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बिज़नस

US Stock Market Crash: निवेशकों के डूब $2 ट्रिलियन, अमेरिकी शेयर बाजार में क्‍यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

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वाशिंगठन, एजेंसी। शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखनो को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। घंटे भर में निवेशकों के 2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 190 लाख करोड़ रुपए) डूब गए। वॉल स्‍ट्रीटी पर यह साल 2026 की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रहा है।

वॉल स्‍ट्रीट के तीनों ही बड़े इंडेक्‍स शुक्रवार के कारोबार में गिरावट पर बंद हुए। टेक्‍नोलॉजी के शेयरों में सबसे ज्‍यादा बिकवाली हुई। डाउ जोंस इंडस्‍ट्रियल 1 फीसदी गिरावट पर बंद हुआ तो एसएंडपी 500 पर भी 2.4 फीसदी की गिरावट दिखी। इसके अलावा नैसडैक कम्‍पोजिट में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Nvidia, Alphabet और Meta Platforms समेत कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।

गिरावट की वजह

बाजार में आई इस गिरावट की वजह अमेरिकी जॉब मार्केट के आंकड़े रहे। शुक्रवार को आए जॉब मार्केट के आंकड़े अनुमान से भी ज्‍यादा मजबूत रहे। इससे निवेशकों में यह संदेश गया कि फेडरल रिजर्व ब्‍याज दरों में फिलहाल कटौती नहीं करने वाला और रेट ऊंचा ही बना रहेगा।  

मई महीने में अमेरिकी कंपनियों ने 1.72 लाख नई नौकरियां जोड़ीं, जबकि एनालिस्ट्स का अनुमान केवल 80 हजार नौकरियों का था। उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों ने संकेत दिया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है।

इस दौरान अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में भी तेज उछाल देखने को मिला। 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.16 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 15 महीनों का उच्चतम स्तर है।

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देश

ATM Cash Shortage: ATM में नकदी संकट गहराया, भारत के कई राज्यों में कैश की कमी से बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश के आम नागरिकों के लिए आने वाले दिन काफी परेशानी भरे हो सकते हैं। भारत के एटीएम (ATM) नेटवर्क पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है, जिससे आने वाले समय में आपको पैसे निकालने के लिए मुशिकल हो सकती है। एटीएम नेटवर्क को संचालित करने वाली मुख्य संस्था ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री’ (CATMI) ने ‘इंडियन बैंक्स एसोसिएशन’ (IBA) को पत्र लिखकर आगाह किया है कि देश में कैश (नकद) की भारी किल्लत हो गई है, जिससे एटीएम सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

 संस्था का कहना है कि इस नकदी संकट का सबसे बुरा असर ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-urban) क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। दरअसल, सरकार द्वारा भेजी जाने वाली आर्थिक मदद (Direct Benefit Transfer) को निकालने के लिए गरीब और जरूरतमंद लोग पूरी तरह स्थानीय एटीएम पर ही निर्भर रहते हैं। कैश न होने से इन लाभार्थियों को अपनी ही रकम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
CATMI ने कहा कि ATM डायरेक्ट-ट्रांसफर बेनिफिशियरी के लिए कैश निकालने की जगह हैं। IBA को लिखे अपने पत्र में, CATMI ने कहा कि उसके सदस्यों को “कई राज्यों में बैंक ब्रांच और करेंसी चेस्ट से ATM में भरने के लिए कैश निकालने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है”। मार्च और अप्रैल में, ATM में भरने के लिए ज़रूरी कैश ₹94,000 करोड़ था, लेकिन उपलब्ध राशि क्रमशः ₹61,000 करोड़ और ₹54,000 करोड़ थी। इसका मतलब है कि ज़रूरत पूरी होने का प्रतिशत क्रमशः 64 प्रतिशत और 57 प्रतिशत था। यह जानकारी रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के करेंसी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट को दी गई है। यह जानकारी रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के करेंसी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट को दी गई है। संपर्क करने पर, CATMI के डायरेक्टर-जनरल एंटनी कोट्टाकल ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। CATMI उन संस्थाओं का प्रतिनिधि संगठन है जो ATM नेटवर्क को चालू रखती हैं। इनमें ATM बनाने वाली और आउटसोर्सिंग करने वाली कंपनियां, व्हाइट-लेबल कंपनियां शामिल हैं।
मांग और आपूर्ति में भारी अंतर- कैटमी (CATMi) ने बताया है कि रिजर्व बैंक (RBI) के करेंसी चेस्ट और बैंक शाखाओं से एटीएम में डालने के लिए पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है। मार्च और अप्रैल के महीनों में यह संकट बेहद गहरा गया:

