कोरबा
कोरबा की सड़क यात्रा गांवों को जोड़ा विकास से, सड़कों ने लिखी प्रगति की नई गाथा
41 सड़कों से लेकर 1,729 किलोमीटर तक हर गांव तक पहुंची पक्की डगर
136 गौरव पथ, 50.10 किमी हर गांव में गौरव और सुविधा
कोरबा । छत्तीसगढ़ राज्य अपने स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर रजत महोत्सव के ऐतिहासिक अवसर पर विकास की सुनहरी कहानी लिख रहा है। बीते ढाई दशकों में राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, उद्योग, ऊर्जा और ग्रामीण आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अद्वितीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र है सड़क संपर्क और परिवहन सुविधा का विस्तार, जिसने गांवों को शहरों से, किसानों को बाजारों से और नागरिकों को अवसरों से जोड़ा है। कोरबा जिला, जो राज्य की औद्योगिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। आज सड़क विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यहाँ की पहाड़ी और वनांचल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, राज्य शासन ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत दूरस्थ ग्रामों तक पक्की सड़कों का जाल बिछाया है। रजत महोत्सव के अवसर पर जब राज्य के 25 वर्षों की यात्रा पर नजर डाली जाती है, तो कोरबा जिले का यह सड़क विकास अभियान गांव-गांव तक पहुँची प्रगति का प्रतीक बनकर उभरता है।
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना : गांवों तक पहुंची पक्की राह

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य राज्य के उन ग्रामीण अंचलों तक सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है जहाँ अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुँची थीं। कोरबा जिले में इस योजना के तहत वर्ष 2025 तक कुल 41 सड़कों का निर्माण किया गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 108.67 किलोमीटर है। इन सड़कों ने न केवल ग्रामीणों को अपने निकटतम बाजार, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों से जोड़ा है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी नई गति दी है। पहले जहाँ ग्रामीणों को बारिश के मौसम में आवाजाही में कठिनाई होती थी, वहीं अब पक्की सड़कों के निर्माण से आवागमन सुगम हुआ है। सड़कें केवल मिट्टी और डामर का मार्ग नहीं, बल्कि विकास का माध्यम हैं और कोरबा जिले के ग्रामीण अंचलों में यह परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। इन मार्गों से किसानों को अपने कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में आसानी हुई है। छात्र-छात्राओं को स्कूल और कॉलेज तक निर्बाध पहुँच मिली है, वहीं बीमार व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में सुविधा बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना : गांवों की पहचान बनी गौरव पथ
मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना का लक्ष्य गांवों के भीतर प्रमुख मार्गों का सौंदर्यीकरण और पक्की सड़कों से ग्राम के गौरव को सुदृढ़ करना है। इस योजना ने ग्रामीण संरचना को एक नई पहचान दी है। कोरबा जिले में इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 तक कुल 136 गौरव पथों का निर्माण संपन्न हुआ है। इन गौरव पथों की कुल लंबाई 50.10 किलोमीटर है। इन गौरव पथों ने गांवों की मुख्य गलियों को पक्की सड़कों से जोड़कर स्वच्छता, सुगमता और सौंदर्य को एक साथ जोड़ा है। जहाँ पहले बरसात के मौसम में कीचड़ से भर जाने वाली गलियां थीं, वहाँ अब मजबूत कांक्रीट सड़कों पर बच्चे खेलते हैं, और त्योहारों पर गांव की चौपालों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह गौरव पथ वास्तव में ग्रामीण गौरव के प्रतीक बन गए हैं जिन पर ग्रामवासी गर्व से कहते हैं, “अब हमारा गांव भी शहर जैसा दिखता है।”
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना : दूरस्थ गांवों तक पहुंची नई रोशनी

