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मानसून सत्र कल से, पहलगाम-ऑपरेशन सिंदूर पर घेरेगा विपक्ष:बिहार चुनाव से पहले ताकत दिखाने का मौका, BJP बोली- हर सवाल का जवाब देंगे

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नई दिल्ली,एजेंसी। संसद का मानसून सत्र कल यानी 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। पूरे एक महीने यानी 21 अगस्त तक चलेगा। पिछली बार संसद की कार्यवाही बजट सत्र के दौरान मार्च और अप्रैल में हुई थी। इसके बाद बीते 108 दिन में पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर से लेकर एअर इंडिया प्लेन क्रैश तक काफी कुछ घटा है। मानसून सत्र में इन्हीं मुद्दों पर हंगामा होना तय है।

‘हाऊ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ किताब लिखने वाली सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी 40 साल से राजनीतिक पत्रकारिता कर रहीं हैं। वे कहती हैं, ‘मानसून सत्र में जोरदार हंगामा हो सकता है। पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, रूस के साथ बिगड़ते संबंध, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सीजफायर के दावे, एअर इंडिया विमान हादसे जैसे मुद्दे हावी रह सकते हैं।’

‘इसके अलावा सबकी नजरें बिहार से जुड़े मुद्दों पर भी रहेंगी। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले ये आखिरी संसद सत्र होगा।’

1. पहलगाम आतंकी हमला और इससे जुड़ी जांच

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले को 3 महीने होने वाले हैं। इस हमले में आतंकियों ने 26 भारतीयों की हत्या कर दी थी। अब तक हमले में शामिल आतंकियों का पता नहीं चला है। ऐसे में विपक्ष पहलगाम हमले और इसकी जांच में नाकामी का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।

2. ऑपरेशन सिंदूर और विदेशी नीति पर सवाल ​​​​​​

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इसके बाद से विपक्ष बार-बार भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाता रहा है। इस ऑपरेशन में भारत को हुए नुकसान की जानकारी मांग रहा है।

ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस और INDIA ब्लॉक सरकार से सवाल पूछने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि करगिल युद्ध की तरह ऑपरेशन सिंदूर पर भी संसद में चर्चा होनी चाहिए।

3. एअर इंडिया विमान हादसा

12 जून, 2025 को अहमदाबाद में एअर इंडिया का विमान क्रैश होने से 260 लोगों की मौत हो गई थी। अब हादसे की वजह, जांच और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस और बाकी विपक्षी पार्टियां विमान हादसे की जिम्मेदारी पर सवाल उठाएंगी।

4. बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन

बिहार में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग यहां वोटर लिस्ट को नए सिरे से तैयार करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का अभियान चला रहा है। संसद में सबसे ज्यादा हंगामा इसी पर हो सकता है। इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां BJP के खिलाफ एकजुट हो सकती हैं।

विपक्ष ने चुनाव आयोग के काम में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उसका दावा है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिलकर इस मुद्दे पर सरकार को घेरेंगे।

5. मणिपुर हिंसा

मई 2023 में शुरू हुई मणिपुर हिंसा को दो साल से ज्यादा वक्त हो चुका है। अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। पूरा राज्य कुकी और मैतेई इलाकों में बंटा हुआ है। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे के इलाके में नहीं जा सकते।

कांग्रेस लीडर राहुल गांधी समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां मणिपुर का मुद्दा उठाती रही हैं। मणिपुर समस्या हल करने और राज्य में राष्ट्रपति शासन खत्म करने की मांग संसद में उठ सकती है। BJP राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने की मांग का प्रस्ताव ला सकती है।

6. भारतीय विदेश नीति और चीन सीमा विवाद

कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि मोदी सरकार की विदेश नीति चीन के प्रति कमजोर और नरम रही है। ऐसे में विपक्ष चीन के साथ सीमा विवाद, हाल में हुए तनाव और चीनी दावों का जवाब मांग सकता है।

इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की विदेश नीति को लेकर भी कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का पक्ष रखने के लिए ऑल पार्टी डेलिगेशन अलग-अलग देशों में भेजे थे।

पार्टियां क्या कह रही हैं

कांग्रेस: सरकार से पूछेंगे- ट्रम्प का सीजफायर का दावा सही या गलत

मानसून सत्र में कांग्रेस की रणनीति क्या होगी? इस सवाल पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा कहते हैं, ‘मुद्दे साफ हैं। पहला, पहलगाम हमले को 90 दिन हो गए और अब तक आतंकियों के नाम पता नहीं चले हैं। ये भी नहीं पता कि वे कहां गए।’

‘दूसरा, ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर वोट मांगे गए। ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि मेरी वजह से सीजफायर हुआ। सरकार क्यों नहीं बताती कि सरकार का इस पर क्या स्टैंड है।’

