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ऑपरेशन सिंदूर पर अमेरिकी फर्म का दावा:पाकिस्तान ने संघर्ष रुकवाने के लिए 60 बार गुहार लगाई, भारत ने भी संपर्क किया था

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नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं। इसके मुताबिक पिछले साल अप्रैल में भारत के चलाए ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान डर गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जंग रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में अपने डिप्लोमैट के जरिए लॉबिंग की थी। इसके तहत अमेरिका में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अफसरों के साथ करीब 60 बार संपर्क किया था।

FARA के तहत अमेरिकी न्याय विभाग में दाखिल दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने ईमेल, फोन कॉल, वन-टु-वन बैठकों के जरिए अप्रैल अंत से लेकर 4 दिन के ऑपरेशन सिंदूर के बाद तक संघर्ष विराम के लिए बैठकें जारी रखी थीं।

पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत पर अमेरिका का दबाव बनाकर युद्ध रुकवाना चाहता था। उसने ट्रम्प प्रशासन तक तेजी से पहुंच बनाने, व्यापार और कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए 6 लॉबिंग फर्मों पर करीब ₹45 करोड़ खर्च किए थे।

अमेरिकी लॉबिंग फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय दूतावास ने अमेरिकी सरकार और उसके अधिकारियों से संपर्क बढ़ाने के लिए फर्म की सेवाएं ली थीं।

FARA के जारी दस्तावेज…2 पेज

भारतीय दूतावास ने लॉबिंग फर्म की मदद ली

अमेरिकी लॉबिंग फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन के साथ कई अहम मुद्दों पर भारतीय दूतावास की बातचीत में मदद की गई। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय दूतावास के लिए काम किया।

FARA में दी गई जानकारी के अनुसार 10 मई को इस फर्म ने भारतीय दूतावास की ओर से व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के रिकी गिल से संपर्क कराने में मदद की।

इस दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मीडिया कवरेज जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। 10 मई को ही भारत और पाकिस्तान के बीच चला 4 दिन का सैन्य टकराव समाप्त हुआ था।

फर्म की भूमिका में बैठकों की व्यवस्था करना, फोन कॉल और ईमेल के जरिए दोनों देशों के अधिकारियों को जोड़ना शामिल था।

इसके अलावा भारतीय दूतावास ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक कराने में भी मदद मांगी थी। कई एन्ट्रीज में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की स्थिति पर बातचीत का जिक्र है।

इसी तरह एक अन्य अमेरिकी लॉबिंग फर्म सिडेन लॉ एलएलपी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि उसने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने और भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान समर्थन देने में मदद की थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय बोला- हमारा रिकॉर्ड वेबसाइट पर

भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि संपर्क बढ़ाने के लिए अमेरिका में विभिन्न दूतावास, प्राइवेट कंपनियां और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों और कन्सलटेंट्स का सहारा लेते हैं।

भारतीय दूतावास भी 1950 के बाद से ही आवश्यकता के अनुसार ऐसी फर्मों के साथ अनुबंध करता रहा है। अमेरिका में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत विदेशी सरकारों के साथ लॉबिंग करना कानूनी और स्थापित प्रथा है।

जस्टिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसका पूरा रिकॉर्ड है कि कब-कब, किसने-किन लॉबिंग फर्मों के साथ संपर्क किया। इसे किसी प्रकार की मध्यस्थता के तौर पर देखना एकदम गलत है।

कांग्रेस बोली- 10 मई को बहुत कुछ हुआ

वहीं, अमेरिकी लॉबिंग फर्मों की रिपोर्ट्स पर कांग्रेस का कहना है कि 10 मई 2025 को बहुत कुछ हुआ, जिसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का पहला ऐलान अमेरिका की ओर से किया गया।

कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने कहा कि 10 मई को जिन अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया गया, उनमें यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर भी शामिल थे। इससे यह शक पैदा होता है कि क्या सैन्य कार्रवाई रोकने के फैसले में व्यापार से जुड़े पहलू भी थे।

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मिडिल ईस्ट में उबाल, दुनियाभर के बाजारों में भूचाल, कमजोर खुल सकते हैं सेंसेक्स-निफ्टी

