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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त:कहा-PWD-NHAI फौरन मरम्मत कराए, ब्लैक-स्पॉट और जर्जर सड़कों की मांगी रिपोर्ट, बिलासपुर में 4 साल में 107 मौतें

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बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की जर्जर सड़कों और लगातार हो रहे हादसों को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे से लेकर बिलासपुर शहर की मुख्य सड़कों तक जगह-जगह गड्ढे और ब्लैक स्पॉट्स बने हुए हैं, जिनकी वजह से आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि अब सड़क मरम्मत में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सड़क सुधार के लिए तुरंत कार्ययोजना बनाई जाए। PWD और NHAI को फौरन सख्त एक्शन लेने अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश की जाए।

चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने PWD और NHAI समेत NTPC और SECL जैसे बड़े संस्थानों को भी जवाबदेह ठहराया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सुधार केवल कागजों पर नहीं बल्कि ज़मीन पर दिखना चाहिए।

हाईकोर्ट ने PWD और NHAI के अफसरों को पर्सनल एफिडेविट भी पेश करने कहा है। साथ ही कोर्ट ने कवर्धा में 19 आदिवासियों की मौत और बिलासपुर में 4 साल में 107 मौतों के बाद विभागों और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

टूटी सड़कों की पहले ये तस्वीरें देखिए….

बिलासपुर में सड़कों की हालत बेहद खराब है। सड़कों की दुर्दशा देखकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है।

बिलासपुर में सड़कों की हालत बेहद खराब है। सड़कों की दुर्दशा देखकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है।

बलरामपुर में सड़कों की हालत खस्ता है। जगह-जगह से सड़कें टूट गई हैं। राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बलरामपुर में सड़कों की हालत खस्ता है। जगह-जगह से सड़कें टूट गई हैं। राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बलौदाबाजार में बड़ी-बड़ी गाड़ियों की वजह से सड़कें समय से पहले टूट गई हैं। अब सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हो गए हैं।

बलौदाबाजार में बड़ी-बड़ी गाड़ियों की वजह से सड़कें समय से पहले टूट गई हैं। अब सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हो गए हैं।

सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और क्रेक्स

चीफ जस्टिस सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सड़कों की खराब हालत पर कहा कि बिलासपुर में पेंड्रीडीह से नेहरू चौक तक की सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और क्रेक्स उभर आए हैं, जिससे लगातार हादसों का खतरा बना रहता है। 2016 में बनी यह सड़क महज 9 साल में ही जर्जर हो रही है।

साथ ही कोर्ट ने कहा कि इसके साथ ही कई जगह ब्लैक स्पॉट बन गए हैं। डिवीजन बेंच ने कहा कि रिसर्च और रिपोर्ट का इंतजार किए बगैर ही तत्काल काम शुरू कराए। साथ ही यह भी बताने को कहा कि ब्लैक स्पॉट हटाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

मुंगेली जिले में भी सड़कों की हालात बेहद खराब है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।

मुंगेली जिले में भी सड़कों की हालात बेहद खराब है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।

जानिए हाईकोर्ट ने किन सड़कों की बदहाली पर लिया है संज्ञान

दरअसल, सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों पर हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर की है। पिछले साल कवर्धा जिले में पिकअप वाहन के खाई में गिरने से 19 आदिवासियों की मौत और पिछले चार सालों में सड़क हादसों 107 मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।

इसके साथ ही बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जगहों की जर्जर सड़कों को लेकर राज्य सरकार, PWD, पुलिस, परिवहन विभाग, NHAI, SECL और NTPC समेत सभी संबंधित एजेंसियों को पक्षकार बनाते हुए जनहित याचिका की सुनवाई की जा रही है।

बिलासपुर में बदहाल सड़कों की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं, जिससे कई लोगों की जान गई है।

बिलासपुर में बदहाल सड़कों की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं, जिससे कई लोगों की जान गई है।

कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट- गड्ढों से सड़कें बदहाल, ब्लैक स्पाट से बढ़ रहा खतरा

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया कि, NH-343 (बलरामपुर-रामानुजगंज रोड) की हालत बेहद खराब है, यहां दो-दो फीट गहरे गड्ढे हैं, जिनमें भारी वाहन फंस जाते हैं।

