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ट्रेन के AC कोच को लेकर सामने आया शर्मनाक मामला, लोगों की इन हरकतों से परेशान रेलवे ने सख्ती के दिए संकेत

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मुंबई, एजेंसी। ट्रेन के AC कोच को लेकर एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने भारतीय रेलवे की चिंता बढ़ा दी है। यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए AC कोच में उपलब्ध कराए जाने वाले बेडरोल की चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। चादर, कंबल, तौलिया और तकिये के कवर जैसे सामान बड़ी संख्या में गायब हो रहे हैं, जिससे रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

 देशभर में फैले भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क में रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग AC-1, AC-2 और AC-3 कोच का इस्तेमाल करते हैं, जहां यात्रियों को आरामदायक यात्रा के लिए बेडरोल की सुविधा दी जाती है। टिकट किराये में शामिल इस सुविधा के तहत यात्रियों को चादर, कंबल, तकिया, तकिये का कवर और तौलिया उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन अब इसी सुविधा से जुड़ी चोरी की घटनाएं रेलवे के लिए बड़ी परेशानी बन गई हैं। कई यात्री ट्रेन से उतरते समय बेडरोल का सामान अपने साथ ले जाते हैं, जिससे रेलवे और संबंधित एजेंसियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

AC Coach में हर 1000 यात्रियों में से 1 चोरी का मामला
RTI (Right to Information) के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2022 से मई 2026 तक रेलवे के AC कोच से करीब 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम चोरी हो चुके हैं। इनमें चादर, कंबल, तकिये के कवर और तौलिये शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, AC कोच में सफर करने वाले हर 1000 यात्रियों में से लगभग 1 यात्री बेडरोल चोरी की घटना को अंजाम देता है। कोरोना महामारी के बाद जनवरी 2022 से ट्रेनों में बेडरोल सेवा दोबारा शुरू की गई थी। इसके बाद चोरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 से 2025 के बीच बेडरोल चोरी की घटनाओं में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बेडशीट चोरी में बीकानेर, तौलिये में दिल्ली सबसे आगे
बेडशीट चोरी: बीकानेर मंडल सबसे आगे
तौलिया चोरी: दिल्ली मंडल में सबसे ज्यादा मामले
तकिये के कवर चोरी: सोनपुर मंडल सबसे ऊपर
कंबल चोरी: जोधपुर मंडल में सबसे अधिक घटनाएं

देश के 10 प्रमुख रेल मंडलों में करीब 67 प्रतिशत चोरी के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, रांची, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सोनपुर, दानापुर और बिलासपुर शामिल हैं।

रू.104 करोड़ से ज्यादा का नुकसान 
रेलवे के AC कोच में बेडरोल उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों को चोरी की वजह से करीब रू.104.51 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। ठेकेदारों के कर्मचारियों का कहना है कि कई बार चोरी हुए सामान की कीमत उनकी सैलरी से काट ली जाती है। इससे कोच अटेंडेंट और अन्य कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

रेलवे ने कहा- यात्रियों और स्टाफ पर भी होगी नजर
बेडरोल चोरी को लेकर रेलवे अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, चोरी करने वाले यात्रियों या दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। रेल मंत्रालय ने इस मामले को गंभीर बताया है। मंत्रालय का कहना है कि लिनेन चोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। रेलवे ने यह भी कहा है कि अभी तक ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है जिससे रेलवे कर्मचारियों की चोरी में मिलीभगत साबित हो सके।

इन स्टेशनों से चोरी का एक भी मामला नहीं
जहां कई रेल मंडलों में चोरी के मामले सामने आए हैं, वहीं कुछ जगहों पर स्थिति बेहतर रही। साउथ रेलवे के…. तिरुचिरापल्ली मंडल-पलक्कड़ मंडल में बेडरोल चोरी की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई। इसके अलावा दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा मंडल ने भी चोरी का कोई मामला नहीं बताया। हालांकि, यहां मुख्य रूप से मालगाड़ियों का संचालन होता है, इसलिए AC यात्री कोच नहीं होने के कारण चोरी की संभावना कम रहती है।

रेलवे की अपील 
रेलवे का कहना है कि यात्रियों को समझना होगा कि ट्रेन में मिलने वाली सुविधाएं सार्वजनिक संपत्ति हैं। बेडरोल या अन्य सामान चोरी करना न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि लाखों यात्रियों की सुविधा को भी प्रभावित करता है।

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सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान

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मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।

कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

क्यों सस्ता होगा सोना?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।

केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे 

सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।

निवेशकों के लिए सलाह

का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।

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RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%

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मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।

RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?

भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।

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देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया। 

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था। 

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।

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