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विदेश

सोमवार सुबह दहल उठा कुवैत: ईरान का भीषण ड्रोन अटैक, पूरे देश में गूंजे सायरन, नागरिकों में भारी दहशत

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कुवैत, एजेंसी। Middle East से सबसे बड़ी और बेहद डरावनी खबर सामने आ रही है। 1 जून सोमवार सुबह-सुबह ईरान ने कुवैत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उस पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स (Kamikaze Drones) से भीषण हमला कर दिया है। इस अचानक हुए हमले के बाद पूरे कुवैत में युद्ध के सायरन गूंज रहे हैं, जिससे नागरिकों में भारी दहशत फैल गई है और लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों और अंडरग्राउंड बंकरों की तरफ भाग रहे हैं।  कुवैत का कहना है कि उसके हवाई रक्षा तंत्र ने ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए गोलीबारी शुरू कर दी है। 
सोमवार को कुवैत की सेना ने अचानक घोषणा की कि देश का एयर डिफेंस सिस्टम (हवाई सुरक्षा प्रणाली) दुश्मन की मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स के हमलों का सामना कर रहा है। खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदल रहे सुरक्षा समीकरणों के बीच कुवैती सेना ने नागरिकों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। 

आसमान में गूंजे धमाके, कुवैत में अलर्ट
कुवैती सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक आधिकारिक पोस्ट जारी कर बताया कि देश की हवाई सुरक्षा प्रणाली (Air Defense System) इस समय दुश्मन के बड़े हवाई हमलों को नाकाम करने में जुटी है। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि “यदि आसमान में तेज धमाकों की आवाजें सुनाई देती हैं, तो घबराएं नहीं। ये आवाजें एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने (इंटरसेप्ट करने) के कारण हो रही हैं।” सेना ने सभी नागरिकों से सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जारी आपातकालीन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है।

تتصدى حالياً الدفاعات الجوية الكويتية لهجمات صاروخية وطائرات مسيرة معادية.

تنوه رئاسة الأركان العامة للجيش أن أصوات الانفجارات إن سمعت فهي نتيجة اعتراض منظومات الدفاع الجوي للهجمات المعادية.

يرجى من الجميع التقيد بتعليمات الأمن والسلامة الصادرة عن الجهات المختصة.… pic.twitter.com/TkNLV2Yj4E — KUWAIT ARMY – الجيش الكويتي (@KuwaitArmyGHQ) June 1, 2026

वहीं अभी अपडेट आई है कि कुवैत की वायु सेना ने देश को लक्ष्य बनाकर दागी गयी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोक दिया है। यह घटनाक्रम सप्ताहांत में ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने यह जानकारी दी है। जनरल स्टाफ ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘फिलहाल, Kuwaiti air defense systems दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोक रही हैं। जनरल स्टाफ ने निवासियों से सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह किया। यह घोषणा तब की गयी जब अमेरिका ने कहा कि उसने आत्मरक्षा और क्षेत्रीय शिपिंग मार्गों की सुरक्षा का हवाला देते हुए गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित ईरानी रडार और ड्रोन कमांड-एंड-कंट्रोल सुविधाओं पर हमला किया है।
कुवैत में है अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा  
गौरतलब है कि कुवैत में अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा स्थित है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गाडर् कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जवाबी कारर्वाई करते हुए एक अमेरिकी अड्डे को निशाना बनाया है। आरोप है कि इस अड्डे का इस्तेमाल होर्मोज़गान प्रांत में ईरान के सीरिक द्वीप पर हमले करने के लिए किया गया था। आईआरजीसी ने कहा कि उसने पहले से तय किए गए उन ठिकानों पर हमला किया है, जिनका संबंध सीरिक द्वीप पर स्थित एक दूरसंचार टावर पर हुए अमेरिकी हमले से था। IRGC ने दावा किया कि इस कारर्वाई के ज़रिए उसके सभी निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिए गए हैं। इस बल ने चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा की जाने वाली किसी भी और सैन्य कारर्वाई का जवाब ‘पूरी तरह से अलग’ तरीके से दिया जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तेहरान की कारर्वाई का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को उन क्षेत्रीय ठिकानों और संपत्तियों पर जवाबी हमले करने का पूरा अधिकार है, जिनका इस्तेमाल उसके देश पर हमले करने के लिए किया जाता है। बघाई सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में कहा, ‘सभी देशों का यह एक स्थापित कानूनी दायित्व है कि वे अपने क्षेत्र या संपत्तियों का इस्तेमाल किसी अन्य देश पर आक्रमण करने के लिए न होने दें।’ उन्होंने यूरोपीय संघ पर चुनिंदा नैतिक आक्रोश दिखाने का आरोप लगाते हुए, ईरान की कारर्वाई की आलोचना को ‘पाखंडपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना ‘करार दिया। इससे पहले, यूरोपीय संघ ने कुवैत पर हुए कथित ईरानी हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि ये हमले कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और इनसे क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।”
गौरतलब है कि इससे पहले 28 मई को भी कुवैत पर इसी तरह के मिसाइल और ड्रोन हमले हुए थे। लगातार बिगड़ते हालातों को देखते हुए कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से फोन पर आपातकालीन बातचीत की है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा की।