‘सारे पड़ोसी देश हमसे दूर होते गए। ऑपरेशन सिंदूर में एक भी देश ने खुलकर हमारा समर्थन नहीं किया। देश आतंकवाद के खिलाफ बोले, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर सही है, ये किसी ने नहीं कहा। इस सरकार को विदेश नीति का भी नहीं पता है। एक डमी विदेश मंत्री है, जिसने पाकिस्तान को पहले ही बता दिया कि हम हमला करने वाले हैं।’

संसद में हमारा तीसरा फोकस बिहार में चुनाव आयोग की कार्रवाई पर होगा। इलेक्शन कमीशन वहां चुनाव को चोरी करना चाह रहा है। वो वोटों को काटने की योजना और भूमिका बना रहा है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया और टाइमिंग दोनों पर सवाल हैं। ये लोकतंत्र में अब तक का सबसे बड़ा धब्बा होगा कि चुनाव आयोग 15-20% वोट काटने की कोशिश कर रहा है।’

आम आदमी पार्टी कह चुकी है कि वो अब विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। विपक्षी एकता के सवाल पर आलोक शर्मा कहते हैं, ‘सारे विपक्ष की एकता का ठेका कांग्रेस ने नहीं लिया है। बाकी पार्टियों को भी सोचना होगा। अगर कोई ED-CBI के दबाव में आएगा तो उसका हमारे पास समाधान नहीं है।’

BJP: पहलगाम हो या ऑपरेशन सिंदूर, हर मुद्दे पर जवाब देंगे

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला कहते हैं, ‘संसद में सारे विषयों पर नियमों के मुताबिक चर्चा करने के लिए हमारी पार्टी तैयार है। चाहे वो ऑपरेशन सिंदूर हो या पहलगाम या कोई और मुद्दा। अगर विपक्ष सकारात्मक चर्चा करना चाहेगा, तो हमारी पार्टी उसका समर्थन करेगी।

प्रेम शुक्ला विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर कहते हैं, ‘संसद सत्र शुरू होने से पहले ही INDIA ब्लॉक से आम आदमी पार्टी बाहर हो गई है। उन्होंने ऐलान किया है कि वो बिहार में चुनाव लड़ेंगे। बिहार में जन सुराज पार्टी भी चुनाव लड़ रही है।’

सरेंडर बनाम भ्रष्ट विपक्ष के मुद्दे पर हंगामे के आसार

मानसून सत्र में विपक्ष की रणनीति पर बात करते हुए पॉलिटिकल एक्सपर्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कह रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध ट्रेड करके रुकवाया है। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे पर भारतीय कूटनीति की विफलता को बड़ा मुद्दा बनाएगा। बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर भी हंगामा हो सकता है।’

‘राहुल गांधी के लिहाज से देखें तो वे डोनाल्ड ट्रम्प के दावे पर खुलकर बोल सकते हैं। राहुल गांधी ये पेश करने की कोशिश करेंगे कि सरकार अमेरिका के दबाव में आ गई।

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राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में वोटर लिस्ट को मुद्दा बनाया था। वे बिहार में चुनाव आयोग की पहल को भी तूल दे सकते हैं।QuoteImage

‘दूसरी तरफ सत्ता पक्ष विपक्ष की रणनीति नाकाम करने की तैयारी कर चुका है। मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस लीडर प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट आ गई है। शराब घोटाले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारी हुई है।’

हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘सत्ता पक्ष के पास भी ये दो बड़े मुद्दे हैं। वो विपक्ष को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरेगा। सरकार ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी बताएगी। बीते 10 साल में देश ने डिफेंस के क्षेत्र में क्या हासिल किया, सरकार ये बताने की कोशिश करेगी। सरकार 8 अहम बिल लाने वाली है। मुझे लगता है कि ये बिल हर हाल में पारित हो जाएंगे।’

‘विपक्ष के पास बिहार चुनाव के पहले विपक्षी एकजुटता दिखाने का बड़ा मौका होगा। विपक्ष को इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए। विपक्ष को सचमुच लगता है कि इंडिया गठबंधन काम कर रहा है तो बिहार चुनाव के पहले एकजुटता दिखाने के लिए इससे अच्छा मौका नहीं होगा। बजट सत्र में सपा नेता अखिलेश यादव संभल मुद्दे पर बोल रहे थे। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी अडाणी मुद्दे पर टीशर्ट पहनकर बाहर घूम रहे थे।’

‘विपक्षी खेमे में एकजुटता नहीं दिख रही, अभी यही जरूरी’

सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी कहती हैं, ‘ये देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी पार्टियां आपस में कितना मिलकर चलती हैं। विपक्ष ने ऑनलाइन मीटिंग करके रणनीति पर चर्चा की है, कोई आमने-सामने बैठकर बात नहीं की। इससे साफ है कि विपक्षी खेमे में एकजुटता नहीं है। संसद में विपक्ष को एकजुट दिखना और ज्यादा जरूरी है।’