रायगढ़ जिले में 9 ब्लैक स्पाट, बिलासपुर में 2, मुंगेली में 4 और बलौदाबाजार-भाटापारा में 4 ब्लैक स्पाट मिले हैं। रायगढ़ के कुनकुनी इलाके में कोल वॉशरी की वजह से काली धूल सड़कों पर फैल रही है और हादसों का कारण बन रही है।

हाईकोर्ट ने कहा- कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखे सुधार

हाईकोर्ट ने PWD सचिव और NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी को व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया है। इसमें ब्लैक स्पाट और जर्जर सड़कों पर तत्काल कार्ययोजना बनाने को कहा है। SECL और NTPC को निर्देश दिए कि कागजों पर नहीं, जमीन पर सुधार दिखना चाहिए।

डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि सड़कों की दुर्दशा और लापरवाही से हो रहे हादसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर यदि सुधार नहीं दिखा तो संबंधित विभागों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

सड़क पर गड्ढे होने की वजह से लोगों को आने-जाने में तकलीफें हो रही हैं।

सड़क पर गड्ढे होने की वजह से लोगों को आने-जाने में तकलीफें हो रही हैं।

NHAI ने कहा- हाईवे पर काम हो रहा है

सुनवाई के दौरान NHAI ने कोर्ट को बताया कि रायपुर से बिलासपुर के बीच 105.98 किमी लंबे नेशनल हाईवे पर दो कंपनियों को मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा सौंपा गया है। रायपुर से सिमगा (48.58 किमी) तक एमएस पुंज लायड और सिमगा से पेंड्रीडीह (57.40 किमी) तक एमएस कन्हैयालाल अग्रवाल काम कर रही है।

अब तक किए गए कार्यों में 57.22 किमी तक घास और झाड़ियों की सफाई, 53.2 किमी सड़क की सफाई, 43 नए हेजर्ड मार्कर, 17,795 रिफ्लेक्टर स्टिकर, 14,658 रोड स्टड्स और 59 ट्रैफिक संकेतक लगाए गए हैं।

23 किमी पर रोड मार्किंग, 622 मीटर पर क्रैश बैरियर बदले गए और 1041 नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। इसके अलावा 3.54 करोड़ की नई मरम्मत योजना का टेंडर भी स्वीकृत कर काम शुरू करने का आदेश जारी किया गया है।

सड़कों पर दरारें पड़ रही हैं। गड्ढे हो गए हैं, जहां बाइक चलाना भी मुश्किल है।

सड़कों पर दरारें पड़ रही हैं। गड्ढे हो गए हैं, जहां बाइक चलाना भी मुश्किल है।

टूटी सड़कों पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

पेंड्रीडीह चौक से नेहरू चौक (15.375 किमी) तक 2016 में बनी सीमेंट कन्क्रीट रोड में बड़ी दरारें आ गई हैं। अपनी रिपोर्ट में PWD ने माना कि अगर सीधे इस पर डामर बिछाया गया तो वह भी दरारों के साथ टूट जाएगा।

इसी वजह से विभाग ने NIT रायपुर, IIT खड़गपुर, IIT रुड़की और CRRI नई दिल्ली जैसे संस्थानों को तकनीकी राय देने के लिए पत्र लिखा है। फिलहाल, NIT रायपुर ने जांच और मरम्मत का तकनीकी-आर्थिक प्रस्ताव भेजा है, जबकि अन्य संस्थानों से जवाब आना बाकी है।

इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है। PWD सचिव तत्काल प्रभाव से सड़क मरम्मत कराए और अगली सुनवाई 4 सितंबर को रिपोर्ट पेश करें।

रतनपुर से सेंदरी रोड पर कई ब्लैक स्पाट हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। साथ ही सड़क की दुर्दशा भी जानलेवा है।

रतनपुर से सेंदरी रोड पर कई ब्लैक स्पाट हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। साथ ही सड़क की दुर्दशा भी जानलेवा है।

रतनपुर-सेंदरी रोड पर भी ध्यान दें

हाईकोर्ट के न्यायमित्र ने कोर्ट को बताया कि रतनपुर से सेंदरी रोड पर कई ब्लैक स्पाट हैं और नालियों से निकलने वाला पानी सड़क पर बह रहा है, जिससे खतरा बढ़ गया है। इस पर कोर्ट ने NHAI से भी अलग शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया।

