Connect with us

देश

चीन का सुपरपावर सपना टूटाः नहीं बन सकेगा अमेरिका का बाप, भारत ने बिगाड़ा गेम

Published

on

वाशिंगठन/बीजिंग/नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों  अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक और सामरिक प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। कभी माना जाता था कि चीन 2030 तक अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, लेकिन अब कई विशेषज्ञ इस अनुमान पर पुनर्विचार कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के अनुसार 2026 में अमेरिका की नॉमिनल जीडीपी लगभग 32.38 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि चीन की जीडीपी करीब 20.85 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है। यानी अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी चीन से काफी बड़ी है।

भारत से भी प्रतिस्पर्धा
चीन की चुनौती सिर्फ अमेरिका नहीं है। अब उसे भारत से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेश, सेमीकंडक्टर, रक्षा सहयोग और युवा कार्यबल जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास दर चीन से अधिक रह सकती है। हालांकि यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि सिर्फ भारत ने चीन का खेल बिगाड़ दिया। चीन की मौजूदा चुनौतियों में उसकी घटती आबादी, रियल एस्टेट संकट, बढ़ता कर्ज, अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और कमजोर घरेलू मांग जैसे कारण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

भारत ने कैसे बिगाड़ा खेल

  • कई वैश्विक कंपनियां चीन से उत्पादन हटाकर भारत, वियतनाम और मेक्सिको की ओर जा रही हैं।
  • भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
  • अमेरिका, जापान और यूरोप चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं।
  • चीन की जनसंख्या घट रही है, जबकि भारत दुनिया का सबसे युवा और सबसे बड़ा आबादी वाला देश बन चुका है।

चीन की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटी
कई विश्लेषकों का मानना है कि चीन की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पहले जैसी नहीं रही। रियल एस्टेट संकट, कर्ज का बढ़ता बोझ और कमजोर घरेलू मांग उसकी विकास दर पर दबाव डाल रहे हैं। चीन की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक उसकी जनसंख्या में लगातार गिरावट है। जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। जनसंख्या लगातार कई वर्षों से घट रही है। प्रजनन दर आबादी को स्थिर रखने के लिए आवश्यक स्तर से काफी नीचे है। विशेषज्ञ इसे “अमीर बनने से पहले बूढ़ा होना” बताते हैं। इसके विपरीत अमेरिका को आप्रवासन और अपेक्षाकृत बेहतर जनसांख्यिकीय स्थिति का लाभ मिलता है।

डॉलर का दबदबा कायम

  • वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अमेरिकी डॉलर की पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है।
  • दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार का अधिकांश हिस्सा डॉलर में रखा जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भुगतान में डॉलर सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है।
  • चीन का युआन अभी भी वैश्विक स्तर पर सीमित स्वीकार्यता रखता है।

यही वजह है कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के जरिए व्यापक प्रभाव बनाए रखता है।

सैन्य शक्ति में भी अमेरिका आगे
सैन्य क्षमता के मामले में भी अमेरिका को स्पष्ट बढ़त हासिल है।अमेरिकी रक्षा बजट चीन से कई गुना बड़ा है। अमेरिका के दुनिया भर में सैकड़ों सैन्य ठिकाने हैं।NATO जैसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन का नेतृत्व भी अमेरिका करता है।विमानवाहक पोत, परमाणु हथियारों की तैनाती और वैश्विक सैन्य पहुंच में भी अमेरिका आगे माना जाता है।

विशेषज्ञों की राय 
अब कई थिंक टैंक और अर्थशास्त्री मानते हैं कि चीन का अमेरिका को पीछे छोड़ना पहले जितना निश्चित नहीं दिखता। कुछ विशेषज्ञों का तो यह भी मानना है कि चीन शायद कभी भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था से बड़ा न बन सके। हालांकि चीन अभी भी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तकनीक, विनिर्माण तथा रक्षा क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रहा है। इसलिए अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा आने वाले दशकों तक वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा विषय बनी रहेगी।

Continue Reading

देश

JEE Advanced Result: शुभम कुमार ने किया टॉप, सोशल मीडिया से दूरी और नेगेटिव खबरों को नज़रअंदाज़ कर पास की परीक्षा

