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छत्तीसगढ़

अरुण देव गौतम बने छत्तीसगढ़ के नए DGP:1992 बैच के अफसर, 6 जिलों के SP रहे; पुलिस मुख्यालय में जुनेजा को दी गई विदाई

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रायपुर ,एजेंसी।अरुण देव गौतम छत्तीसगढ़ के नए DGP (डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) बनाए गए हैं। 1992 बैच के अफसर हैं। वे 6 जिलों के एसपी रह चुके हैं। कई अधिकारियों के नाम दिल्ली यूपीएससी को भेजे गए थे, जिसके बाद उनके नाम का ऐलान किया गया है।

अरुण देव गौतम को संयुक्त राष्ट्र पदक के अलावा सराहनी सेवाओं के लिए वर्ष 2010 में भारतीय पुलिस पदक और 2018 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2002 में संघर्षग्रस्त कोसोवा में सेवा देने के लिए अरुण देव गौतम को संयुक्त राष्ट्र पदक भी मिला था।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के डीजीपी रहे अशोक जुनेजा का कार्यकाल सोमवार को समाप्त हो गया। उन्हें पहले 2 बार सेवा विस्तार मिल चुका था। रायपुर पुलिस मुख्यालय में DGP अशोक जुनेजा को विदाई दी गई। उन्होंने अफसरों के बीच लास्ट स्पीच दी। बुधवार को नए DGP अरुणदेव ज्वाइन कर सकते हैं।

DGP अशोक जुनेजा को विदाई दी गई। उन्होंने अफसरों के बीच लास्ट स्पीच दी।

DGP अशोक जुनेजा को विदाई दी गई। उन्होंने अफसरों के बीच लास्ट स्पीच दी।

अरुण देव गौतम का प्रोफेशनल करियर

अरुण देव गौतम मूलतः उत्तरप्रदेश के कानपुर के रहने वाले है। एमए, एमफिल की डिग्री लेने के बाद यूपीएससी क्रैक कर आईपीएस बने है। उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक व संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक भी मिल चुका है।

उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को कानपुर के पास स्थित उनके गांव अभयपुर में हुआ है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा अपने गांव के ही सरकारी स्कूल से की। फिर दसवीं व बारहवीं उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज इलाहाबाद से पूरी की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आर्टस लेकर बीए किया। राजनीति शास्त्र में एमए किया। मां के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की।

अरुण देव गौतम यूपीएससी निकालकर 1992 बैच के आईपीएस बने। 12 अक्टूबर 1992 को उन्होंने आईपीएस की सर्विस जॉइन की। उन्हें पहले मध्यप्रदेश कैडर एलॉट हुआ था। प्रशिक्षु आईपीएस के तौर पर उनकी जबलपुर में पोस्टिंग हुई। फिर वे बिलासपुर जिले में सीएसपी बने।

6 जिलों के रह चुके हैं एसपी

बिलासपुर के बाद एसडीओपी कवर्धा बने। कवर्धा के बाद एडिशनल एसपी भोपाल बने। मध्य प्रदेश पुलिस की 23वीं बटालियन के कमांडेंट भी रहे। एसपी के रूप में पहला जिला उन्हें भोपाल का मिला।

वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने पर अरुण देव गौतम ने छत्तीसगढ़ कैडर चुन लिया। छत्तीसगढ़ में वे कोरिया,रायगढ़, जशपुर,राजनंदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जिले के एसपी रहे।

डीआईजी बनने के बाद वे पुलिस हैडक्वाटर, सीआईडी, वित्त और योजना, प्रशासन और मुख्यमंत्री सुरक्षा के महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थ रहे। चुनौती पूर्ण जिलों में अरुण देव गौतम को भेजा जाता था। वर्ष 2009 में राजनांदगांव में नक्सली हमले में 29 पुलिसकर्मियों व पुलिस अधीक्षक के शहीद होने के बाद अरुण देव गौतम को वहां का एसपी बन कर भेजा गया।