‘अगर जून में संसद का विशेष सत्र होता, तो पूरा फोकस पहलगाम में सुरक्षा चूक, इंटेलिजेंस फेलियर पर होता। 21 जुलाई को सदन बैठेगा, तो कई और मुद्दे आ चुके हैं। मोहन भागवत ने 75 साल में नेताओं के रिटायर होने की बात कही है। मुझे लगता है कि इस पर भी चर्चा हो सकती है।’

संसद में विपक्ष की रणनीति पर नीरजा चौधरी का मानना है कि विपक्ष पार्लियामेंट में तो आपसी सहयोग कर लेते हैं। किस मुद्दे को वो सबसे अहम बनाएंगे, किस पर फोकस बनाएंगे, वो रणनीति का हिस्सा होता है।’

‘इस सरकार को बिल पास करवाने में कोई दिक्कत नहीं आती। विपक्ष की कुछ पार्टियों का वो येन-केन-प्रकारेण समर्थन हासिल कर ही लेते हैं। ऐसा कोई बिल नहीं है, जिसे लेकर विपक्ष कोई ठोस रुख ले रहा है। वहीं जज पर महाभियोग के मामले में सरकार और विपक्ष दोनों साथ ही हैं, तो बिल और इन प्रस्तावों पर कोई खास कशमकश देखने को मिलेगी, ऐसी उम्मीद कम है।’

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धनतेरस पर बाजारों में रौनक, सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से ज्वेलर्स को बंपर बिक्री की उम्मीद

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मुंबई, एजेंसी। धनतेरस के पर्व पर बाजारों में रौनक छाई हुई है और आभूषण विक्रेताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सोने-चांदी की कीमतों में नरमी और ग्राहकों की अच्छी अग्रिम बुकिंग से ज्वेलर्स को इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद है। सुबह से ही आभूषणों की दुकानों पर ग्राहकों का पहुंचना शुरू हो गया है। खुदरा विक्रेताओं को उम्मीद है कि दिन चढ़ने के साथ खरीदारी में तेजी आएगी और देर रात तक बाजारों में रौनक बनी रहेगी।

अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) के चेयरमैन राजेश आर. ने कहा कि आभूषण विक्रेताओं ने सुबह आठ बजे से ही अपनी दुकानें खोल दी थीं। उन्होंने कहा, ”ग्राहकों का आना अभी शुरू हुआ है। ज्यादातर ग्राहक पहले से बुक कराए गए आभूषण लेने आ रहे हैं। हमें उम्मीद है कि खुदरा विक्रेता देर रात तक दुकानें खुली रखेंगे और कारोबार करेंगे।” 

उन्होंने कहा, ”अमेरिका में चुनाव और सोने-चांदी की कीमतों में कमजोरी से उपभोक्ताओं की धारणा को समर्थन मिल रहा है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि इस साल बिक्री की मात्रा पिछले साल के बराबर या उससे थोड़ी अधिक रहेगी।” उन्होंने कहा कि इस साल उपभोक्ता मुख्य रूप से हल्के वजन वाले और 18 कैरेट के आभूषणों तथा अन्य किफायती वस्तुओं को पसंद कर रहे हैं। धनतेरस को हिंदू पंचांग में कीमती धातुएं खरीदने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। 

राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत बृहस्पतिवार को 19 प्रतिशत टूटकर 1,48,800 रुपए प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट, कर सहित) रह गई। यह 29 जनवरी, 2026 को दर्ज 1,83,000 रुपए के रिकॉर्ड स्तर से कम है। हालांकि, कीमतें पिछले साल 18 अक्टूबर को धनतेरस के दिन दर्ज 1,32,400 रुपए के स्तर से अब भी काफी अधिक हैं। चांदी की कीमत भी 29 जनवरी को दर्ज 4,04,500 रुपए प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर से 52 प्रतिशत घटकर 1,94,500 रुपए प्रति किलोग्राम रह गई है। हालांकि, यह धनतेरस 2025 पर दर्ज 1,70,000 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव से अब भी अधिक है। 

जीजेसी के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि ग्राहकों का आना अभी शुरू हुआ है और खुदरा विक्रेताओं को उम्मीद है कि दोपहर करीब दो बजे ग्राहकों की आवाजाही सबसे अधिक होगी और यह देर रात तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा, ”पिछले तीन दिनों में हमें अग्रिम बुकिंग की बहुत उत्साहजनक संख्या देखने को मिली है। हमें उम्मीद है कि शुभ अवसर होने के कारण ये बुकिंग आज अच्छी बिक्री में तब्दील होंगी।” 