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देशभर में ग्रामीण संपर्क का नया युग प्रारंभ किया, और छत्तीसगढ़ में इस योजना का प्रभाव सबसे अधिक दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में दिखाई देता है। कोरबा जिला, जो पर्वतीय और वनाच्छादित क्षेत्र है, वहाँ इस योजना के माध्यम से ऐसे कई गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा गया है, जो पहले मानचित्र पर केवल नाम मात्र के रूप में दर्ज थे। कोरबा जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक 397 नई सड़कों का निर्माण किया गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 1,729.00 किलोमीटर है। इतना ही नहीं, आवागमन को और सुदृढ़ करने के लिए 13 नए पुलों (वृहद पुलों) का भी निर्माण किया गया है, जिससे वर्षा ऋतु के दौरान आने-जाने में होने वाली कठिनाइयाँ अब अतीत की बात बन चुकी हैं। इन पुलों ने न केवल सड़कों को जोड़ा है, बल्कि दिलों को भी करीब लाया है। अब ग्रामीणों को किसी नदी या नाले के कारण दिनभर का रास्ता तय नहीं करना पड़ता। यह सुविधा हर नागरिक के जीवन में सुगमता और सुरक्षा लेकर आई है।
विकास की राह पर कोरबा : अब हर गांव विकास से जुड़ा
राज्य शासन ने सदैव इस बात पर बल दिया है कि विकास तभी सार्थक है जब वह अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं का लाभ हर ग्राम पंचायत तक पहुंचे। सड़क निर्माण का यह अभियान न केवल भौतिक विकास का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक उन्नति का आधार भी है। जहाँ पहले ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवल कृषि और वनोपज तक सीमित थी, वहीं अब सड़क कनेक्टिविटी ने ग्रामीण बाजारों और उद्यमिता को भी गति दी है। महिलाओं के स्व-सहायता समूह अब अपने उत्पादों को शहरों तक पहुँचाने में सक्षम हैं। स्कूली छात्राएं अब सुरक्षित रूप से स्कूल जा पा रही हैं। यह सब सड़क विकास की सीधी देन है।
सुगम संपर्क से बढ़ा व्यापार, पर्यटन और रोज़गार

सड़कों के निर्माण से जिले के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हुई है। हसदेव नदी के तट, पहाड़ी झरने, और ग्रामीण पर्यटन स्थलों तक अब पर्यटक सरलता से पहुंच पा रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। वहीं व्यापारियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी आर्थिक लाभ हुआ है। कोरबा के औद्योगिक क्षेत्रों बालकोनगर, दीपका, गेवरा और कटघोरा तक बेहतर सड़क संपर्क ने औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा दी है। कोरबा जिला प्रशासन ने सड़क निर्माण में पर्यावरण संतुलन को भी प्राथमिकता दी है। जहाँ संभव हुआ है, वहाँ वृक्षारोपण और जलनिकासी व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया है। सड़क किनारों पर पौधरोपण अभियान चलाकर हरित कोरबा का सपना साकार किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य अपने रजत महोत्सव वर्ष में केवल अतीत की उपलब्धियों का जश्न नहीं मना रहा, बल्कि भविष्य के सुनहरे लक्ष्य भी तय कर रहा है। आगामी वर्षों में भी मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, गौरव पथ योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई परियोजनाएं स्वीकृत की जा रही हैं। राज्य शासन का उद्देश्य है कि जिले के प्रत्येक ग्राम को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाए ताकि कोई भी बस्ती विकास की मुख्यधारा से अछूती न रहे।
जिले की सड़क विकास यात्रा इस बात का उदाहरण है कि जब शासन का उद्देश्य स्पष्ट और जनता का सहयोग सशक्त हो, तो कोई भी भौगोलिक चुनौती बाधा नहीं बन सकती। आज जब छत्तीसगढ़ अपनी रजत जयंती मना रहा है, तब कोरबा का हर नागरिक गर्व से कह सकता है “हमारी सड़कों ने बदल दी हमारी दुनिया।”
यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उस जमीनी बदलाव की गवाही है, जो सड़कों के रूप में हर घर, हर गांव और हर नागरिक तक पहुँची है। यह विकास की वह डगर है, जो आने वाले वर्षों में न केवल कोरबा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को स्वावलंबन, सुगमता और समृद्धि की दिशा में अग्रसर करेगी। कोरबा की यह सड़क विकास यात्रा हमें यह भी दिखाती है कि कैसे एक क्षेत्र में समर्पित योजना, संसाधनों का उचित उपयोग और सामूहिक प्रयास समाज को बदल सकते हैं। 25 वर्षों की इस अवधि में हर गाँव और नगर में हुए परिवर्तनों ने यह स्पष्ट किया है कि सड़कें केवल भौतिक संरचना नहीं हैं, बल्कि वे जीवन की गति, सामाजिक समृद्धि और सांस्कृतिक धरोहर की संरक्षक भी हैं।
