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कोरबा

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व सामाजिक विकास को मजबूती प्रदान करने एसईसीएल ने किए ₹11.87 करोड़ के 4 सीएसआर एमओयू

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बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, प्रारंभिक बाल विकास तथा परियोजना-प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग रू.11.87 करोड़ की कुल लागत वाले विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर आज एसईसीएल मुख्यालय में निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास के मार्गदर्शन में किए गए।

स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ीकरण

स्वास्थ्य क्षेत्र में सीएसआर हस्तक्षेप के तहत, एसईसीएल द्वारा अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर आधारित एयर स्टेरिलाइजेशन तकनीक के माध्यम से प्रमुख शासकीय अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, इनडोर एयर क्वालिटी एवं रोगी सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, कोरबा में रू.2.81 करोड़ की लागत से 62 सेमीकंडक्टर एयर स्टेरिलाइज़र यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। ये यूनिट्स ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, एमआईसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू, लेबर रूम, टीबी वार्ड, बर्न वार्ड सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में लगाई जाएंगी, जिससे स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण एवं चिकित्सा कर्मियों की कार्यस्थल सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा।

इसी क्रम में कुमार साहब स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव शासकीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, बिलासपुर में रू.3.49 करोड़ की लागत से 77 सेमीकंडक्टर एयर स्टेरिलाइज़र यूनिट्स स्थापित की जाएंगी, जिससे ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, एमआईसीयू, डायलिसिस यूनिट्स सहित अन्य उपचार कक्षों में रोगी सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों को और सुदृढ़ किया जाएगा।

प्रारंभिक बाल विकास एवं सामाजिक अवसंरचना
एसईसीएल ने श्रृष्टि सेवा समिति, उदयपुर (राजस्थान) के साथ रू.4.72 करोड़ की लागत से बिलासपुर जिले में 200 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों के विकास हेतु एमओयू किया है। इस परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण, स्वच्छता सुविधाओं का विकास, फर्नीचर एवं बाल अनुकूल शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

परियोजना-प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल

सामुदायिक कल्याण की दिशा में, एसईसीएल ने सीपेट, रायपुर के साथ गेवरा क्षेत्र के परियोजना-प्रभावित गांवों में 30 लीटर क्षमता के 3,989 घरेलू वाटर फिल्टर सेट एवं वाटर ट्रीटमेंट किट के वितरण हेतु ₹84.73 लाख की लागत से एमओयू किया है।

सभी समझौते एसईसीएल की ओर से महाप्रबंधक (सीएसआर) सी. एम. वर्मा द्वारा निष्पादित किए गए। इस अवसर पर सीएसआर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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कोरबा

भाजपा कोसाबाड़ी मण्डल की मासिक कार्यसमिति बैठक सम्पन्न

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कोरबा। राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सर्व विकास की विचारधारा से राष्ट्र निर्माण को समर्पित भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार कोसाबाड़ी मण्डल के तत्वाधान में मासिक कार्यसमिति बैठक का आयोजन दिनाँक 02/06/26 को रामजानकी मंदिर, बुधवारी क्रमांक 02 में राष्ट्र प्रथम, अनुशासन और सेवा के भाव से इस विश्व युद्ध की विपदाकल में विश्व कल्याण एवं विपक्षी दलों के विकृत मानसिकता को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु प्रभु श्री राम के परम भक्त श्री हनुमान जी के समक्ष हनुमान चालीसा का सामुदायिक पाठ किया गया।

कार्यक्रम में रायपुर संभाग सह प्रभारी डॉ राजीव सिंह के मुख्य आतिथ्य, विशिष्ट अतिथि जिलाउपाध्यक्ष श्रीमती मंजू सिंह एवं जिला महामंत्री व मंडल प्रभारी संजय शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा हुई तथा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई गई।