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में संकट गहराने व होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने तथा डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए बयान के बाद दुनियाभर के बाजार 3 मार्च को क्रैश हो गए। एशियाई बाजार 11 महीनों के अपने सबसे खराब दौर के ट्रेक पर नजर आ रहे हैं। साउथ कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा कमजोरी दिख रही है। छुट्टी से लौटने के बाद यह 5 फीसदी गिर गया और प्रोग्राम ट्रेडिंग के लिए कुछ समय के लिए सेल ऑर्डर रोक दिए गए। होली की छुट्टी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत हैं। फ्यूचर्स से जुड़े संकेतक GIFT Nifty में करीब 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,355 के आसपास लगभग 2.55% नीचे ट्रेड करता दिखा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि BSE Sensex और NIFTY 50 दबाव में खुल सकते हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाओं के चलते बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। उल्लेखनिय है कि ट्रंप ने कहा कि यह वॉर करीब 1 महीने तक चल सकती है। 

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली हावी रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI 7% से ज्यादा टूट गया, जो 2024 के बाद की बड़ी गिरावट मानी जा रही है। टेक दिग्गज Samsung Electronics और SK Hynix में करीब 10% तक की कमजोरी आई।

जापान का Nikkei 225 3% से अधिक फिसला, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index और चीन का SSE Composite Index भी 1% से ज्यादा नीचे रहे। यूरोप में Stoxx Europe 600 लगभग 2.5% गिरा, वहीं अमेरिकी फ्यूचर्स में भी 2% तक की कमजोरी दिखी।

कच्चे तेल में तेजी से बढ़ी चिंता

तनाव के बीच Brent Crude 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। आज इसमें 7% से अधिक की तेजी दर्ज हुई थी। Strait of Hormuz को लेकर बढ़ते जोखिम ने तेल और गैस आपूर्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेल की बढ़ती कीमतें एशियाई कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव और महंगाई में तेजी की आशंका है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

सोमवार को भी दिखा भारी उतार-चढ़ाव

सोमवार को भी बाजार में तेज गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,700 अंकों से ज्यादा टूटा, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी के साथ करीब 1,048 अंकों की गिरावट पर बंद हुआ। निफ्टी भी दिन में 575 अंक फिसलकर अंत में 312 अंक नीचे बंद हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऊंची ऊर्जा कीमतों से रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने के बजाय संतुलित और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल, तीन साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम

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मुंबई, एजेंसी। गैस की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आज थोक गैस की कीमतों में 32% की सीधी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे दाम थोड़े समय के लिए 151 पेंस प्रति थर्म तक जा पहुंचे। यह फरवरी 2023 के बाद का सबसे उच्च स्तर है।

एक हफ्ते में करीब 93% की वृद्धि 

बाजार में गैस की कीमतों का बढ़ना जारी है। कल कीमतों में हुई 50% की वृद्धि के बाद, इस सप्ताह अब तक गैस के दाम 93% तक बढ़ चुके हैं। हालांकि, शुरुआती उछाल के बाद कीमतों में मामूली राहत देखी गई और यह 148 पेंस प्रति थर्म पर आकर रुकी।

आम आदमी पर क्या होगा असर? 

गैस की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। बिजली की कीमतें अभी भी थोक गैस की लागत से जुड़ी हुई हैं, इसलिए गैस महंगी होने से बिजली भी महंगी हो सकती है। दूसरी ओर ‘एनर्जी प्राइस कैप’ (जो ऊर्जा की प्रति यूनिट अधिकतम शुल्क को सीमित करती है) काफी हद तक थोक लागतों के आधार पर ही तय की जाती है। 

यदि थोक कीमतें इसी उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू बिलों (Household bills) में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

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Gold-Silver Drop: औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के भाव, कीमतों में आई बड़ी गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के कारण सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। MCX पर शाम के कारोबार में दोनों कीमती धातुएं औंधे मुंह गिरी है। MCX पर खबर लिख जाने के समय सोने का वायदा भाव 2.45% यानि 3760 रुपए की गिरावट के साथ 1,62,314 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। वहीं चांदी में 16653 रुपए (6.21%) टूटकर 2,61,828 रुपए प्रति किलोग्राम पर था। आपको बता दें कि आज MCX पर होली के कारण सुबह का कारोबार बंद था। इंटरनैशनल मार्केट में भी सोने-चांदी में बड़ी गिरावट आई है।

इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी की कीमत

इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें $5400 के पार चली गईं, जिसके बाद देर शाम के ट्रेडिंग में गिरावट देखी गई। शाम के कारोबार में Comex पर सोना 159 डॉलर की गिरावट के साथ 5,159.10 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के भाव ने इस साल 5,586.20 डॉलर के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया। Comex पर चांदी के वायदा भाव 7.44 डॉलर की गिरावट के साथ 81.50 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। इसके भाव ने इस साल 121.79 डॉलर का उच्चतम स्तर छू लिया।

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