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छत्तीसगढ़

बिलासपुर एयरपोर्ट के धीमे काम पर हाईकोर्ट नाराज:नाइट लैंडिंग की अनुमति, फिर भी उड़ानें शुरू नहीं, सख्ती के बाद सेना ने सौंपी 291-एकड़ जमीन

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बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर के बिलासा देवी एयरपोर्ट के धीमे काम पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। 6 फरवरी को ही एयरपोर्ट को नाइट लैंडिंग का लाइसेंस मिल चुका था। बावजूद इसके अब तक यहां नाइट लैंडिंग शुरू नहीं हो सकी।

सोमवार (6 अप्रैल) को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एयरपोर्ट के धीमे डेवलपमेंट को लेकर सख्ती दिखाई और राज्य सरकार से पूछा कि जब सुविधाएं और अनुमति उपलब्ध है, तो जनता को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है। कोर्ट ने नए शपथ पत्र के साथ जवाब भी मांगा है।

इस सख्ती के बाद एयरपोर्ट के लिए हवाई सेवा शुरू होने के पांच साल बाद सेना ने अपनी 290.8 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को ट्रांसफर कर दी है। इस ट्रांसफर के बाद एयरपोर्ट के पास अब 646.8 एकड़ जमीन हो गई है। इसे 4-सी श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।

बिलासपुर में हवाई सेवा शुरू हुए 5 साल हो गए, लेकिन अब तक यहां नाइट लैंडिंग शुरू नहीं हुआ। (फाइल फोटो)

बिलासपुर में हवाई सेवा शुरू हुए 5 साल हो गए, लेकिन अब तक यहां नाइट लैंडिंग शुरू नहीं हुआ। (फाइल फोटो)

नया शपथ पत्र पेश करने के निर्देश

बिलासपुर में हवाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार (6 अप्रैल) को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एयरपोर्ट की धीमी प्रगति और सीमित उड़ानों को लेकर नाराजगी जताई।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अथॉरिटी से इस मामले में नया शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने नाइट लैंडिंग का मुद्दा उठाया।

उन्होंने बताया कि नाइट लैंडिंग का लाइसेंस मिले 2 महीने बीत गए इसके बाद भी अब तक रात में एक भी उड़ान शुरू नहीं हो सकी है। एलायंस एयर तकनीकी कारणों का हवाला देकर रात में विमान संचालित करने में आनाकानी कर रही है।

एलायंस एयर के भरोसे न रहें, बाकी कंपनियों को बुलाएं

हाईकोर्ट ने बिलासपुर से उड़ानों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर केवल एक एयरलाइन पर निर्भरता को लेकर भी निर्देश दिए। कोर्ट ने पूछा कि एलायंस एयर के अलावा बाकी निजी एयरलाइंस को बिलासपुर से जोड़ने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं और अन्य कंपनियों को आमंत्रित करने की वर्तमान स्थिति क्या है।

सेना की जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू

केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने बताया कि सेना के कब्जे वाली जमीन को एयरपोर्ट विस्तार के लिए ट्रांसफर करने की औपचारिकताएं अब अंतिम चरण में हैं। सेना के अधिकारियों की एक टीम बिलासपुर में मौजूद है, जो जमीन हैंडओवर करने की प्रक्रिया को पूरा कर रही है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि सेना की 290.8 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को ट्रांसफर कर दी गई है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि सेना की 290.8 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को ट्रांसफर कर दी गई है।

6-8 साल से चल रही सुनवाई

बता दें कि साल 2018-19 में कमल दुबे और हाईकोर्ट प्रैक्टसिंग बार एसोसिएशन ने जनहित याचिकाएं लगाई थी। इसमें बिलासपुर में हवाई सेवा शुरू करने और एयरपोर्ट को अपग्रेड करने की मांग की गई थी। इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट की लगातार सख्ती और निगरानी के चलते 1 मार्च 2021 को बिलासपुर से पहली बार कमर्शियल उड़ानें शुरू हो पाईं।

हालांकि उड़ानें शुरू होने के बाद भी यह मामला खत्म नहीं हुआ। याचिकाकर्ताओं ने एयरपोर्ट को 4-सी कैटेगरी में अपग्रेड करने, नाइट लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध कराने और सेना के कब्जे वाली जमीन वापस लेने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

