Connect with us

देश

मानसून सत्र कल से, पहलगाम-ऑपरेशन सिंदूर पर घेरेगा विपक्ष:बिहार चुनाव से पहले ताकत दिखाने का मौका, BJP बोली- हर सवाल का जवाब देंगे

Published

on

नई दिल्ली,एजेंसी। संसद का मानसून सत्र कल यानी 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। पूरे एक महीने यानी 21 अगस्त तक चलेगा। पिछली बार संसद की कार्यवाही बजट सत्र के दौरान मार्च और अप्रैल में हुई थी। इसके बाद बीते 108 दिन में पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर से लेकर एअर इंडिया प्लेन क्रैश तक काफी कुछ घटा है। मानसून सत्र में इन्हीं मुद्दों पर हंगामा होना तय है।

‘हाऊ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ किताब लिखने वाली सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी 40 साल से राजनीतिक पत्रकारिता कर रहीं हैं। वे कहती हैं, ‘मानसून सत्र में जोरदार हंगामा हो सकता है। पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, रूस के साथ बिगड़ते संबंध, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सीजफायर के दावे, एअर इंडिया विमान हादसे जैसे मुद्दे हावी रह सकते हैं।’

‘इसके अलावा सबकी नजरें बिहार से जुड़े मुद्दों पर भी रहेंगी। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले ये आखिरी संसद सत्र होगा।’

1. पहलगाम आतंकी हमला और इससे जुड़ी जांच

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले को 3 महीने होने वाले हैं। इस हमले में आतंकियों ने 26 भारतीयों की हत्या कर दी थी। अब तक हमले में शामिल आतंकियों का पता नहीं चला है। ऐसे में विपक्ष पहलगाम हमले और इसकी जांच में नाकामी का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।

2. ऑपरेशन सिंदूर और विदेशी नीति पर सवाल ​​​​​​

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इसके बाद से विपक्ष बार-बार भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाता रहा है। इस ऑपरेशन में भारत को हुए नुकसान की जानकारी मांग रहा है।

ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस और INDIA ब्लॉक सरकार से सवाल पूछने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि करगिल युद्ध की तरह ऑपरेशन सिंदूर पर भी संसद में चर्चा होनी चाहिए।

3. एअर इंडिया विमान हादसा

12 जून, 2025 को अहमदाबाद में एअर इंडिया का विमान क्रैश होने से 260 लोगों की मौत हो गई थी। अब हादसे की वजह, जांच और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस और बाकी विपक्षी पार्टियां विमान हादसे की जिम्मेदारी पर सवाल उठाएंगी।

4. बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन

बिहार में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग यहां वोटर लिस्ट को नए सिरे से तैयार करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का अभियान चला रहा है। संसद में सबसे ज्यादा हंगामा इसी पर हो सकता है। इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां BJP के खिलाफ एकजुट हो सकती हैं।

विपक्ष ने चुनाव आयोग के काम में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उसका दावा है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिलकर इस मुद्दे पर सरकार को घेरेंगे।

5. मणिपुर हिंसा

मई 2023 में शुरू हुई मणिपुर हिंसा को दो साल से ज्यादा वक्त हो चुका है। अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। पूरा राज्य कुकी और मैतेई इलाकों में बंटा हुआ है। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे के इलाके में नहीं जा सकते।

कांग्रेस लीडर राहुल गांधी समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां मणिपुर का मुद्दा उठाती रही हैं। मणिपुर समस्या हल करने और राज्य में राष्ट्रपति शासन खत्म करने की मांग संसद में उठ सकती है। BJP राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने की मांग का प्रस्ताव ला सकती है।

6. भारतीय विदेश नीति और चीन सीमा विवाद

कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि मोदी सरकार की विदेश नीति चीन के प्रति कमजोर और नरम रही है। ऐसे में विपक्ष चीन के साथ सीमा विवाद, हाल में हुए तनाव और चीनी दावों का जवाब मांग सकता है।

इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की विदेश नीति को लेकर भी कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का पक्ष रखने के लिए ऑल पार्टी डेलिगेशन अलग-अलग देशों में भेजे थे।

