कोरबा
स्वामी विवेकानंद जिला खनिज न्यास शिक्षा प्रोत्साहन योजना : खनन प्रभावित क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का नया द्वार
कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला खनिज संस्थान न्यास कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में तैयार हुई महत्वाकांक्षी पहल
आर्थिक अभाव अब नहीं बनेगा प्रतिभाओं की उड़ान में बाधा
कोरबा। शिक्षा किसी भी समाज के समग्र विकास की आधारशिला होती है। एक शिक्षित युवा न केवल अपने परिवार का भविष्य संवारता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल संसाधनों के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। विशेष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के सामने यह चुनौती और भी गंभीर होती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफटी) कोरबा कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में ष्स्वामी विवेकानंद जिला खनिज न्यास शिक्षा प्रोत्साहन योजनाष् तैयार की गई है। यह योजना खनन प्रभावित क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर एवं मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराएगी, जिससे आर्थिक कठिनाइयाँ उनके सपनों के आड़े नहीं आएंगी।
योजना का उद्देश्यः शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण
जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफटी) कोरबा द्वारा संचालित इस योजना का मूल उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना, उनकी आर्थिक बाधाओं को दूर करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर एवं सक्षम नागरिक बनाने में सहयोग प्रदान करना है। यह योजना केवल छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास की अवधारणा को मजबूत करने का प्रयास भी है।
देशभर के मान्यता प्राप्त संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
योजना भारत में स्थित शासकीय अथवा शासन से संबद्ध शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए लागू होगी। इसके अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर, तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम, डिप्लोमा पाठ्यक्रम तथा जिला स्तरीय समिति द्वारा समय-समय पर अनुमोदित अन्य पाठ्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। केंद्रीय एवं राज्य शासन के शिक्षण संस्थान, शासन से सहायता प्राप्त संस्थान तथा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय और महाविद्यालय योजना के दायरे में आएंगे। वहीं अमान्यता प्राप्त संस्थान, निजी कोचिंग संस्थान, अल्पकालीन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम तथा विदेशी विश्वविद्यालय इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।
पात्रता की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था
योजना का लाभ केवल कोरबा जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों के मूल निवासी विद्यार्थियों को मिलेगा। विद्यार्थी का नाम संबंधित ग्राम पंचायत अथवा नगरीय निकाय के अभिलेखों में दर्ज होना आवश्यक होगा। इसके साथ ही परिवार का बीपीएल श्रेणी में होना अनिवार्य है तथा आय प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
शैक्षणिक पात्रता के अंतर्गत विद्यार्थी का पिछली परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही उसका प्रवेश निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किसी मान्यता प्राप्त शासकीय अथवा शासन से संबद्ध संस्थान में नियमित विद्यार्थी के रूप में होना चाहिए।
शिक्षा शुल्क से लेकर छात्रावास और मेस तक की आर्थिक सहायता
योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क, अनिवार्य प्रवेश शुल्क, छात्रावास शुल्क तथा मेस शुल्क के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। हालांकि लैपटॉप, मोबाइल, पुस्तकें, स्टेशनरी, परिवहन व्यय, निजी खर्च, कोचिंग शुल्क तथा अन्य आकस्मिक व्यय योजना में शामिल नहीं किए गए हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम सहायता राशि जिला स्तरीय समिति निर्धारित करेगी।
केवल अधिकृत छात्रावासों को मिलेगी मान्यता
योजना में स्पष्ट किया गया है कि केवल शिक्षण संस्थान अथवा उसके द्वारा अधिकृत छात्रावास का शुल्क ही देय होगा। निजी पीजी, किराये के मकान अथवा अन्य निजी आवासीय व्यवस्थाओं पर किसी प्रकार की वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