तब से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट लगातार केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश दे रहा है, ताकि बिलासपुर एयरपोर्ट को एक पूर्ण विकसित एयरपोर्ट का दर्जा मिल सके। अब 17 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में जमीन ट्रांसफर और नई उड़ानों को लेकर बड़े अपडेट की उम्मीद है।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सेना ने लौटाई जमीन

सोमवार (6 अप्रैल) को हाईकोर्ट में केस की सुनवाई के बाद सेना ने एयरपोर्ट के लिए अपनी 290.8 एकड़ जमीन औपचारिक रूप से जिला प्रशासन को ट्रांसफर कर दी है। इस ट्रांसफर के बाद एयरपोर्ट के पास अब 646.8 एकड़ जमीन हो गई है।

इससे अतिरिक्त भूमि मिलने से रनवे विस्तार में आ रही तकनीकी बाधाएं दूर हो गई हैं। 4-सी कैटेगरी में अपग्रेड होने से अब महानगरों से बड़े विमानों की आवाजाही शुरू हो सकेगी, जिससे क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी।

ये अधिकारी रहे मौजूद

जिला मुख्यालय में आयोजित प्रक्रिया के दौरान कर्नल ए. मजूमदार, कर्नल दिनेश पट्टाभि, लेफ्टिनेंट कर्नल नीरज सिंह और जबलपुर के रक्षा संपदा अधिकारी मोहम्मद शाद आलम ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर एयरपोर्ट डायरेक्टर एन. वीरेन सिंह, एडीएम ज्योति पटेल और एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी भी उपस्थित रहीं।

वर्तमान में रनवे मात्र 1498 मीटर है, जो केवल 72 सीटर एटीआर विमानों के लिए उपयुक्त है।

वर्तमान में रनवे मात्र 1498 मीटर है, जो केवल 72 सीटर एटीआर विमानों के लिए उपयुक्त है।

इस तरह हुआ जमीन का ट्रांसफर

सेना की छावनी का प्रस्ताव रद्द होने के बाद राज्य सरकार ने जमीन वापसी की पहल की। चुनाव के कारण अटकी सीमांकन प्रक्रिया को रक्षा विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने हाल ही में पूरा किया। राज्य सरकार की ओर से पहले भेजे गए 90 करोड़ रुपए केंद्र ने लौटा दिए थे।

इसके बाद वर्तमान बाजार दर पर 70 करोड़ रुपए की मांग तय की गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू व हवाई सुविधा जनसंघर्ष समिति ने दिल्ली में इस मामले के समाधान के लिए प्रयास किए।

जमीन के अभाव में रुके थे काम

वर्तमान में रनवे मात्र 1498 मीटर है, जो केवल 72 सीटर एटीआर विमानों के लिए उपयुक्त है। बड़े विमानों के लिए इसे 2800 मीटर तक बढ़ाया जाएगा। इसके लिए 80 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। इसके अलावा वर्तमान में एटीसी सेंटर अस्थायी है। अब 22 करोड़ रुपए की लागत से 22 मीटर ऊंचा स्थायी एटीसी टॉवर बनाया जाएगा।

198 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पिछले प्रवास के दौरान जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट विकास के लिए 198 करोड़ रुपए की कार्ययोजना पेश की थी। जमीन मिलने के बाद अब इन कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • रनवे स्ट्रिप चौड़ीकरण: 40 करोड़ रुपए
  • रनवे लाइटिंग: 5 करोड़ रुपए
  • बाउंड्रीवॉल (4.70 किमी): लागत अनुमानित
  • एटीसी टॉवर (22 मीटर ऊंचा): 41 करोड़ रुपए
  • आईएलएस उपकरण व अन्य कार्य: 17 करोड़ रुपए

कलेक्टर बोले- जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि सेना की 290.8 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को ट्रांसफर कर दी गई है। सेना के अधिकारियों ने जिला मुख्यालय आकर इस प्रक्रिया को पूरा किया। अब रनवे विस्तार और अन्य विकास कार्यों की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