पार्टियां क्या कह रही हैं

कांग्रेस: सरकार से पूछेंगे- ट्रम्प का सीजफायर का दावा सही या गलत

मानसून सत्र में कांग्रेस की रणनीति क्या होगी? इस सवाल पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा कहते हैं, ‘मुद्दे साफ हैं। पहला, पहलगाम हमले को 90 दिन हो गए और अब तक आतंकियों के नाम पता नहीं चले हैं। ये भी नहीं पता कि वे कहां गए।’

‘दूसरा, ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर वोट मांगे गए। ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि मेरी वजह से सीजफायर हुआ। सरकार क्यों नहीं बताती कि सरकार का इस पर क्या स्टैंड है।’

‘सारे पड़ोसी देश हमसे दूर होते गए। ऑपरेशन सिंदूर में एक भी देश ने खुलकर हमारा समर्थन नहीं किया। देश आतंकवाद के खिलाफ बोले, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर सही है, ये किसी ने नहीं कहा। इस सरकार को विदेश नीति का भी नहीं पता है। एक डमी विदेश मंत्री है, जिसने पाकिस्तान को पहले ही बता दिया कि हम हमला करने वाले हैं।’

संसद में हमारा तीसरा फोकस बिहार में चुनाव आयोग की कार्रवाई पर होगा। इलेक्शन कमीशन वहां चुनाव को चोरी करना चाह रहा है। वो वोटों को काटने की योजना और भूमिका बना रहा है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया और टाइमिंग दोनों पर सवाल हैं। ये लोकतंत्र में अब तक का सबसे बड़ा धब्बा होगा कि चुनाव आयोग 15-20% वोट काटने की कोशिश कर रहा है।’

आम आदमी पार्टी कह चुकी है कि वो अब विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। विपक्षी एकता के सवाल पर आलोक शर्मा कहते हैं, ‘सारे विपक्ष की एकता का ठेका कांग्रेस ने नहीं लिया है। बाकी पार्टियों को भी सोचना होगा। अगर कोई ED-CBI के दबाव में आएगा तो उसका हमारे पास समाधान नहीं है।’

BJP: पहलगाम हो या ऑपरेशन सिंदूर, हर मुद्दे पर जवाब देंगे

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला कहते हैं, ‘संसद में सारे विषयों पर नियमों के मुताबिक चर्चा करने के लिए हमारी पार्टी तैयार है। चाहे वो ऑपरेशन सिंदूर हो या पहलगाम या कोई और मुद्दा। अगर विपक्ष सकारात्मक चर्चा करना चाहेगा, तो हमारी पार्टी उसका समर्थन करेगी।

प्रेम शुक्ला विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर कहते हैं, ‘संसद सत्र शुरू होने से पहले ही INDIA ब्लॉक से आम आदमी पार्टी बाहर हो गई है। उन्होंने ऐलान किया है कि वो बिहार में चुनाव लड़ेंगे। बिहार में जन सुराज पार्टी भी चुनाव लड़ रही है।’

सरेंडर बनाम भ्रष्ट विपक्ष के मुद्दे पर हंगामे के आसार

मानसून सत्र में विपक्ष की रणनीति पर बात करते हुए पॉलिटिकल एक्सपर्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कह रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध ट्रेड करके रुकवाया है। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे पर भारतीय कूटनीति की विफलता को बड़ा मुद्दा बनाएगा। बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर भी हंगामा हो सकता है।’

‘राहुल गांधी के लिहाज से देखें तो वे डोनाल्ड ट्रम्प के दावे पर खुलकर बोल सकते हैं। राहुल गांधी ये पेश करने की कोशिश करेंगे कि सरकार अमेरिका के दबाव में आ गई।

QuoteImage

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में वोटर लिस्ट को मुद्दा बनाया था। वे बिहार में चुनाव आयोग की पहल को भी तूल दे सकते हैं।QuoteImage

‘दूसरी तरफ सत्ता पक्ष विपक्ष की रणनीति नाकाम करने की तैयारी कर चुका है। मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस लीडर प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट आ गई है। शराब घोटाले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारी हुई है।’

हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘सत्ता पक्ष के पास भी ये दो बड़े मुद्दे हैं। वो विपक्ष को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरेगा। सरकार ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी बताएगी। बीते 10 साल में देश ने डिफेंस के क्षेत्र में क्या हासिल किया, सरकार ये बताने की कोशिश करेगी। सरकार 8 अहम बिल लाने वाली है। मुझे लगता है कि ये बिल हर हाल में पारित हो जाएंगे।’

‘विपक्ष के पास बिहार चुनाव के पहले विपक्षी एकजुटता दिखाने का बड़ा मौका होगा। विपक्ष को इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए। विपक्ष को सचमुच लगता है कि इंडिया गठबंधन काम कर रहा है तो बिहार चुनाव के पहले एकजुटता दिखाने के लिए इससे अच्छा मौका नहीं होगा। बजट सत्र में सपा नेता अखिलेश यादव संभल मुद्दे पर बोल रहे थे। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी अडाणी मुद्दे पर टीशर्ट पहनकर बाहर घूम रहे थे।’

‘विपक्षी खेमे में एकजुटता नहीं दिख रही, अभी यही जरूरी’

सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी कहती हैं, ‘ये देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी पार्टियां आपस में कितना मिलकर चलती हैं। विपक्ष ने ऑनलाइन मीटिंग करके रणनीति पर चर्चा की है, कोई आमने-सामने बैठकर बात नहीं की। इससे साफ है कि विपक्षी खेमे में एकजुटता नहीं है। संसद में विपक्ष को एकजुट दिखना और ज्यादा जरूरी है।’

‘अगर जून में संसद का विशेष सत्र होता, तो पूरा फोकस पहलगाम में सुरक्षा चूक, इंटेलिजेंस फेलियर पर होता। 21 जुलाई को सदन बैठेगा, तो कई और मुद्दे आ चुके हैं। मोहन भागवत ने 75 साल में नेताओं के रिटायर होने की बात कही है। मुझे लगता है कि इस पर भी चर्चा हो सकती है।’

संसद में विपक्ष की रणनीति पर नीरजा चौधरी का मानना है कि विपक्ष पार्लियामेंट में तो आपसी सहयोग कर लेते हैं। किस मुद्दे को वो सबसे अहम बनाएंगे, किस पर फोकस बनाएंगे, वो रणनीति का हिस्सा होता है।’

‘इस सरकार को बिल पास करवाने में कोई दिक्कत नहीं आती। विपक्ष की कुछ पार्टियों का वो येन-केन-प्रकारेण समर्थन हासिल कर ही लेते हैं। ऐसा कोई बिल नहीं है, जिसे लेकर विपक्ष कोई ठोस रुख ले रहा है। वहीं जज पर महाभियोग के मामले में सरकार और विपक्ष दोनों साथ ही हैं, तो बिल और इन प्रस्तावों पर कोई खास कशमकश देखने को मिलेगी, ऐसी उम्मीद कम है।’

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

देश

मारुति सुजुकी का बड़ा फैसला, लागू होगा Work From Home, विदेशी यात्राओं पर रोक

Published

on

मुंबई, एजेंसी। देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) ने मंगलवार को कहा कि उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है। कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। 

मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है। 

इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे टिकाऊ आवागमन उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है।

Continue Reading

देश

विदेशों में छाया भारतीय आम, एक्सपोर्ट से हुई रिकॉर्ड कमाई, UAE बना सबसे बड़ा खरीदार

Published

on

मुंबई, एजेंसी। भारतीय आम एक बार फिर दुनिया भर में अपनी मिठास और खुशबू से लोगों का दिल जीत रहे हैं। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप, अमेरिका और सिंगापुर तक भारतीय आमों की भारी मांग देखने को मिल रही है। बढ़ते एक्सपोर्ट, बेहतर लॉजिस्टिक्स और विदेशी बाजारों में बढ़ती लोकप्रियता के चलते भारत के आम निर्यात ने नया रिकॉर्ड बना दिया है।

एक्सपोर्ट से 470 करोड़ रुपए की कमाई

एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का निर्यात किया। इससे देश को 470 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत मानी जाती है।