महीना    जितनी नकदी की जरूरत थी (Indent)    जितनी नकदी असल में मिली (Available)    आपूर्ति का प्रतिशत (Fulfilment %)
मार्च 
                94,000 करोड़                                           61,000 करोड़                                      64%
अप्रैल               94,000 करोड़                                            54,000 करोड़                                      57%
यह डेटा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ‘करेंसी मैनेजमेंट विभाग’ को भी भेज दिया गया है ताकि स्थिति पर तुरंत काबू पाया जा सके।

इन 5 राज्यों में हालात सबसे ज्यादा खराब
कैश की किल्लत से देश के कुछ राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। वहां जरूरत के मुकाबले बेहद कम कैश ATM तक पहुंच पा रहा है:
कर्नाटक: केवल 64% कैश मिला।
आंध्र प्रदेश: केवल 61% कैश मिला।
तेलंगाना: केवल 59% कैश मिला।
मिजोरम: केवल 59% कैश मिला।
अरुणाचल प्रदेश: सबसे खराब स्थिति, यहां सिर्फ 52% मांग ही पूरी हो सकी।

क्यों ठप हो रहा है ATM सिस्टम?

इंटरचेंज फीस का कम होना: 
जब आप अपने बैंक के अलावा किसी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो आपका बैंक उस एटीएम कंपनी को ₹19 ‘इंटरचेंज फीस’ (Interchange Fee) देता है। एटीएम कंपनियों का कहना है कि आज के समय में एटीएम चलाने का खर्च इस फीस से कहीं ज्यादा है।

बढ़ती महंगाई और ईंधन के दाम: मध्य पूर्व (West Asia Crisis) में चल रहे तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। कैश वैन (जो एटीएम तक पैसे पहुंचाती हैं) को चलाने का खर्च बहुत बढ़ गया है।

न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी: सरकार के नए ‘वेज कोड’ (Code on Wages) के कारण कई राज्यों में कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ानी पड़ी है, जिससे एटीएम सुरक्षा और कैश लोडिंग का खर्च भी बढ़ गया है।

क्या है CATMi?
यह उन सभी कंपनियों का एक संगठन है जो देश में एटीएम मशीनें बनाने, उनमें कैश डालने, सुरक्षा देने और उनके सॉफ्टवेयर को चलाने का काम करती हैं। इनमें ‘व्हाइट-लेबल एटीएम’ (White-label ATMs – जो बैंक के नहीं बल्कि निजी कंपनियों के ATM होते हैं) चलाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं।

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देश

आम गाड़ी मालिकों के लिए राहत भरी खबर: Normal Petrol से सीधे 20 रुपये सस्ता, दिल्ली में खुला पहला स्टेशन

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नई दिल्ली, एजेंसी। पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों से परेशान आम गाड़ी मालिकों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आई है। देश में ईंधन के एक नए और बेहद सस्ते विकल्प की एंट्री हो गई है। केंद्र सरकार देश में ‘E85’ नाम का एक नया फ्यूल (ईंधन) लेकर आई है जो मौजूदा समय में मिल रहे सामान्य पेट्रोल के मुकाबले सीधे 20 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता है। सरकार का यह कदम देश में प्रदूषण कम करने और महंगे विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को घटाने की दिशा में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

दिल्ली में खुला देश का पहला ‘E85’ फ्यूल स्टेशन

इस नए और किफायती ईंधन की बिक्री शुरू करने के लिए देश की राजधानी दिल्ली में पहला विशेष फ्यूल स्टेशन खोल दिया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली के पूसा रोड पर स्थित इंडियन ऑयल (IOCL) के पेट्रोल पंप पर इस पहले E85 फ्यूल स्टेशन का औपचारिक उद्घाटन किया।

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जानें क्यों है इतना सस्ता?

E85 एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल (Eco-Friendly) बायो-फ्यूल है। इसके नाम और कीमत का पूरा गणित बेहद आसान है। इस फ्यूल में 85 फीसदी (85%) इथेनॉल और मात्र 15 फीसदी (15%) सामान्य पेट्रोल मिलाया जाता है। चूंकि इथेनॉल को गन्ने के रस, मक्के और कृषि के बचे हुए कचरे से देश के भीतर ही तैयार किया जाता है इसलिए इसकी उत्पादन लागत पेट्रोल के मुकाबले बहुत कम आती है। यही वजह है कि यह सीधे 20 रुपये सस्ता बिक रहा है।

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राजधानी दिल्ली में इस नए E85 ईंधन की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। वहीं ग्राहकों को पेट्रोल पंप पर किसी भी तरह का कोई भ्रम (असमंजस) न हो, इसके लिए E85 फ्यूल डिस्पेंसर (पंप मशीन) पर सरकार की तरफ से विशेष तौर पर अलग रंग की ब्रांडिंग और बड़े-बड़े अक्षरों में ‘E85’ के साफ लेबल लगाए गए हैं।

इन गाड़ियों में होगा इस्तेमाल?

