश सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने घर की रसोई को भी अपनी चपेट में ले लिया है। कुछ प्रमुख डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में प्रति लीटर 2 से 4 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके चलते सुबह की चाय से लेकर बच्चों के खान-पान और स्थानीय स्ट्रीट फूड तक, हर चीज की लागत बढ़ गई है।

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शादियों के सीजन में सोना-चांदी खरीदना हुआ मुश्किल

सर्राफा बाजार से भी आम उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर नहीं है। शादियों का सीजन शुरू होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी और आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) के समीकरणों के कारण सोने-चांदी के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं। ऐसे में मिडिल क्साल परिवारों के लिए शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया है।

ईएमआई और खर्च के बीच पिसी मिडिल क्लास

ईएमआई और खर्च के बीच पिसती मिडिल क्लास इस समय बड़े आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। एक तरफ जहां मकान, कार की ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस और बिजली के बिल जैसे तय खर्च जस के तस बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजमर्रा की चीजों पर होने वाला खर्च अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। लोग अब अपनी बचत में से कटौती करने को मजबूर हैं।

आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान

राहत की उम्मीद फिलहाल कम आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक घरेलू बाजार में राहत मिलना मुश्किल है। हालांकि, सरकारी स्तर पर स्थिति पर नजर रखने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम उपभोक्ता को तत्काल कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है।

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