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार और NHAI दोनों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर सड़कों की मरम्मत नहीं हुई तो हादसों की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।

SECL का जवाब- अब बिना ढके ट्रक बाहर नहीं निकलेंगे

SECL ने कोर्ट को शपथपत्र के साथ बताया कि अब कोयला और फ्लाई ऐश ढोने वाले ट्रक बिना मजबूत (200 जीएसएम) तिरपाल के बाहर नहीं निकलेंगे। हर वाहन का फोटो और वीडियो रिकार्ड किया जा रहा है।

24 घंटे CCTV कैमरे की निगरानी की व्यवस्था की गई है। ट्रक की पहचान और ओवरलोडिंग रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई तय की गई है। खान परिसर से बाहर धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

NTPC सीपत इलाके और आसपास की सड़कें बदहाल हो गई हैं। बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।

NTPC सीपत इलाके और आसपास की सड़कें बदहाल हो गई हैं। बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।

NTPC ने भी कहा- जीरो टालरेंस नीति लागू

NTPC सीपत ने शपथपत्र में बताया कि उसने नया एसओपी (स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर) लागू किया है कि, 200 जीएसमी से अधिक तिरपाल से ढके बिना कोई ट्रक बाहर नहीं निकलेगा। वाहनों की फोटो खींचकर रिकार्ड में रखा जाएगा।

ANPR कैमरे और डिजिटल वजनी पुल लगाए गए हैं। ताकि ओवरलोडिंग पर रोक लग सके। वाहनों की धुलाई व्यवस्था भी शुरू की गई है, जिससे सड़क पर राख या धूल न गिरे। सभी ट्रांसपोर्टरों को जीएसएम मानक तिरपाल खरीदने का निर्देश दिया गया और उनके बिल भी मांगे गए।

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छत्तीसगढ़

तकनीकी नवाचार की उड़ान “लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” का सफल आयोजन

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एचडी शेफर मेमोरियल फाउंडेशन एवं कोडक्राफ्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

AI, पायथन और वेब डिज़ाइन का क्रियाशील प्रशिक्षण; 13 से 68 वर्ष तक के प्रतिभागियों ने सीखी आधुनिक तकनीक की बारीकियाँ

सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर।
एच० डी० शेफर मेमोरियल फाउंडेशन एवं कोडक्राफ्ट सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय “लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” का आज विधिवत एवं सफलतापूर्वक समापन हुआ। सीओसीएमआई कैम्पस, ककुदंड, बिलासपुर में 11 मई से 27 मई 2026 तक आयोजित इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यालयी छात्र-छात्राओं से लेकर कार्यरत पेशेवरों एवं सेवानिवृत्त व्यक्तियों तक — 13 वर्ष से 68 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI टूल्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, पायथन प्रोग्रामिंग, वेबसाइट डिज़ाइनिंग, उद्यमिता कौशल, एक्सेल तथा व्यक्तित्व विकास का व्यावहारिक एवं हस्तप्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विशेष बात यह रही कि प्रशिक्षण हेतु किसी पूर्व तकनीकी ज्ञान की अनिवार्यता नहीं रखी गई, जिससे तकनीक के क्षेत्र में नए प्रतिभागियों को भी सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिला।
प्रतिभागियों ने तैयार किए नवाचारपूर्ण प्रोजेक्ट
प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रतिभागियों ने अपनी व्यक्तिगत पोर्टफोलियो वेबसाइट्स, AI आधारित प्रोफेशनल हेडशॉट्स, पोस्टर एवं निमंत्रण-पत्र डिज़ाइन, पायथन आधारित BMI कैलकुलेटर तथा विभिन्न मिनी प्रोजेक्ट्स तैयार किए।
विशेष रूप से 15 वर्षीय बेनहुर एवं 17 वर्षीय एंजेल लहरे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से दो संपूर्ण कम्प्यूटर गेम्स विकसित कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय दिया।
“तकनीक साधन है, साध्य नहीं” — संजय विल्सन
समापन समारोह की अध्यक्षता एच० डी० शेफर मेमोरियल फाउंडेशन के निदेशक संजय विल्सन ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तभी सार्थक है जब उसे मानवीय विवेक, नैतिकता और कौशल के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीक का उपयोग समाजहित एवं आत्मविकास के लिए करने की प्रेरणा दी।
समारोह में आकांक्षा नाथानियल, एंजेल लहरे, बेनहुर, डेफनी, मेर्लिन, राजेश मकबूल एवं विस्मय सहित सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर आलोक विल्सन, विनय जेम्स एवं के० एम० के० पॉल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रशिक्षकों एवं आयोजकों का सराहनीय योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रशिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। सॉफ्टवेयर इंजीनियर अप्रतिम सैमुएल एवं डेटा साइंटिस्ट कपिल वर्मा ने प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकी अवधारणाओं एवं व्यावहारिक प्रयोगों से परिचित कराया।
इस सम्पूर्ण आयोजन के सफल संयोजन का श्रेय रेव० निखिल पॉल को जाता है, जिनके समर्पण, कुशल प्रबंधन एवं सतत प्रयासों से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
तकनीकी शिक्षा को जनसामान्य तक पहुँचाने की पहल
“लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” इस तथ्य का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया कि तकनीकी शिक्षा केवल इंजीनियरिंग अथवा विज्ञान के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज का प्रत्येक वर्ग एवं प्रत्येक आयु का व्यक्ति आधुनिक तकनीक सीखकर आत्मनिर्भरता एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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कोरबा