कोसाबाड़ी मण्डल अध्यक्ष डॉ राजेश राठौर के अध्यक्षता में समस्त शक्तिकेन्द्रों एवं बूथ स्तर पर बूथ समिति का गठन, कार्यकर्ताओं की गतिविधियों तथा अन्य संगठनात्मक विषयों की जानकारी दी गई।

इस कार्यक्रम में दीप नारायण सोनी, अर्जुन गुप्ता जिला संवाद प्रमुख, संजीव शर्मा, शैलेंद्र सिंह, नीरज ठाकुर, श्रीमती तृप्ति सरकार, मण्डल महामंत्री मिलाप राम बरेठ, पुनि राम साहू, कोषाध्यक्ष अनिल वस्त्रकार, शिव चंदेल, गोप लाल राठिया, श्रीमती सरस्वती पटेल, तेरस दास दीवान, श्रीमती मीरा सोनी, वार्ड पार्षद पंकज देवांगन, ललेश दुबे, गिरधारी रजक, श्रीमती स्वाति कश्यप, श्रीमती चंचला राठौर, श्रीमति प्रीति चौहान, कपूर चंद पटेल, दिनू, श्रीमती गोमती गेदरे, श्रीमती सरिता कर्ष, दर्शन रजक, नारायण महंत, महेंद्र यादव, दीपेश श्रीवास, राम लाल पटेल, अयोध्या प्रसाद सोनी, मनोज शर्मा, करन राजपाल, धरम पाल सोलंकी, राजकुमार शर्मा, अमित पटेल, बद्री वस्त्रकार, विवेक राजवाड़े, हेमंत चंद्रा, भरत सोनी, रामकुमार पटवा, रमेश साहू, वीरेंद्र नायक, मनोज कंवर, बलदेव दीवान, श्रीमती फूलमती भगत, धन साय साहु, श्रीमती अंबिका यादव, शुभम यादव, शिव देवांगन, प्रवीण, श्रीमती तुलसी सूर्यवंशी, श्रीमती संतोषी लदेर, मंडल मोर्चा अध्यक्षगण भजन कंवर, करन राजपाल, कृपाल कंवर, श्याम साहू, गुलजार सिंह, सौरभ दुबे, गुरुदयाल, ठ्ठस्र साहू, अशोक अगरिया, चंदन मजूमदार , मुन्ना साहु, श्रीमती कविता सोनी, लीला राम पटेल, श्याम यादव, मनोज कंवर, संत लाल, तीरथ चौहान, श्रीमती केया सेन, राकेश यादव, श्रीमती सपना झा, श्रीमती कृष्णा राठौर, श्रीमती अनुराधा पांडेय के साथ बड़ी संख्या में बूथ अध्यक्ष एवं कर्मठ कार्यकर्ताओं के साथ टिफीन बैठक संपन्न कर भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को बूथ स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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कोरबा

पेड़ की डाल नहीं, पूरा विशाल धौरा वृक्ष गिरा था, वन विभाग के दावे पर उठे सवाल

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कोरबा/पाली। पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरका डांड में शनिवार शाम आंधी-तूफान और बारिश के दौरान हुई दर्दनाक घटना में तीन युवकों की मौत के मामले में अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि तीनों युवक बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे रुके हुए थे, तभी पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई। लेकिन मीडिया टीम के मौके पर पहुंचने पर सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

घटनास्थल पर देखा गया कि कोई डाल नहीं टूटी थी, बल्कि एक विशाल धौरा का पेड़ जड़ सहित गिरा हुआ था। वहीं ग्रामीणों, मृतक दिनेशु तिर्की के परिजनों तथा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि घटनास्थल पर वन समिति के माध्यम से सूअर पालन के लिए कोठा निर्माण का कार्य चल रहा था। उनके अनुसार दिनेशु तिर्की और कमलेश बड़ा निर्माण कार्य में लगे हुए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक तेज आंधी-तूफान शुरू हुआ। इसी दौरान धौरा वृक्ष से आवाज आई और कुछ ही क्षणों में वह घूमकर निर्माण स्थल पर गिर पड़ा। पेड़ के नीचे काम कर रहे युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में एक महिला को भी सिर और हाथ में हल्की चोटें आईं, जिसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। इसके बाद लोगों ने किसी तरह दबे हुए लोगों को बाहर निकाला और घायल युवकों को वाहन की व्यवस्था कर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां जांच उपरांत दो युवकों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल युवक को रेफर किया गया, जिसकी रास्ते में मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र होने के कारण तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया और अस्पताल पहुंचने में करीब ढाई घंटे का विलंब हुआ।