झीरम कांड के बाद बस्तर IG बनाए गए थे

आईजी के पद पर प्रमोशन होने के बाद छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के प्रभार में रहे। फिर बिलासपुर रेंज के आईजी बने। अरुण देव बिलासपुर जिले के एसपी भी रह चुके थे। झीरम नक्सली हमले में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत के बाद अरुण देव गौतम को बस्तर आईजी बना कर भेजा गया।

25 मई 2013 को झीरम कांड हुआ था। इसके कुछ ही माह बाद नवंबर–दिसंबर को विधानसभा चुनाव हुए। तब सफलतापूर्वक चुनाव करवाने में अरुण देव गौतम की भूमिका रही और वोटिंग प्रतिशत में भी काफी इजाफा हुआ।

वे रेलवे, प्रशिक्षण, भर्ती और यातायात शाखाओं के प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक रहें। पिछले कुछ सालों से वे छत्तीसगढ़ के गृह सचिव के अलावा जेल व परिवहन विभाग का भी दायित्व सम्हाल रहे हैं। इसके अलावा उन्हें नगर सेना, अग्निशमन सेवाओं का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के पहले डीजीपी IPS श्रीमोहन शुक्ला का निधन हो चुका है। हाल ही में उन्होंने भोपाल में अंतिम सांसें ली। श्रीमोहन शुक्ला को एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का पहला डीजीपी बनाया गया था। 26 मई 2001 तक वह इस पद पर बने रहे।

इसके बाद रामलखन सिंह का नया डीजीपी बनाया गया। जोगी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में वो 2001 से 2004 के बीच छत्तीसगढ़ पीएससी के अध्यक्ष रहे। शुक्ला ने मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बतौर SP भी अपनी सेवाएं दी।

DGP नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह है निर्देश

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का 2006 का फैसला राज्य डीजीपी नियुक्तियों के लिए मार्गदर्शक ढांचे के रूप में काम करना जारी रखता है। न्यायालय ने आदेश दिया कि राज्य सरकारें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा सूचीबद्ध 3 सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से अपने DGP का चयन करें।

चयनित अधिकारी को अपनी सेवानिवृत्ति तिथि की परवाह किए बिना कम से कम दो साल का कार्यकाल पूरा करना होगा।

DGP पद के लिए योग्‍यता

डीजीपी बनने के लिए 30 साल की सेवा जरूरी है। इससे पहले स्पेशल केस में भारत सरकार डीजीपी बनाने की अनुमति दे सकती है। छोटे राज्यों में आईपीएस का कैडर छोटा होता है, इसको देखते हुए भारत सरकार ने डीजीपी के लिए 30 साल की सर्विस की जगह 25 साल कर दिया है। मगर बड़े राज्यों के लिए नहीं।

छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक जुनेजा का कार्यकाल 3 फरवरी 2025 को समाप्त हो रहा है। उन्हें पहले दो बार सेवा विस्तार मिल चुका है, लेकिन इस बार अब तक कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है।

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कोरबा

सुशासन तिहार 2026:शिविर में 588 आवेदन प्राप्त 144 आवेंदनो का हुआ मौके पर निराकरण, पोैधारोपण भी किया गया

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सुखरीकला में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित, ग्रामीणों को योजनाओं से किया गया लाभान्वित,

आमजनों को योजनाओं की जानकारी रखने व लाभ उठाने हेतु किया गया प्रेरित

कोरबा। सुशासन तिहार 2026  अंतर्गत आज जनपद पंचायत करतला के  ग्राम सुखरीकला में  जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपस्थित होकर विभिन्न विभागीय योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ लिया। शिविर में विभागीय अधिकारियों द्वारा विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित किया गया। ग्रामीणों ने भी अपनी मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए।  कृषि, खाद्य, सहकारिता , पंचायत विभाग द्वारा हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया गया।

शिविर में करतला जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अशोक विश्राम कंवर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की विभिन्न योजनाएँ जनता तक आसानी से पहुँच सकें, इसी उद्देश्य से प्रत्येक क्षेत्र में शिविर लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार शिविरों में जनता की आवश्यकता अनुरूप प्राप्त आवेदनों का शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने आमजनो से योजनाओं की जानकारी रखने एवं लाभ उठाने का आग्रह किया। श्रीमती कंवर ने भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर लोगों से ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने एवं जल संरक्षण की दिशा में व्यापक कार्य करने की बात कही। उन्होंने शिविर में क्षेत्रवासियों की बिजली, पानी से सम्बंधित सभी आवेदनों पर गम्भीरता से कार्यवाही सुनिश्चित करने की बात कही।