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से पर्यावरण प्रदूषण रोकना है – सीईओ

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जिला पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर हुई कार्यशाला

कोरबा। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी 2026 को अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान लेंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को रोकना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उक्त बातें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दिनेश कुमार नाग ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 संबंधी कार्यशाला में कही।

सीईओ श्री नाग ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह नियम 01 अप्रैल 2026 से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे कचरे का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित निपटान हो सके। इसके लिए ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण शुल्क, शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान भी सुनिश्चित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि ग्राम एवं जनपद स्तर पर उत्पन्न होने वाले कचरे की रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति हेतु जून माह तक जिले की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

श्री नाग ने कहा कि स्वच्छता अभियान की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन अपनाएं तथा कचरे के पृथक्करण के लिए नीले, हरे, लाल एवं पीले रंग के डस्टबिन का उपयोग करें, ताकि विभिन्न प्रकार के कचरे का पृथक-पृथक निपटान किया जा सके।

कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन के श्री दीप सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के उद्देश्य, महत्वपूर्ण विशेषताओं एवं मुख्य प्रावधानों की जानकारी पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से दी गई।

कार्यक्रम में लेखा अधिकारी श्री राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती इंदिरा भगत, श्रीमती अमिता साहू, जनपद पंचायतों के सीईओ, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अधिकारी-कर्मचारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।

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कोरबा

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन हेतु अशोक मोदी सहित 13 पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल इंदौर रवाना

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कोरबा। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ संगठन के प्रांतीय चेयरमैन अशोक मोदी, प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल, बाबूलाल अग्रवाल, जयदेव सिंघल, महेन्द्र सक्सेरिया, आशीष सक्सेरिया एवं डाॅ. अनिता मोहनलाल सहित अन्य पदाधिकारी आज इंदौर के लिए रवाना हो गए।

विदित हो कि अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक 30 एवं 31 मई 2026 को इंदौर में आयोजित है। इस अधिवेशन में संगठन के देशभर के प्रदेशाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारीगण एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सम्मिलित होंगे।
अधिवेशन में उपस्थित पदाधिकारीगणों के द्वारा राष्ट्रहित एवं समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की जायेगी। साथ ही समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक समरसता एवं राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे एवं संगठन की सदस्यता को बढ़ाने एवं इसको 1 करोड तक पहुॅचाने का लक्ष्य रखा जायेगा जिस पर कार्य करने पर भी विचार किया जायेगा।
उक्त कार्यक्रम राष्ट्रीय चेयरमैन प्रदीप मित्तल के सानिध्य में तथा नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण मित्तल की अध्यक्षता में संपन्न होगा।
अशोक मोदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन के कार्यक्रम सराहनीय रहे हैं तथा सामाजिक सेवा, धार्मिक सेवा, व्यापार एवं उद्योग में छत्तीसगढ़ अग्रवाल समाज की बड़ी भूमिका रही है और राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में जो ठोस निर्णय लिए जाएंगे, उसे छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाएगा।

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