इधर जब इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य में युवकों को लगाए जाने से इनकार किया। यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में युवक शामिल नहीं थे तो वे घटनास्थल पर क्या कर रहे थे? ग्रामीण, परिजन और वहां मौजूद महिलाएं निर्माण कार्य में लगे होने की बात क्यों कह रही हैं? यदि वन समिति के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां कार्यरत लोगों की निगरानी कौन कर रहा था? निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या कार्य शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन किया गया था? यदि नाबालिग मौके पर मौजूद थे तो उनकी उपस्थिति किन परिस्थितियों में थी? क्या निर्माण कार्य के लिए मजदूरों का कोई पंजीयन या उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था? दुर्घटना के समय वहां कितने लोग काम कर रहे थे और उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया था? आखिर घटना के संबंध में सामने आ रहे अलग-अलग दावों में सच्चाई क्या है?

मृतकों में 14 वर्षीय शिवराम टेकाम और 17 वर्षीय दिनेश तिर्की भी शामिल हैं। ऐसे में नाबालिगों से कार्य कराए जाने की आशंका को लेकर मामला और गंभीर हो जाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना के समय वहां वास्तव में क्या कार्य चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।फिलहाल यह मामला केवल प्राकृतिक दुर्घटना तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

चोरकाडांड निवासी हीरा सिंह ने बताया कि वन विभाग द्वारा पशुपालन के लिए भवन निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें युवक कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार मौसम सामान्य था और केवल हल्की हवा चल रही थी। इसी दौरान अचानक एक विशाल धौरा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।

मृतक दिनेशु तिर्की की मां हीरामणि ने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन दिनों से वहां काम पर जा रहा था। घटना की जानकारी गांव के एक युवक ने आकर दी, जिसके बाद वह तत्काल घटनास्थल पहुंचीं। ग्रामीणों की मदद से वाहन की व्यवस्था कर घायल युवकों को पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत की खबर मिली।

काम करने वाली राधाबाई बाइसेम्हर ने बताया कि वह एक अन्य महिला के साथ दो दिनों से निर्माण कार्य में लगी थीं। हादसे के समय वह बालू उठा रही थीं, जबकि दूसरी महिला बालू छान रही थी। तभी कटने जैसी तेज आवाज सुनाई दी। जान बचाने के लिए भागते समय विशाल धौरा वृक्ष गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। राधाबाई ने बताया कि तीनों युवक पिछले दो दिनों से पानी ढुलाई और मसाला बनाने का काम कर रहे थे।

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कोरबा

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले में एक लाख से अधिक आवास पूर्ण

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मनरेगा के माध्यम से हितग्राहियों को मिल रहा 90 दिवस का रोजगार

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया है। वर्ष 2016 से अब तक जिले में कुल 1,00,013 आवासों का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के आवासहीन एवं वंचित परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए चरणबद्ध तरीके से 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य हेतु 90 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे हितग्राहियों को मजदूरी भुगतान का लाभ भी प्राप्त होता है।

योजना के अंतर्गत एसईसीसी-2011 सर्वे तथा वर्ष 2018 में आयोजित आवास प्लस सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों को क्रमबद्ध रूप से आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

जिले में वर्ष 2016 से 2023 के दौरान 61,223 आवास पूर्ण किए गए, जबकि वर्ष 2024 से 2026 के बीच 37,804 आवासों का निर्माण पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 478 आवास तथा प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 508 आवास पूर्ण किए गए हैं।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में एक लाख से अधिक आवासों का पूर्ण होना ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

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