जनपद उपाध्यक्ष करतला मनोज झा ने कहा कि प्रदेश के मुखिया के मंशानुरूप आमजनों की समस्या का स्थानीय स्तर पर निराकरण हेतु जिला प्रशासन आपके समक्ष पहुँची है। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित शिविरों के माध्यम से आमजनों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही किया जा रहा है। आमजनों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नही पड़ रही, प्रशासन खुद चलकर आमजनों तक आ रहे है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने व उसकी देखभाल करने की बात कही साथ ही भू जल स्तर को ऊपर उठाने हेतु क्षेत्र में बनने वाले सभी नए मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था रखने की बात कही।

जनपद पंचायत करतला के सीईओ वैभव कौशिक ने बताया कि जनसमस्या निवारण शिविर में कुल 588 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 144 का शिविर स्थल पर ही निराकरण किया गया। शेष आवेदनों का परीक्षण उपरांत निराकरण किया जायेगा।
इस दौरान शिविर में कई विभागों से हितग्राहियों को अतिथियों के द्वारा सामग्रियों एवं प्रमाणपत्रों का वितरण किया गया।
शिविर में कृषि विभाग द्वारा  08 किसानों को किसान-किताब प्रदान किया गया। राजस्व विभाग द्वारा तीन हितग्राही को जाति प्रमाण पत्र का वितरण किया गया। खाद्य विभाग द्वारा तीन हितग्राहियों को पात्रतानुसार राशन कार्ड प्रदान की गई।  
स्वास्थ्य विभाग  द्वारा ग्राम पंचायत रीवांपार और अमलडीहा को टी.बी. मुक्त ग्राम पंचायत घोषित कर स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया तथा 10 हितग्राहियों को फूड बाक्स वितरित किया गया।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत सुखरीकला के सरपंच अंजोर सिंह मरकाम, अमलडीहा की सरपंच श्रीमती उषा बाई कंवर, बुढ़ियापाली की सरपंच उमेंद बाई, फरसवानी की श्रीमती ज्योति बियार, कराईनाला के पवन सिंह कंवर, कर्रापाली की श्रीमती अंजनी पैकरा, पचपेड़ी की आशा लता कंवर, रीवांपार की वंदना कंवर, सुखरीखुर्द की कविता मरावी, उमरेली की सुकबाई कंवर, कोथारी के विक्रम सिंह कंवर और ग्राम पंचायत सोहानपुर के सरपंच विजय कंवर सहित अन्य जन प्रतिनिधिगण , विभागीय अधिकारी एवं बडी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
किया गया पौधारोपण

आज विश्व पर्यवरण दिवस के अवसर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा सुखरीकला शिविर स्थल पर पौधारोपण भी किया गया। 

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छत्तीसगढ़

मंत्री सांसदों की डांट-फटकार से कर्मचारी नाराज:प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी; पटवारी को जूता मारूंगा से लेकर अधिकारी के अभिनंदन तक 6 मामले

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार में मंत्री-सांसदों की डांट फटकार का कर्मचारियों ने विरोध किया है। पिछले 10 दिनों में अधिकारियों कर्मचारियों को फटकार लगाने, उन्हें सस्पेंड की धमकी देने समेत कई ऐसे केस सामने आए, जिसके बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताई है।

फेडरेशन के महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं रुकीं तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि फेडरेशन में 5 लाख कर्मचारी-अधिकारी जुड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी भी अपनी मानवता और पारिवारिक पृष्ठभूमि है। इस तरह से मिसबिहेव कर उन्हें अपमानित किया जा रहा।