दोहरे लाभ पर रोक
यदि कोई विद्यार्थी समान उद्देश्य के लिए किसी अन्य शासकीय योजना के अंतर्गत पहले से शिक्षण शुल्क, छात्रावास अथवा मेस शुल्क का लाभ प्राप्त कर रहा है तो उसे इस योजना का समान लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि यदि किसी अन्य योजना से आंशिक सहायता प्राप्त हो रही है तो जिला स्तरीय समिति शेष अनुमन्य राशि प्रदान करने पर विचार कर सकती है। इसके लिए विद्यार्थी एवं पालक को स्व-घोषणा पत्र देना अनिवार्य होगा।
दस्तावेजों की विस्तृत व्यवस्था
आवेदन के साथ आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, बीपीएल प्रमाणपत्र अथवा राशन कार्ड, आय प्रमाणपत्र, पिछली परीक्षा की अंकसूची, प्रवेश पत्र, शुल्क विवरण, छात्रावास आवंटन पत्र, बैंक विवरण, पासपोर्ट आकार का फोटो तथा विद्यार्थी एवं पालक द्वारा हस्ताक्षरित स्व-घोषणा एवं शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। अगले वर्षों में छात्रवृत्ति के नवीनीकरण के लिए उत्तीर्णता प्रमाणपत्र, बोनाफाइड प्रमाणपत्र, छात्रावास निरंतरता प्रमाणपत्र तथा आगामी वर्ष की शुल्क संरचना भी प्रस्तुत करनी होगी।
सहायता राशि सीधे संस्थान को मिलेगी
योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि स्वीकृत राशि सीधे संबंधित शिक्षण संस्थान एवं अधिकृत छात्रावास के बैंक खाते में जमा की जाएगी। राशि विद्यार्थी के व्यक्तिगत खाते में नहीं भेजी जाएगी। भुगतान वार्षिक अथवा सेमेस्टर के आधार पर किया जा सकेगा। अगले वर्ष की सहायता तभी मिलेगी जब विद्यार्थी परीक्षा उत्तीर्ण करेगा, न्यूनतम उपस्थिति बनाए रखेगा तथा सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रस्तुत करेगा।
75 प्रतिशत उपस्थिति और अनुशासन अनिवार्य
छात्रवृत्ति के नवीनीकरण के लिए विद्यार्थी का प्रत्येक वर्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना, अगले शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश लेना, न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखना तथा संस्थान द्वारा किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना न करना आवश्यक होगा।
फेल होने, पाठ्यक्रम छोड़ने या गलत जानकारी देने पर समाप्त होगा लाभ
यदि विद्यार्थी अनुत्तीर्ण होता है, वर्ष दोहराता है, पाठ्यक्रम बीच में छोड़ देता है अथवा उसका प्रवेश निरस्त हो जाता है तो अगले वर्ष की सहायता राशि स्वीकृत नहीं होगी। इसी प्रकार एक्सटेंशन ईयर अथवा अतिरिक्त सेमेस्टर के लिए भी सहायता उपलब्ध नहीं होगी। यदि कोई विद्यार्थी फर्जी दस्तावेज अथवा गलत जानकारी देकर योजना का लाभ प्राप्त करता है तो सहायता राशि की वसूली की जा सकती है, भविष्य की डीएमएफटी योजनाओं से अपात्र घोषित किया जा सकता है तथा आवश्यक होने पर विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
मेधावी, छात्राओं और विशेष परिस्थितियों वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता
योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों का चयन आर्थिक स्थिति एवं शैक्षणिक योग्यता दोनों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। प्रत्यक्ष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थी, बीपीएल परिवारों के छात्र-छात्राएँ, मेधावी विद्यार्थी, छात्राएँ, दिव्यांगजन, अनाथ, एकल अभिभावक वाले परिवारों के विद्यार्थी तथा आईआईटी, एनआईटी, एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
गैप ईयर और माइग्रेशन का भी प्रावधान
यदि किसी विद्यार्थी ने गैप ईयर लिया है, लेकिन वह अन्य सभी पात्रता शर्तों को पूरा करता है, तो वह आवेदन कर सकेगा। इसी प्रकार यदि विद्यार्थी का चयन किसी प्रतिष्ठित संस्थान में हो जाता है और वह संस्थान बदलना चाहता है, तो जिला स्तरीय समिति की पूर्व अनुमति से माइग्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
पारदर्शिता के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग
डीएमएफटी कोरबा विद्यार्थियों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करेगा। आवश्यकता अनुसार भौतिक सत्यापन कराया जाएगा तथा शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों की प्रगति रिपोर्ट प्राप्त की जाएगी। किसी भी स्तर पर गलत जानकारी पाए जाने पर लाभ तत्काल समाप्त कर दिया जाएगा।