कोरबा
कोरबा प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह कल, उप मुख्यमंत्री अरुण साव होंगे मुख्य अतिथि
कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी (कार्यकाल 2026-28) का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार, 23जुलाई को दोपहर 12 बजे पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार, रामपुर (कोरबा) में आयोजित किया जाएगा। समारोह में छत्तीसगढ़ शासन के उप मुख्यमंत्री एवं कोरबा जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
समारोह में कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पाण्डेय, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया, कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत, नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर तथा जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रहेगी।

कार्यक्रम में कोरबा प्रेस क्लब के संरक्षक कमलेश यादव, अध्यक्ष नौशाद खान, उपाध्यक्ष राजकुमार शाह, सचिव दिनेश राज, उप सचिव हरीश तिवारी, कोषाध्यक्ष दुर्गेश श्रीवास्तव तथा कार्यकारिणी सदस्यों राजेश कुमार मिश्रा (मिट्ठू), नवाब हुसैन और आकाश शर्मा सहित पूरी कार्यकारिणी पद एवं गोपनीयता की शपथ लेगी।
शपथ ग्रहण समारोह में रायपुर प्रेस क्लब, बिलासपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों एवं पत्रकारों के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर पत्रकारों और मीडिया जगत में उत्साह का माहौल है।
कोरबा प्रेस क्लब ने जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से समारोह में उपस्थित होकर नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का उत्साहवर्धन करने की अपील की है।
कोरबा
“पहले न्याय, फिर जनसुनवाई” – वर्षों से लंबित वादे पूरे किए बिना मानिकपुर परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई स्वीकार नहीं : जयसिंह अग्रवाल
कोरबा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की मानिकपुर ओपनकास्ट विस्तार परियोजना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रभावित ग्रामीणों के वर्षों पुराने लंबित मुद्दों का समाधान किए बिना पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित करना केवल कानूनी औपचारिकता पूरी करने का प्रयास होगा, जिसे प्रभावित जनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को विस्तृत पत्र भेजकर मांग की है कि 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले सभी लंबित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार एवं विस्थापन संबंधी मामलों का निराकरण किया जाए, अन्यथा जनसुनवाई तत्काल स्थगित कर नई तिथि घोषित की जाए।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि एसईसीएल को यह समझना होगा कि पर्यावरणीय जनसुनवाई कोई खानापूर्ति या सरकारी फाइल पूरी करने की प्रक्रिया नहीं है। यह उन हजारों परिवारों के भविष्य का प्रश्न है, जिनकी जमीन, मकान, खेती, रोजगार, जलस्रोत और पूरा सामाजिक जीवन इस परियोजना से प्रभावित होने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भिलाई खुर्द, दादरखुर्द, मानिकपुर, इमलीडुग्गू, उरगा, कुरूडीह, बेन्दरकोना, गोढ़ी, पंडरीपानी, सेमीपाली सहित अनेक गांवों के लोग वर्षों से एसईसीएल के अधूरे वादों का बोझ उठा रहे हैं। पिछली जनसुनवाइयों में रोजगार, पुनर्वास, लंबित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, धूल नियंत्रण, ब्लास्टिंग से क्षति का मुआवजा, हरित पट्टी विकास तथा स्थानीय परिवहनकर्ताओं को अवसर देने जैसे अनेक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अधिकांश आज भी कागजों तक सीमित हैं।
उन्होंने कहा कि जब पुराने वादे पूरे नहीं हुए, तब नई जनसुनवाई में दिए जाने वाले आश्वासनों पर जनता विश्वास कैसे करे?