E85 फ्यूल का इस्तेमाल विशेष रूप से बनाए गए ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ (Flex-Fuel Engines) वाले वाहनों में किया जाता है जो पूरी तरह इथेनॉल या पेट्रोल दोनों पर समान रूप से चल सकते हैं। इस ईंधन के आने से भारत का पैसा विदेशों में कच्चा तेल खरीदने में बर्बाद नहीं होगा। इथेनॉल का उत्पादन देश के भीतर हमारे अपने किसान करेंगे जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आमदनी में बंपर इजाफा होगा।

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इस संबंध में बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया, सरकार पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहरों में ऐसे 50 से 100 नए स्टेशन खोलने पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2026 के आखिर तक देश भर में ऐसे E85 फ्यूल स्टेशनों की कुल संख्या बढ़ाकर 500 के पार पहुंचा दी जाए।

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देश

अगले वित्त वर्ष में फिर से सात प्रतिशत की वृद्धि दर से बढ़ सकता है भारत: सीईए नागेश्वरन

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नई दिल्ली, एजेंसी। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि वृहद आर्थिक स्थिरता एवं आपूर्ति संबंधी उपायों से भारत वित्त वर्ष 2027-28 में फिर से सात प्रतिशत की वृद्धि दर की राह पर लौट सकता है लेकिन यह बाहरी परिस्थितियों में सुधार पर निर्भर करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान अप्रैल में लगाए गए 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। इसके पीछे ऊर्जा और अन्य जिंसों की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण जारी आपूर्ति बाधाओं को वजह बताया गया। 

नागेश्वरन ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के संबंध में आरबीआई के अनुमानों पर इस समय सवाल उठाने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि दिए गए आंकड़ों में ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “यदि वृद्धि दर आरबीआई के अनुमान के अनुरूप सात प्रतिशत से नीचे भी जाती है, तो वृहद आर्थिक स्थिरता के उपाय और आपूर्ति संबंधी कदम हमें वित्त वर्ष 2027-28 में फिर से या बाहरी परिस्थितियों में जैसे ही सुधार हो, सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर की राह पर ला सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि ये अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष से पहले की स्थिति वित्त वर्ष 2027-28 से पहले बहाल हो जाएगी। 

नागेश्वरन ने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो अगले वित्त वर्ष के अनुमानों की फिर से समीक्षा की जाएगी। बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उचित अनुमान होगा कि यह बजट 2027 में अनुमानित 10.1 प्रतिशत से अधिक रहेगी, क्योंकि खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि का रुझान देखा जा रहा है। नागेश्वरन ने कहा, “अच्छी खबर यह है कि बाजार मूल्य पर जीडीपी वृद्धि बजट के अनुमान 10.1 प्रतिशत से काफी अधिक रहने की संभावना है।” सीईए ने कहा कि व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़ा है और 2025-27 में भी इसके और बढ़ने की संभावना है, जिससे चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में उभरता हुआ संकट न केवल आपूर्ति पक्ष पर एक बड़ा झटका है, बल्कि यह मांग पक्ष पर भी संभावित कमी का संकेत देता है। 

उन्होंने कहा कि थोक मुद्रास्फीति में आपूर्ति पक्ष से मूल्य दबाव उभरने लगे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत मौसम-विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा मानसून वर्षा के दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 90 प्रतिशत रहने के अनुमान से मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण पर ऊपर की ओर जोखिम पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु व्यापार और कुल व्यापार घाटा बढ़ गया है। सीईए ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी इसी तरह का रुझान, संभवतः और अधिक घाटे के साथ, देखने को मिल सकता है। ऐसा होने से चालू खाते पर और दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सफल व्यापार समझौतों, खासकर भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार में प्रगति से उत्पन्न नीतिगत स्पष्टता निर्यात और पूंजी प्रवाह को समर्थन देने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता पूंजी प्रवाह की स्थिति पर लगातार दबाव बनाए हुए है।

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