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों (IITs) में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा ‘जेईई एडवांस्ड 2026’ (JEE Advanced 2026) के परिणाम आज घोषित कर दिए गए हैं। इस साल परीक्षा का आयोजन आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) द्वारा किया गया था। नतीजों के जारी होते ही देश भर के करीब 1.8 लाख इंजीनियरिंग उम्मीदवारों का लंबा इंतजार खत्म हो गया है।

इस वर्ष की परीक्षा में IIT दिल्ली ज़ोन के शुभम कुमार ने ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR 1) हासिल कर पूरे देश में टॉप किया है। वहीं, छात्राओं (महिला वर्ग) में आरोही देशपांडे देश भर में अव्वल रहीं।

कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) में पहला स्थान पाने वाले शुभम कुमार ने 360 अंकों में से 330 अंक प्राप्त कर यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस साल की मेरिट लिस्ट में आईआईटी दिल्ली ज़ोन का दबदबा देखने को मिला है। टॉप-3 में शामिल अन्य दो छात्र-कबीर छिल्लर (दूसरा स्थान) और जतिन चाहर (तीसरा स्थान) भी इसी ज़ोन से आते हैं।

 कैसे देखें नतीजे
उम्मीदवार JEE Advanced के आधिकारिक पोर्टल के ज़रिए अपने नतीजे देख सकते हैं। अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए, छात्रों को अपने रजिस्ट्रेशन या रोल नंबर, जन्म तिथि और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके लॉग इन करना होगा। अधिकारियों ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अपने स्कोरकार्ड की एक प्रिंटेड कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें, क्योंकि एडमिशन और काउंसलिंग की प्रक्रिया के दौरान इसकी ज़रूरत पड़ेगी।

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि JEE Advanced 2026 के लिए 1,87,389 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि 17 मई को आयोजित दोनों परीक्षा पत्रों में 1,79,694 उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा देने वालों में से 56,880 उम्मीदवार क्वालिफ़ाई हुए, जिनमें 10,107 छात्राएँ शामिल हैं।

यह परीक्षा एक ही दिन दो सत्रों में आयोजित की गई थी। पेपर 1 सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक हुआ, जबकि पेपर 2 दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक देश भर के केंद्रों पर आयोजित किया गया था। JEE Advanced, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) द्वारा पेश किए जाने वाले अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में दाखिले का ज़रिया है; IITs को भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक माना जाता है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में सफल हुए हैं, वे अब Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) द्वारा आयोजित काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।

इस परीक्षा के स्कोर को सभी IITs स्वीकार करते हैं, जिनमें बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर, खड़गपुर, रुड़की, गुवाहाटी, हैदराबाद, वाराणसी और धनबाद के IITs शामिल हैं।

अब जब नतीजे घोषित हो चुके हैं, तो सफल उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक यात्रा के अगले चरण की शुरुआत कर सकते हैं; वहीं, अन्य उम्मीदवारों के लिए NITs, IIITs और कई प्रमुख सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों के माध्यम से अभी भी अवसर मौजूद हैं।

Continue Reading

देश

जानिए कौन हैं नागेंद्र नाथ त्रिपाठी… जिन्हें भाजपा ने दी बड़ी जिम्मेदरी?

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। लगभग पांच राज्यों में 2027 में हाेने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी कड़ी में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के वरिष्ठ नेता नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को राष्ट्रीय संगठक नियुक्त किया है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
भाजपा के लिए बिहार और झारखंड में कर चुके हैं काम 
त्रिपाठी बिहार और झारखंड के लिए भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री के रूप में सेवाएं दे रहे थे। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) अरुण सिंह ने एक अधिसूचना में कहा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय संगठक (विशिष्ट कार्यकर्ता संपर्क) नियुक्त किया है।” सिंह ने कहा, ”उनका केंद्र दिल्ली रहेगा।

वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से समन्वय पर रहेगा फोकस
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस पद का प्रमुख उद्देश्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, समन्वय और संगठनात्मक अनुभवों को पार्टी की गतिविधियों से जोड़ना है। भाजपा लगातार संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संपर्क को प्राथमिकता देती रही है। ऐसे में यह नियुक्ति संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नागेंद्र नाथ त्रिपाठी की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से प्रभावी होगी। नियुक्ति की सूचना पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को भी भेज दी गई है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से शुरू की रामाजिक सेवा 
आप को बता दें कि नागेंद्र नाथ त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के बेलौली गांव के एक कृषक परिवार से हैं। वह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता का नाम गिरिजा पति त्रिपाठी और माता का नाम गणेशा देवी है। त्रिपाठी लम्बे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। उसके बाद उन्होंने पार्टी में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई है। 