पूर्व मंत्री ने भिलाई खुर्द के सर्वेक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 50 परिवारों को मनमाने ढंग से सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य मकानों को शामिल कर लिया गया। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए सभी छूटे परिवारों का निष्पक्ष पुनः सर्वे कराने की मांग की।
जयसिंह अग्रवाल ने पुनर्वास नीति को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ₹6.91 लाख देकर प्रभावित परिवारों से यह कहना कि वे स्वयं जमीन खरीदकर नया मकान बना लें, वास्तविकता से पूरी तरह कटा हुआ निर्णय है। आज की परिस्थितियों में इतनी राशि से न जमीन खरीदी जा सकती है और न सम्मानजनक आवास बनाया जा सकता है। यदि एसईसीएल हजारों करोड़ रुपये का कोयला निकाल सकती है तो उसे प्रभावित परिवारों के लिए विकसित पुनर्वास कॉलोनी बसाने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कचांदी नाला को क्षेत्र के किसानों की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इसके साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ हजारों किसानों की सिंचाई व्यवस्था और भूजल पर गंभीर प्रभाव डालेगी। बिना वैज्ञानिक अध्ययन, वैकल्पिक व्यवस्था और ग्रामीणों की सहमति के इसका डायवर्सन किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में कोयला परिवहन आबादी के बीच से कराने के बजाय मानिकपुर से बरबसपुर बायपास तक रेलवे लाइन के समानांतर वैकल्पिक सड़क बनाई जाए, जिससे दुर्घटनाएं कम हों, प्रदूषण घटे और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
जयसिंह अग्रवाल ने वर्ष 1964 से 1968 के बीच तत्कालीन नेशनल कोल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) द्वारा अधिग्रहित भूमि के लंबित मुआवजा प्रकरणों को एसईसीएल के इतिहास का सबसे बड़ा लंबित न्यायिक एवं मानवीय प्रश्न बताया। उन्होंने कहा कि लगभग छह दशक बाद भी अनेक परिवार अपने पूर्वजों की भूमि का वैधानिक मुआवजा पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को विवश हैं। केवल यह कह देना कि राशि किसी ट्रिब्यूनल में जमा है, सार्वजनिक उपक्रम की जिम्मेदारी से बचने का आसान रास्ता नहीं हो सकता। एसईसीएल को ग्रामवार समीक्षा कर सभी वैधानिक उत्तराधिकारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि जनसुनवाई से पहले पूर्व के सभी आश्वासनों की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, लंबित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मामलों का निराकरण किया जाए, पुनर्वास पैकेज का पुनर्मूल्यांकन हो, भिलाई खुर्द के सभी छूटे परिवारों को सर्वे में शामिल किया जाए तथा जिला प्रशासन, एसईसीएल और प्रभावित ग्रामीणों की संयुक्त बैठक बुलाकर सभी विवादों का समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी विकास का विरोध नहीं करती, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की बलि भी स्वीकार नहीं करेगी। जनता की सहमति के बिना विकास नहीं, बल्कि संघर्ष पैदा होता है।”
जयसिंह अग्रवाल ने अंत में कहा कि यदि 21 अगस्त 2026 से पहले उपर्युक्त सभी प्रमुख मुद्दों पर ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तो प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल स्थगित किया जाना चाहिए। यदि बिना समाधान के केवल औपचारिक जनसुनवाई आयोजित की जाती है और उसके दौरान प्रभावित ग्रामीण लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते हैं अथवा कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।






कोरबा
अग्रवाल सभा दर्री जमनीपाली के 2026 – 2029 के लिए नवीन कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से चयन, सुरेश कुमार अग्रवाल अध्यक्ष नियुक्त