जिला स्तरीय समिति को व्यापक अधिकार
जिला कलेक्टर कोरबा की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति को पात्रता निर्धारण, दस्तावेजों के सत्यापन, विशेष मामलों में निर्णय लेने, सहायता राशि की अधिकतम सीमा तय करने तथा समय-समय पर योजना के दिशा-निर्देशों में आवश्यक संशोधन करने का अधिकार होगा। समिति का निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होगा।
कोरबा के विद्यार्थियों के लिए नई उम्मीद
कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला खनिज संस्थान न्यास कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में तैयार की गई यह योजना खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसरों का द्वार खोलने वाली पहल है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन, समान अवसर और मानव संसाधन विकास को नई दिशा देने का प्रयास है। आने वाले समय में यह योजना उन हजारों प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संबल बनेगी, जो आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते थे। शिक्षा के क्षेत्र में यह पहल कोरबा जिले के लिए एक दूरदर्शी और प्रेरणादायी कदम साबित हो सकती है।
कोरबा
सर्प पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा, विश्व सर्प दिवस पर सर्प संरक्षण पर दिया जोर – जितेंद्र सारथी
कोरबा। विश्व सर्प दिवस के अवसर पर नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी (वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम कोरबा) ने आमजन से सर्पों के संरक्षण एवं सह-अस्तित्व का संदेश दिया, संस्था द्वारा वर्षों से वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर जिले में सर्प संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू, जन-जागरूकता एवं मानव–सर्प संघर्ष को कम करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
संस्था के द्वारा अब तक हजारों सर्पों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है, साथ ही स्कूलों, महाविद्यालयों, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह बताया जा रहा है कि अधिकांश सर्प विषहीन होते हैं और बिना कारण किसी पर हमला नहीं करते, भय या अंधविश्वास के कारण सर्पों की हत्या करना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत दंडनीय भी हो सकता है।
सर्प प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण जीवों में से एक हैं, ये खेतों एवं जंगलों में चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित करते हैं, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है तथा खाद्य श्रृंखला एवं पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है, यदि सर्पों की संख्या कम हो जाए तो चूहों की आबादी तेजी से बढ़ सकती है, जिससे कृषि, खाद्यान्न भंडारण और मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
कोरबा जिला जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है, विशेष रूप से मध्य भारत (Central India) में किंग कोबरा (King Cobra) की उपस्थिति कोरबा जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है,यह विश्व का सबसे लंबा विषैला सर्प है और इसकी उपस्थिति स्वस्थ एवं समृद्ध वन पारिस्थितिकी का संकेत मानी जाती है, कोरबा वन मंडल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी संयुक्त रूप से इसके संरक्षण, आवास सुरक्षा, निगरानी तथा जन-जागरूकता के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं, ताकि इस दुर्लभ एवं संरक्षित प्रजाति का प्राकृतिक अस्तित्व सुरक्षित रह सके।
छत्तीसगढ़ में कई प्रजातियों के सर्प पाए जाते हैं, जिनमें अधिकांश विषहीन हैं। प्रमुख विषैले सर्पों में किंग कोबरा, इंडियन कोबरा (नाग), कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल्स वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा) सहित कुछ अन्य प्रजातियां शामिल हैं, वहीं धामन (Rat Snake), इंडियन रॉक पाइथन (अजगर), चेकर्ड कीलबैक, ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक, सैंड बोआ, कॉमन वुल्फ, कैट स्नेक,कॉमन कुकरी सहित अनेक विषहीन सर्प भी राज्य की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वनमंडलाधिकारी कोरबा (DFO) श्रीमती प्रेमलता यादव ने कहा कि सर्प प्रकृति के अभिन्न अंग हैं, वे खेतों एवं जंगलों में चूहों तथा अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बिना कारण किसी भी सर्प को मारना न केवल जैव विविधता के लिए हानिकारक है, बल्कि कई संरक्षित प्रजातियों को नुकसान पहुंचाना वन्यजीव संरक्षण कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध भी हो सकता है।