फेडरेशन के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है।

बृजमोहन अग्रवाल पहले भी सुशासन तिहार में अधिकारियों पर नाराजगी जता चुके हैं।

बृजमोहन अग्रवाल पहले भी सुशासन तिहार में अधिकारियों पर नाराजगी जता चुके हैं।

केस 1 – सांसद ने अधिकारियों को फटकारा

रायपुर के आरंग के नगर पंचायत समोदा में सुशासन तिहार कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जहां सांसद बृजमोहन अग्रवाल शिकायत मिलने पर भड़क गए। उन्होंने नायब तहसीलदार गजानंद सिदार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि, आपका अभिनंदन करें कि क्या करें बताओ।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फटकार लगाते हुए बृजमोहन ने कहा कि सबसे ज्यादा शिकायत आपकी है। कितना पैसा लेते हो, जो लोगों को बोलते हो…क्या बोलते हो लोगों से?

इसकी सबसे ज्यादा शिकायत है। कितना पैसा दिए हो सांसद जी को…कितना पैसा दिए हो? यह बातकर सुनकर वहां शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीण ताली बजाने लगे।

महिला की बात सुनकर मंत्री नाराज हो गए और मौके पर मौजूद अधिकारियों से जवाब तलब किया।

महिला की बात सुनकर मंत्री नाराज हो गए और मौके पर मौजूद अधिकारियों से जवाब तलब किया।

केस 2 – राजस्व मंत्री ने पटवारी को सस्पेंड का आदेश दिया

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा में सुशासन तिहार के तहत समाधान शिविर लगाया गया था। इस दौरान राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मंच से ही बिलाड़ी के पटवारी को एक घंटे के भीतर निलंबित करने के आदेश दे दिए।

ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि एक छोटे किसान को कई दिनों तक दफ्तरों के चक्कर लगवाए गए। उसकी जमीन को रिकॉर्ड में ‘निरंक’ दिखा दिया गया। शिकायत सुनते ही मंत्री ने नाराजगी जताई और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

गरियाबंद में भाजपा विधायक रोहित साहू ने मंच से कहा कि रिश्वत लेने वाले पटवारी को जूता से मारूंगा।

गरियाबंद में भाजपा विधायक रोहित साहू ने मंच से कहा कि रिश्वत लेने वाले पटवारी को जूता से मारूंगा।

केस 3 – विधायक ने पटवारी को जूता से मारूंगा कहा

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में छुरा ब्लॉक के ग्राम पाटसिवनी में 5 मई को सुशासन तिहार के तहत जनसभा हुई। इस सभा में एक शिकायत पर राजिम से भाजपा विधायक रोहित साहू ने मंच से कहा कि रिश्वत लेने वाले पटवारी को जूता से मारूंगा। इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। वहीं विधायक के पटवारी के लिए अपशब्द कहने पर पटवारी संघ ने सुशासन तिहार का बहिष्कार कर दिया है।

इधर अमलीपदर तहसील मुख्यालय में आयोजित सुशासन शिविर में खाली कुर्सियां देखकर पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी भड़क गए। भाजपा नेता मांझी ने अधिकारियों पर फोन न उठाने और शिविर की तैयारियों में लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि कलेक्टर साहब, आप फोन तो उठा लिया करें। इस दौरान कलेक्टर भगवान सिंह उईके मंच पर ही मौजूद थे।

सामुदायिक भवन की राशि जारी करने को लेकर भाजपा नेता और सीईओ के बीच हुई थी बहस।

सामुदायिक भवन की राशि जारी करने को लेकर भाजपा नेता और सीईओ के बीच हुई थी बहस।

केस 4 – भाजपा नेता और CEO के बीच बहस

दुर्ग जिले के ‘सुशासन तिहार’ का वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में जनपद पंचायत CEO रूपेश कुमार पांडेय ‘सुशासन तिहार’ के दौरान बीजेपी ग्रामीण महामंत्री पुराण देशमुख से बहस करते नजर आए थे। वीडियो में रूपेश कुमार पांडेय को यह कहते हुए सुना गया था कि, ‘जो करना है कर लो।’

यह पूरा विवाद विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में हुआ था। मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार ने रूपेश कुमार पांडेय को सस्पेंड कर दिया है।

रायपुर के मंदिर हसौद में सुशासन तिहार शिविर में नगर पालिका अध्यक्ष की अधिकारियों के साथ बहस हो गई।