विद्यार्थी परिषद से बीजेपी संगठन महामंत्री तक का सफर
संघ के बाद उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों पर रहते हुए काम किया, जहां उनके नेतृत्व और संगठन कौशल को पहचान मिली। उनके इसी हुनर को देखते हुए साल 2003 में उन्हें उत्तर प्रदेश बीजेपी का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और चुनावी रणनीति को धार देने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। उत्तर प्रदेश में करीब आठ सालों तक शानदार सांगठनिक सेवाएं देने के बाद, साल 2011 में पार्टी ने उन्हें बिहार बीजेपी के संगठन महामंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी।

क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के रूप में प्रभावी भूमिका
पार्टी आलाकमान ने अगस्त 2021 में उनके सांगठनिक कद को और बढ़ाते हुए उन्हें बिहार और झारखंड का क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नियुक्त किया। सांगठनिक नजरिए से यह पद बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि क्षेत्रीय संगठन महामंत्री पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के बीच बेहतर तालमेल बिठाने, चुनावी खाका तैयार करने और राज्यों में पार्टी का दायरा बढ़ाने का बड़ा जिम्मा होता है। नागेंद्र नाथ त्रिपाठी अंदरूनी रणनीतियों, बड़ी बैठकों और महत्वपूर्ण सांगठनिक निर्णयों में उनकी राय हमेशा बेहद असरदार साबित होती रही है। फिलहाल अब बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय संगठक नियुक्त किया है। उनका केन्द्र दिल्ली रहेगा। 

Continue Reading

देश

ब्रिटेन में भारतीय युवक ने सिखाया सबकः वादा तोड़ने वाली कंपनी पर ठोका मुकद्दमा, मिला लाखों का मोटा मुआवजा

Published

on

लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में रहने वाले केरल के युवक शाबिन शाजी  (Shabin Shaji) को रोजगार विवाद में बड़ी कानूनी जीत मिली है। ब्रिटेन के एक रोजगार न्यायाधिकरण (Employment Tribunal) ने उनकी पूर्व नियोक्ता कंपनी Swan Care Solutions Ltd को लगभग 30,000 पाउंड (करीब 38 लाख रुपए) मुआवजा देने का आदेश दिया है। शाबिन शाजी पोस्ट-ब्रेक्जिट वीजा योजना के तहत केयर वर्कर के रूप में भारत से ब्रिटेन गए थे। इस योजना के तहत नियोक्ता पर यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वह कर्मचारी को वास्तविक रोजगार उपलब्ध कराए। हालांकि, न्यायाधिकरण के अनुसार कंपनी ने अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बावजूद शाजी को वादा किया गया काम नहीं दिया। इससे उनकी आय का कोई स्रोत नहीं बचा और वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए।

सुनवाई के दौरान शाजी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे थे। उन्होंने कहा कि जीवित रहने के लिए उन्हें नल का पानी पीना पड़ता था और एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुकी सस्ती ब्रेड खरीदनी पड़ती थी। शाजी के अनुसार, वे स्थानीय दुकानों में उन मुफ्त केले और ब्रेड की तलाश करते थे जो जरूरतमंदों के लिए रखे जाते थे। रविवार को चर्च जाने पर वहां मिलने वाली चाय और स्नैक्स भी उनके लिए सहारा बनते थे।

शाजी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उनके शब्दों में “मुझे लगा था कि यह मेरे जीवन का बड़ा अवसर होगा, लेकिन ब्रिटेन पहुंचने के बाद मैं बेहद कठिन हालात में फंस गया। ऐसा महसूस होता था कि किसी को इस बात की परवाह नहीं है कि मैं जीवित हूं या नहीं।” रोजगार न्यायाधिकरण ने माना कि शाजी काम करने के लिए तैयार, सक्षम और इच्छुक थे, लेकिन कंपनी ने उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं कराया। इसी आधार पर अदालत ने कंपनी को उनके बकाया वेतन और मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया। 

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677