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कोरबा

संस्कृत विषय बचाओ अभियान: घोषणा को अमल में लाने संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

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कोरबा। प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी नोयन कुमार बुडेक, मनोज कुमार वर्मा, डॉ नारायण प्रसाद, गंगाराम साहू, हेमंत कुमार हिरवानी, दुर्गेश कुमार साहू, कुलेश्वर प्रसाद, दिनेश मंडावी, सुनील महार, ईश्वरी यदु कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, शारदा साहू, सुरेखा सेन, सोमप्रभा साहू सहित प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है को ध्यान में रखते हुए गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री द्वारा 30 अप्रैल को विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र सोशल मीडिया पर बहुत प्रसारित हैं।

इसे देख सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्रपूर्ण निर्णय से हर्ष की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित है। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 मई एवं 26 मई 2026 को नवा रायपुर स्थित एम -14 आवास में शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्र अति शीघ्र शासकीय आदेश जारी करवाने हेतु मांग पत्र सौपा, जिससे शिक्षक आश्वस्त हो जावे तथा मंत्री द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिए यह शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है, किन्तु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पदाधिकारियों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायकगण, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , राज्यपाल रमेन डेका , संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेड़रेशन कमल वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारंबार संस्कृत विषय को पूर्व की भांति अनिवार्य करने तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने के लिए मांग पत्र ज्ञापन सौपा गया था। 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं का संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था। इसी क्रम में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था। वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं। संस्कृत भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा। एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रहा है। अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।

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कोरबा

सुशासन  तिहार में जनमन सहित अन्य प्रचार समाग्री का किया गया वितरण

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कोरबा। सुशासन तिहार के उपलक्ष्य में जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की जन कल्याणकारी और महत्वकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित तथा जिले के विकास कार्यों, उपलब्धियों  एवं नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी के साथ ही जिले के सभी पांच ब्लाक में आयोजित महत्वपूर्ण शिविर स्थल-ग्राम पिपरिया, जल्के, बसीबार, बैरा, चोढ़ा, चुईया, गिधौरी, केराकछार, सिरमिना, लमना, नगोई, मोरगा, निरधी, जटगा, छिंदपुर आदि स्थानों में शिविर के माध्यम से जनमन सहित अन्य पत्रिका का वितरण भी किया गया।

ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में शिविर का अवलोकन किया। शिविर के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन मे हुए सकारात्मक बदलाव सहित जिले के अनेक विकास कार्यों, उपलब्धियों, नवाचार के संबंध में प्रचार सामग्री सुशासन के नवीन आयाम, तब और अब, विकसित भारत के बढ़ते कदम, बिल्डिंग टूमारो छ.ग.टूडे, अटल निर्माण वर्ष 2 साल (रिपोर्ट कार्ड) आदि का वितरण किया गया।

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कोरबा

31 मई को मनाया जाएगा विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

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कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदशन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी के नेतृत्व में कोरबा जिले में 31 मई 2026 को राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले में तंबाकू सेवन एवं धुम्रपान  से हाने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जनसामान्य को जागरूक करने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिससे जनसामान्य में धुम्रपान और तम्बाकू सेवन करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत जागरूकता रैली, शपथ ग्रहण, जनजागरूकता अभियान, स्वास्थ्य परामर्श एवं तंबाकू मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने संबंधी गतिविधयां आयोजित की जाएंगी। स्कूलों, महाविद्यालयों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं एवं आम नागरिकों को तंबाकू सेवन से दूर रहने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि तंबाकू सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वाथ्य के लिए हानिकारक है , बल्कि यह हमारे परिवारों और पर्यावरण को भी नुकसान पहॅंुचाता है वर्तमान समय में कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की गंभीर बिमारियॉं एवं अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण तंबाकू सेवन  है।
उन्होंने आमजन से अपील किया है कि वे स्वयं तंबाकू उत्पादों का सेवन न करें तथा अपने परिवार एवं समाज को भी इसके दुष्प्रभावो के प्रति जागरूक करें साथ ही विश्व तंबाकू निषेघ कार्यक्रम में सहभागिता कर तंबाकू मुक्त समाज निर्माण में सहयोग प्रदान करें।

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