वनमंडलाधिकारी कटघोरा DFO कुमार निशांत ने आम नागरिकों से अपील की है कि वर्षा ऋतु में सर्पों का बाहर निकलना प्रकृति का सामान्य व्यवहार है, ऐसे में किसी भी सर्प को देखकर उसे मारने के बजाय स्वयं सुरक्षित रहें और वन विभाग के हेल्प लाइन नंबर 18002331416,8817534455 पर तत्काल सूचना दें, सर्प हमारी जैव विविधता की अमूल्य धरोहर हैं, ये खेतों और जंगलों में हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, एक सर्प की रक्षा, प्रकृति के संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की रक्षा है साथ ही किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए, तो झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें बल्कि उस स्थिति में पीड़ित को तुरंत नजदीकी शासकीय अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर सही उपचार ही जीवन बचा सकता है।
उप वनमंडलाधिकारी दक्षिण (SDO) सूर्यकांत सोनी ने बताया कि कोरबा वन मंडल द्वारा सर्प संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू, जन-जागरूकता एवं मानव–सर्प संघर्ष को कम करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, वन विभाग प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों के माध्यम से सर्पों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने का कार्य कर रहा है।
जितेंद्र सारथी ने कहा कि सर्पों से डरने के बजाय उन्हें समझने की आवश्यकता है, किसी भी घर, कार्यालय या सार्वजनिक स्थान पर सर्प दिखाई देने पर उसे मारने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें, सुरक्षित रेस्क्यू ही मानव जीवन और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए सबसे उचित समाधान है।
विश्व सर्प दिवस के अवसर पर कोरबा वन मंडल , कटघोरा वन मण्डल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि “सर्प बचेंगे, तभी प्रकृति का संतुलन बचेगा। आइए, भय नहीं बल्कि संरक्षण का संदेश अपनाएं।”
कोरबा
वेतन भुगतान न होने से भड़के ठेका श्रमिक, SECL गेवरा के श्रमिक चौक पर 6 घंटे जमकर नारेबाजी, 5 दिनों से काम पूरी तरह ठप
कोरबा/गेवरा। एसईसीएल (SECL) गेवरा प्रोजेक्ट के अंतर्गत SILO तथा CHP निर्माण कार्य में लगे बंसल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के लगभग 150 ठेका श्रमिकों का आक्रोश फूट पड़ा है। पिछले 5 दिनों से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। जून माह का वेतन (मेहनताना) समय सीमा पर नहीं मिलने से नाराज सैकड़ों श्रमिकों ने आज गेवरा के प्रसिद्ध श्रमिक चौक पर एकत्रित होकर कंपनी प्रबंधन और एसईसीएल के खिलाफ 6 घंटे प्रदर्शन करते हुए जोरदार विरोध किया और जमकर नारेबाजी की ।

श्रमिकों ने बताया कि करीब दो माह पूर्व उन्होंने अपनी मांगों को लेकर एसईसीएल गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) कार्यालय का घेराव किया था, उस दौरान एसईसीएल के एरिया पर्सनल मैनेजर (APM) बंसल कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच यह समझौता हुआ था कि हर महीने की 7 से 10 तारीख के बीच सभी श्रमिकों के वेतन का अनिवार्य रूप से भुगतान कर दिया जाएगा, इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा समझौते का उल्लंघन करते हुए इस माह भी समय पर भुगतान नहीं किया गया, जिससे श्रमिकों के समक्ष जीवन-यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है ।

जुलाई-अगस्त खर्चों का भरमार, लेकिन कंपनी प्रबंधन उदासबिन
श्रमिकों का कहना है कि जुलाई और अगस्त का समय घरेलू और सामाजिक रूप से भारी आर्थिक दबाव का होता है। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई-लिखाई (स्कूल खर्च), कृषि कार्य, बिजली बिल, गैस सिलेंडर और राशन जैसी रोजमर्रा की अनिवार्य आवश्यकताओं के लिए पैसों की सख्त जरूरत होती है, इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन मजदूरों की इन मूलभूत समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा है और कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है ।