रायपुर के मंदिर हसौद में सुशासन तिहार शिविर में नगर पालिका अध्यक्ष की अधिकारियों के साथ बहस हो गई।

केस 5 – कांग्रेस नपा अध्यक्ष और ADM की बहस

रायपुर जिले के मंदिर हसौद में सुशासन तिहार शिविर में कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष गोपाल चतुर्वेदी और ADM के बीच बहस हो गई। नगर पालिका अध्यक्ष ने एडीएम उमाशंकर बंदे से कहा, शिविर में प्रोटोकॉल का पालन ​नहीं किया गया। आपको इसका जवाब देना पड़ेगा।

इस पर अधिकारी ने कहा, प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा गया है। साथ ही उन्होंने नपा अध्यक्ष को मंच से नीचे जाने कहा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में नगर पालिका अध्यक्ष सुशासन तिहार में अव्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं।

नपा अध्यक्ष ने कहा कि शिविर में उन्होंने जनता की समस्याओं से जुड़े सवाल उठाए थे, लेकिन उन्हें मंच से हटाने की कोशिश की गई।

केस 6 बृजमोहन बोले- रेंजर को सस्पेंड करो

रायपुर के गोबरा नवापारा में आयोजित सुशासन ‘तिहार शिविर’ में शिकायत मिलने पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रेंजर को सस्पेंड करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रेंजर यहां क्यों नहीं है, शोकॉज नोटिस जारी करो और उसे सस्पेंड करो।

मामला कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय की बाउंड्री वॉल निर्माण में वन विभाग की आपत्ति और रेंजर की गैरमौजूदगी से जुड़ा था। शिविर के दौरान जब यह मामला सामने आया तो सांसद ने नाराजगी जताई थी।

सार्वजनिक फटकार पर कर्मचारी फेडरेशन नाराज

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने कहा है कि अगर किसी कर्मचारी से कामकाज में चूक होती है तो उसके लिए विभागीय जांच और कार्रवाई की व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन सार्वजनिक मंच से अपमानित करना न तो प्रशासनिक परंपराओं के अनुरूप है और न ही इससे व्यवस्था मजबूत होती है।

फेडरेशन के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि, सोशल मीडिया और रील्स के दौर में कुछ लोग लोकप्रियता हासिल करने के लिए कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं।

‘सम्मान बना रहना जरूरी’

कर्मचारी संगठनों ने कहा कि जनप्रतिनिधि और कर्मचारी दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं। जनप्रतिनिधि जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि कर्मचारी शासन-प्रशासन की योजनाओं और सेवाओं को धरातल पर लागू करते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सम्मानजनक संवाद और समन्वय बनाए रखना आवश्यक है।

फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि वह जवाबदेही तय करने का विरोध नहीं कर रहा, लेकिन सार्वजनिक अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मंचों से कर्मचारियों को फटकारने और अपमानित करने की घटनाएं जारी रहीं तो प्रदेशभर के कर्मचारी आंदोलन और सड़क पर उतरने जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।

बढ़ सकता है टकराव

फेडरेशन की चेतावनी के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ कर्मचारी सम्मानजनक व्यवहार की मांग कर रहे हैं।

बता दें कि सुशासन शिविर में नेताओं और अधिकारियों के बीच बहस की खबरें आई है।

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छत्तीसगढ़

तमिलनाडु से छुड़ाए श्रमिक पहुंचे, बसों से रवाना हुए गांव

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जांजगीर। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले से मुक्त कराए गए जांजगीर-चांपा जिले के 41 श्रमिक और उनके परिवारजन सुरक्षित बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गए।

कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देश पर जिला प्रशासन की टीम स्टेशन पहुंची। टीम ने सभी श्रमिकों से मुलाकात की और हालचाल जाना। श्रम पदाधिकारी समीर मिश्रा ने बताया कि सुरक्षित घर वापसी के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। सभी श्रमिकों को भोजन कराया गया। इसके बाद गृह ग्राम तक पहुंचाने के लिए विशेष बस सुविधा दी गई।

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