विदेशों में बढ़ी भारतीय आमों की मांग

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कतर, कुवैत और सिंगापुर जैसे देशों में भी भारतीय आमों की मांग तेजी से बढ़ रही है। सिंगापुर में भारतीय आमों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है और सुपरमार्केट में आम तेजी से बिक रहे हैं।

अल्फांसो अब भी सबसे पसंदीदा

महाराष्ट्र का Alphonso Mango आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब भी ‘आमों का राजा’ माना जाता है। वहीं गुजरात का केसर, दक्षिण भारत का तोतापरी और उत्तर भारत के लंगड़ा व चौसा आम भी विदेशी ग्राहकों को खूब पसंद आ रहे हैं। खासतौर पर किफायती कीमत के कारण केसर आम की मांग तेजी से बढ़ रही है।

आधुनिक हुआ एक्सपोर्ट सिस्टम

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आम निर्यात के लिए कोल्ड-चेन नेटवर्क, पैकेजिंग और फाइटोसैनिटरी मानकों में काफी सुधार किया है। इसके साथ ही भारतीय दूतावासों और APEDA द्वारा विदेशों में फूड फेस्टिवल और प्रमोशनल इवेंट आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे भारतीय आमों की ब्रांडिंग मजबूत हुई है।

चुनौतियां अब भी बरकरार

भारी मांग के बावजूद निर्यातकों को सीमित सीजन, महंगी एयर कार्गो लागत और कई देशों के सख्त आयात नियमों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भारतीय आम वैश्विक बाजार में लगातार अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।

Continue Reading

देश

‘कमाई अठन्नी और खर्चा रुपया’ जानिए 12 दिनों से महंगाई आम आदमी को कैसे लूट रही है? देखिए पूरी Report Card

Published

on

मुंबई, एजेंसी। देश में पिछले दो हफ्तों से कम समय के भीतर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में ऐसी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इससे आम आदमी की जेब का खर्च बढ़ गया है। आम आदमी को पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, दूध, सोने- चांदी जैसे सभी क्षेत्रों से महंगाई की मार पड़ी है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित मिडिल क्लास हुई है।

12 दिन में 4 बार बढ़ीं ईंधन की कीमतें

बीते 12 दिनों में ईंधन की कीमतों में 4 बार बढ़ोतरी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के चलते तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, इस वैश्विक दबाव का सीधा खामियाजा आम वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा CNG की कीमत में भी 4 बार बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद ऑटो और कैब चालकों का कहना है कि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ गैस भरवाने में ही खर्च हो रहा है, जिसके कारण कई संगठनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है।

रसोईघर का भी हिला बजट

दूध और राशन महंगे महंगाई की यह तपिश सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने घर की रसोई को भी अपनी चपेट में ले लिया है। कुछ प्रमुख डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में प्रति लीटर 2 से 4 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके चलते सुबह की चाय से लेकर बच्चों के खान-पान और स्थानीय स्ट्रीट फूड तक, हर चीज की लागत बढ़ गई है।

PunjabKesari

शादियों के सीजन में सोना-चांदी खरीदना हुआ मुश्किल

सर्राफा बाजार से भी आम उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर नहीं है। शादियों का सीजन शुरू होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी और आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) के समीकरणों के कारण सोने-चांदी के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं। ऐसे में मिडिल क्साल परिवारों के लिए शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया है।

ईएमआई और खर्च के बीच पिसी मिडिल क्लास

ईएमआई और खर्च के बीच पिसती मिडिल क्लास इस समय बड़े आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। एक तरफ जहां मकान, कार की ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस और बिजली के बिल जैसे तय खर्च जस के तस बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजमर्रा की चीजों पर होने वाला खर्च अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। लोग अब अपनी बचत में से कटौती करने को मजबूर हैं।

आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान

राहत की उम्मीद फिलहाल कम आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक घरेलू बाजार में राहत मिलना मुश्किल है। हालांकि, सरकारी स्तर पर स्थिति पर नजर रखने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम उपभोक्ता को तत्काल कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677