उन्होंने कहा, ”इस साल उपभोक्ता मुख्य रूप से हल्के वजन वाले और 18 कैरेट के आभूषण पसंद कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि सोने और चांदी दोनों की बिक्री की मात्रा पिछले साल के स्तर के बराबर रहेगी।” खुदरा विक्रेता ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष पेशकश और योजनाएं भी ला रहे हैं। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता और दुनिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक है।  

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शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 80,100 के पार पहुंचा, निफ्टी 24,734 पर

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मुंबई, एजेंसी। सेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार को बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। बीएसई सेंसेक्स 849.98 अंक (1.07%) चढ़कर 80,159.99 अंक पर और एनएसई निफ्टी 197.40 (0.80%) अंक की तेजी के साथ 24,734 अंक पर कारोबार कर रहा है।

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर में चार प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। कंपनी का जुलाई-सितंबर तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 25 प्रतिशत बढ़कर 4,587.88 करोड़ रुपए रहा जिससे उसके शेयर में तेजी आई है। टाइटन, एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और भारती एयरटेल के शेयर में भी तेजी रही। 

वहीं, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर गिरावट में रहे। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग काफी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी शेयर बाजार बृहस्पतिवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे। नैस्डैक कम्पोजिट 5.52 प्रतिशत लुढ़क गया, एसएंडपी 500 में 4.36 प्रतिशत की गिरावट आई और डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 3.44 प्रतिशत नीचे रहा। 

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव 2.35 प्रतिशत बढ़कर 100.6 डॉलर प्रति बैरल पर था। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 14,974.68 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। सेंसेक्स बृहस्पतिवार को 2,008.61 अंक यानी 2.60 प्रतिशत उछलकर और निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ था।

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अमेरिकी बाजार में हाहाकार से अरबपतियों को झटका, एलन मस्क के डूबे 79.7 अरब डॉलर

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नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को आई भारी गिरावट का असर दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों की संपत्ति पर भी देखने को मिला। AI सेक्टर में बढ़ती अनिश्चितता और कंपनियों के भारी निवेश पर संभावित सरकारी नियंत्रण की आशंका से निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। इसका नतीजा यह हुआ कि दुनिया के टॉप 10 अरबपतियों की नेटवर्थ में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा नुकसान दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क को हुआ, जिनकी संपत्ति एक ही दिन में 79.7 अरब डॉलर कम हो गई।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, इस गिरावट के बाद मस्क की कुल नेटवर्थ घटकर 785 अरब डॉलर रह गई। उनकी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट ने उनकी संपत्ति को बड़ा झटका दिया। गुरुवार को स्पेसएक्स के शेयर 9.05 फीसदी और टेस्ला के शेयर 10.77 फीसदी टूट गए। हालांकि, इस साल अब तक मस्क की नेटवर्थ में 312 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो चुकी है।

जेफ बेजोस से जकरबर्ग तक, इन अरबपतियों को भी नुकसान

अमेरिकी बाजार की बिकवाली का असर टेक्नोलॉजी सेक्टर के बड़े कारोबारियों पर भी पड़ा। Nvidia के शेयरों में गिरावट के कारण कंपनी के सीईओ जेंसन हुआंग की नेटवर्थ 15.1 अरब डॉलर घटकर 151 अरब डॉलर रह गई। वह अमीरों की वैश्विक सूची में 13वें स्थान पर पहुंच गए।

वहीं, डेल टेक्नोलॉजीज के माइकल डेल की संपत्ति में 19.4 अरब डॉलर की कमी आई और उनकी नेटवर्थ 190 अरब डॉलर रह गई।

Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस को 4.99 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जबकि लैरी पेज की संपत्ति 4.24 अरब डॉलर घट गई। सर्गेई ब्रिन को 3.88 अरब डॉलर और Meta के मार्क जकरबर्ग को 8.41 अरब डॉलर का झटका लगा। इसके अलावा वॉरेन बफे की नेटवर्थ 2.26 अरब डॉलर और लैरी एलिसन की संपत्ति 10.1 अरब डॉलर कम हो गई।

अडानी-अंबानी की दौलत में बढ़ोतरी

जहां अमेरिकी अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट आई, वहीं भारतीय उद्योगपतियों के लिए गुरुवार का दिन बेहतर रहा। भारतीय शेयर बाजार में तेजी के चलते गौतम अडानी और मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में इजाफा हुआ।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, गौतम अडानी की संपत्ति 1.12 अरब डॉलर बढ़कर 117 अरब डॉलर पहुंच गई। वह दुनिया के अमीरों की सूची में 18वें स्थान पर हैं।

दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में 51 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ उनकी कुल संपत्ति 87.3 अरब डॉलर हो गई और वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 22वें स्थान पर पहुंच गए।

इस तरह अमेरिकी बाजार की गिरावट ने जहां दुनिया के कई बड़े अरबपतियों की संपत्ति घटा दी, वहीं भारतीय शेयर बाजार की तेजी ने अडानी और अंबानी को राहत दी।

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