जब पेमेंट आएगा तब काम पर आना, प्रबंधन के रवैये से बढ़ा आक्रोश
श्रमिकों के अनुसार चालू माह की 10 तारीख को जब उन्होंने वेतन भुगतान को लेकर बंसल कंपनी प्रबंधन से सीधी चर्चा की थी, तब प्रबंधन ने आश्वासन दिया था कि सोमवार से बुधवार तक शत-प्रतिशत भुगतान हो जाएगा, लेकिन वादे के मुताबिक भुगतान नहीं हुआ। जब श्रमिकों ने पुनः प्रबंधन से संपर्क किया तो जिम्मेदार अधिकारियों ने अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि जब पेमेंट आएगा तब काम में आना, इस दो टूक जवाब के बाद पिछले 5 दिनों से परियोजना का कार्य पूरी तरह बंद है ।
उग्र आंदोलन की दी चेतावनी, नुकसान की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी
आज श्रमिक चौक पर हुए आंदोलन सुबह 9 से 3 बजे तक लगभग 6 घंटे प्रदर्शन में श्रमिकों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनके हक की गाढ़ी कमाई का भुगतान तत्काल नहीं किया जाता है, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। श्रमिकों ने मुख्य महाप्रबंधक (CGM) को लिखित सूचना पत्र सौंपकर तत्काल मानदेय दिलवाने की मांग की है, साथ ही आग्रह किया है कि इस आंदोलन के कारण परियोजना के कार्य की प्रगति या किसी भी प्रकार की शासकीय संपत्ति व उत्पादन का नुकसान होता है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बंसल इंफ्राटेक प्रबंधन और एसईसीएल प्रबंधन की होगी ।
इस विरोध प्रदर्शन और मुख्य महाप्रबंधक को सौंपे गए पत्र की प्रतिलिपि स्थानीय थाना प्रभारी (दीपका), सी.आई.एस.एफ. (CISF) गेवरा कमांडेंट और कटघोरा क्षेत्र के विधायक कार्यालय को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है, ताकि इस गंभीर समस्या पर प्रशासन तत्काल संज्ञान ले सके ।

कोरबा
बंद कमरे से मिला भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट:कोरबा में बदबू फैलने पर ग्रामीणों ने खोला राज, पुलिस-स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा
कोरबा। कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र के तरदा गांव में एक बंद मकान से तेज दुर्गंध आने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। जब ग्रामीणों ने घर के अंदर देखा तो वहां भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
ग्रामीणों के अनुसार, तरदा गांव का यह मकान कुछ दिन पहले किराए पर लिया गया था। पिछले कई दिनों से घर से लगातार दुर्गंध आ रही थी। गुरुवार को बदबू इतनी अधिक हो गई कि आसपास रहना मुश्किल हो गया। इसके बाद ग्रामीण एकत्र होकर मौके पर पहुंचे और घर खुलवाया।

बदबू से परेशान ग्रामीणों ने खोला मकान
घर के अंदर बड़ी संख्या में इंजेक्शन, सिरिंज, दवाओं की खाली शीशियां और अन्य मेडिकल वेस्ट थैलियों में भरा हुआ मिला। गंदगी और मेडिकल कचरा देखकर ग्रामीणों ने तत्काल उरगा थाना पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और ग्रामीणों ने इसका विरोध भी जताया।

मेडिकल वेस्ट के अस्थायी स्टोरेज की बात आई सामने
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के उठाव का ठेका बिलासपुर की एनवायरो केयर कंपनी को मिला हुआ है। कंपनी प्रतिदिन अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट एकत्र कर उसे बिलासपुर के सेंदरी गांव स्थित मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में नष्ट करती है।
कंपनी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तरदा गांव का यह मकान अस्थायी स्टोरेज के रूप में किराए पर लिया गया था। गाड़ी खराब होने या अन्य आपात स्थिति में मेडिकल वेस्ट को यहां रखकर अगले दिन बिलासपुर भेजने की व्यवस्था बनाई गई थी। हालांकि, उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण मेडिकल वेस्ट जमा होता गया और पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के निर्देश
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच के लिए टीम भेजी जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पर्यावरण विभाग ने भी मांगी जानकारी
पर्यावरण अधिकारी प्रसन्न सोनकर ने बताया कि मेडिकल वेस्ट को किसी स्थान पर स्टोर करने के लिए पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित कंपनी ने इस स्थान पर मेडिकल वेस्ट रखने के लिए आवश्यक अनुमति ली थी या नहीं।
फिलहाल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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