जमनीपाली। जमनीपाली के साडा कॉलोनी स्थित अग्रसेन भवन में अग्रवाल सभा दर्री जमनीपाली की बैठक सभा के अध्यक्ष प्रेमकुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई । बैठक में अग्रवाल सभा दर्री जमनीपाली के आगामी कार्यकाल 2026 – 2029 के लिए नवीन कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से चयन किया गया । सर्वप्रथम अध्यक्ष पद के लिए सुरेश कुमार अग्रवाल (पत्रकार) के नाम का प्रस्ताव प्रेमकुमार अग्रवाल ने रखा जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया । वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए बैजनाथ अग्रवाल (भवानी) राजेन्द्र अग्रवाल राजा दर्री, मनीष अग्रवाल दर्री, प्रेमकुमार अग्रवाल सुमेधा का चयन किया गया । मनोज कुमार अग्रवाल एल्डरमेन को एक बार पुन: सचिव पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। सहसचिव आशीष अ्ग्रवाल बंटी स्याहीमुड़ी को बनाया गया, कोषाध्यक्ष के पद के लिए सुरेश अग्रवाल (बालाजी) के नाम का चयन किया गया । दर्री जमनीपाली अग्रवाल सभा का गठन 2007 में किया गया था तब से आज तक लगातार कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सुरेश अग्रवाल बालाजी को दिया जाता रहा है ।

पहली बार सह कोषाध्यक्ष पद का गठन किया गया, इस पद के लिए अशोक स्टील के संचालक अशोक कुमार अग्रवाल के नाम की घोषणा की गई । मंत्री आशीष अग्रवाल पूर्व एल्डरमेन, प्रचार प्रसार सचिव प्रतीक अग्रवाल और विकास अग्रवाल, श्यामा मेडिकोज को बनाया गया । कार्यकारिणी सदस्य में विनोद सिंघानिया एवं राजू भाई गोयल का चयन किया गया । आयकर सलाहकार मुकेश अग्रवाल, विधिक सलाहकार दिलीप अग्रवाल अधिवक्ता तथा निर्माण सलाहकार शुभम अग्रवाल सिविल इंजीनियर को बनाया गया है ।
संरक्षक पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, सभा के पूर्व अध्यक्ष प्रेमकुमार अग्रवाल, अशोक अग्रवाल प्रगति, महेश अग्रवाल बुंदेलखंड को बनाया गया ।
विशेष आमंत्रित सदस्य में गौरीशंकर अग्रवाल, हरिप्रकाश, लक्खीराम, घनश्याम प्रसाद अग्रवाल, बैजनाथ महेश्वरी, द्वारिका शर्मा, विनोद छुरी, मुकेश मधु स्वीट्स, हनुमान मित्तल, विष्णु पोद्दार, सुरेश जगदम्बा, अशोक अग्रवाल दर्री, गोविंद सिंघानिया, ऋषि कुमार, मुरारी लाल, सीताराम मनाेज कुमार, संजीव पोद्दार, विजय सोसायटी, रमेश सोसाइटी, प्रमोद अग्रवाल एलआईसी, विजय प्रगति, सुलभ प्रगति, केशव अग्रवाल, विक्रम कुमार शैम्पी अग्रवाल, गणेश अग्रवाल, भरत अग्रवाल, बजरंग गाेयल, सुरेश सोसाईटी, मनोज सिंघानिया, अशोक अग्रवाल अशोक क्लाथ, मनीष पालीवाल, मनोज ड्रग हाउस, राकेश गाेयल ड्रगडील, चतुर्भुज अग्रवाल, गिरधारी लाल, राकेश सिंघानिया, अरविंद अग्रवाल, दयानंद गुप्ता, अशोक जगदम्बा क्लाथ, केदारनाथ, रोशन कुमार, संजय सुमेधा, अशोक विनु, अर्जुन सिंघानिया, गोविंद अग्रवाल दर्री, प्रदीप अग्रवाल दर्री, ओमप्रकाश सुमित अग्रवाल, अमित लाला, सौरभ अग्रवाल पार्वतीमाल, दिनेश खेतान, दुर्गेश अग्रवाल, दीपक इंदिरानगर, अजय इंदिरानगर, टिंकु जमनीपाली, रामजीवन अग्रवाल, शिव अग्रवाल, ऋषिकेश जमनीपाली, अशोक जमनीपाली, शैलेष गाेयल, अरूण अग्रवाल, बद्रीनाथ, अरूण केडिया, नीलेश समलेश्वरी, आशीष मंगलाबाजार विकास मित्तल, संदीप अयोध्यापुरी, चंद्रप्रकाश जैलगांव, सुरेश कुमार जमनीपाली, अनुप गुप्ता, बृजेश एचटीपीपी, सुरेश अग्रवाल एचटीपीपी, विजय अग्रवाल स्याहीमुड़ी, विजय गर्ग, सुरेश बुंदेलखंड, राजू राजकुमार, विनय केडिया, शिव सिंघानिया, प्रमोद बर्तन, विजय एमआईजी 72, विजय आरटीओ, रविश्याम आटो, डी डी अग्रवाल, संतोष मेडिकल, रामलाल तिरूपति, राकेश शारदा प्रोविजन एनटीपीसी, केदारनाथ, कांशी अग्रवाल, राजेश आईबीपी, पी डी अग्रवाल, मुकेश छाया बाजार, सुशील मारूति बिलासपुर, अनिल दर्री, मनोज गाेयल दर्री, विजय राजेश बर्तन, संजय भगवती दर्री, अरूण गाेयल दर्री, अरूण गाेयल दर्री, अरूण मित्तल दर्री, अजय मित्तल दर्री, सुशील सिंघानिया, रविगोयल दर्री, जगदीश बुक दर्री, राजा केडिया, राजकुमार दर्री, मयंक सिंघानिया, सुभाष सिंघानिया, संजय वर्षा दर्री, कमल मित्तल दर्री, शंकर महेश्वरी, जुगल किशोर खेमका सहित अग्रवाल सभा दर्री जमनीपाली के समस्त आजीवन सदस्यों को विशेष आमंत्रित में शामिल किया गया है ।
नवनियुक्त अध्यक्ष सुरेश कुमार अग्रवाल ने अग्रवाल सभा दर्री जमनीपाली के समस्त अग्रबंधुओं का आभार जताते हुए कहा कि समाज ने जिस विश्वास के साथ अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण भूमिका के निर्वहन के लिए मुझें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उस विश्वास पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करूंगा । मैं और मेरी टीम अग्रबंधुओं के सहयोग से समाज को ऊँचाईयों तक ले जाने के लिए कार्य करेंगे ।
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