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कोलंबिया चुनाव में ट्रंप समर्थक उम्मीदवार को बढ़त, सत्ता पक्ष ने परिणामों पर उठाए सवाल

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बोगोटा, एजेंसी। दक्षिण अमेरिकी देश Colombia में राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के नतीजों ने सियासी मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। अपराध के खिलाफ सख्त रुख और दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए जाने जाने वाले Abelardo de la Espriella ने पहले दौर में बढ़त हासिल की है। हालांकि किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले, इसलिए चुनाव अब दूसरे दौर में जाएगा। जून में होने वाले रनऑफ चुनाव में दे ला एस्प्रीएला का मुकाबला सत्तारूढ़ गठबंधन हिस्टोरिक पैक्ट के उम्मीदवार Ivan Cepeda से होगा।

किसे कितने वोट मिले? 
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार 99.98 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को 44%  तथा इवान सेपेडाको 41% वोट मिले ।यह नतीजा कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाला रहा, क्योंकि मतदान से पहले अधिकांश जनमत सर्वेक्षणों में सेपेदा को बढ़त दिखाई जा रही थी।

सत्तारूढ़ दल ने नतीजों पर उठाए सवाल 
सेपेदा और उनके सहयोगी, वर्तमान राष्ट्रपति Gustavo Petro ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने दावा किया कि लाखों वोटों में गड़बड़ी हुई हो सकती है और विदेशी तत्वों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया है। हालांकि, अब तक इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया गया है।
सेपेदा ने कहा कि वे अंतिम रूप से परिणाम स्वीकार करने से पहले चुनाव आयोग की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेंगे।

‘द टाइगर’ की बढ़ती लोकप्रियता 
दे ला एस्प्रीएला को उनके समर्थक “एल टिग्रे” (The Tiger) के नाम से जानते हैं। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान अपराधी गिरोहों और सशस्त्र समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नीतियों का समर्थक बताते हुए कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और कठोर प्रशासन को अपनी प्राथमिकता बनाया।

जहां सेपेदा ने देश में सक्रिय गुरिल्ला संगठनों और आपराधिक गिरोहों के साथ बातचीत कर “पूर्ण शांति” स्थापित करने की नीति का समर्थन किया है, वहीं दे ला एस्प्रीएला का कहना है कि हिंसक समूहों के खिलाफ सैन्य और कानूनी कार्रवाई ही देश में स्थिरता ला सकती है। इस वजह से दूसरा दौर केवल दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि कोलंबिया की भविष्य की दिशा तय करने वाली वैचारिक लड़ाई भी माना जा रहा है।

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ब्रिटेन में भारतीय युवक ने सिखाया सबकः वादा तोड़ने वाली कंपनी पर ठोका मुकद्दमा, मिला लाखों का मोटा मुआवजा

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लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में रहने वाले केरल के युवक शाबिन शाजी  (Shabin Shaji) को रोजगार विवाद में बड़ी कानूनी जीत मिली है। ब्रिटेन के एक रोजगार न्यायाधिकरण (Employment Tribunal) ने उनकी पूर्व नियोक्ता कंपनी Swan Care Solutions Ltd को लगभग 30,000 पाउंड (करीब 38 लाख रुपए) मुआवजा देने का आदेश दिया है। शाबिन शाजी पोस्ट-ब्रेक्जिट वीजा योजना के तहत केयर वर्कर के रूप में भारत से ब्रिटेन गए थे। इस योजना के तहत नियोक्ता पर यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वह कर्मचारी को वास्तविक रोजगार उपलब्ध कराए। हालांकि, न्यायाधिकरण के अनुसार कंपनी ने अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बावजूद शाजी को वादा किया गया काम नहीं दिया। इससे उनकी आय का कोई स्रोत नहीं बचा और वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए।

सुनवाई के दौरान शाजी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे थे। उन्होंने कहा कि जीवित रहने के लिए उन्हें नल का पानी पीना पड़ता था और एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुकी सस्ती ब्रेड खरीदनी पड़ती थी। शाजी के अनुसार, वे स्थानीय दुकानों में उन मुफ्त केले और ब्रेड की तलाश करते थे जो जरूरतमंदों के लिए रखे जाते थे। रविवार को चर्च जाने पर वहां मिलने वाली चाय और स्नैक्स भी उनके लिए सहारा बनते थे।

शाजी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उनके शब्दों में “मुझे लगा था कि यह मेरे जीवन का बड़ा अवसर होगा, लेकिन ब्रिटेन पहुंचने के बाद मैं बेहद कठिन हालात में फंस गया। ऐसा महसूस होता था कि किसी को इस बात की परवाह नहीं है कि मैं जीवित हूं या नहीं।” रोजगार न्यायाधिकरण ने माना कि शाजी काम करने के लिए तैयार, सक्षम और इच्छुक थे, लेकिन कंपनी ने उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं कराया। इसी आधार पर अदालत ने कंपनी को उनके बकाया वेतन और मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया। 

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हनीमून बना मौत का सफरः शादी के चंद घंटे बाद ही भारतवंशी पायलट की मौत, दुल्हन की गोद में तोड़ा दम

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वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में एक दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे में भारतीय मूल के 26 वर्षीय पायलट Dave Fiji की मौत हो गई। यह हादसा उनकी शादी के कुछ ही घंटों बाद हुआ, जब वे अपनी पत्नी Jessni के साथ हनीमून के लिए रवाना हुए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डेल्टा एयर लाइंस में फर्स्ट ऑफिसर के रूप में कार्यरत डेव फिजी का परिवार मूल रूप से भारतीय राज्य Kerala से जुड़ा है। शुक्रवार को डेव और जेस्नी का विवाह जॉर्जिया के डॉसनविल में हुआ था, जिसमें लगभग 400 मेहमान शामिल हुए थे।

शादी समारोह के बाद नवविवाहित जोड़ा एक Robinson R66 हेलीकॉप्टर में सवार होकर DeKalb-Peachtree Airport के लिए रवाना हुआ था। यह उड़ान उनके लिए एक विशेष विदाई व्यवस्था का हिस्सा थी। लेकिन हेलीकॉप्टर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सका और डॉसन काउंटी के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।डेव के पिता George Fiji ने बताया कि दुर्घटना के बाद बचाव दल को हेलीकॉप्टर का पता लगाने में काफी समय लगा। इस दौरान जेस्नी घायल अवस्था में लगभग छह घंटे तक मलबे में फंसी रहीं।

उन्होंने बताया कि होश आने पर जेस्नी ने डेव को अपनी गोद में पाया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। “वह नर्स हैं, इसलिए उन्हें तुरंत समझ आ गया कि डेव अब नहीं रहे,” डेव के पिता ने कहा। मौसम को लेकर थी चिंता परिजनों के अनुसार, स्वयं पायलट होने के कारण डेव ने उड़ान से पहले खराब मौसम और कम दृश्यता को लेकर चिंता जताई थी। उनके पिता ने दावा किया कि डेव ने हेलीकॉप्टर पायलट से कहा था कि “जीरो विजिबिलिटी” की स्थिति में उड़ान नहीं भरनी चाहिए। हालांकि पायलट ने कथित तौर पर कहा कि वह अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरेंगे।

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