छत्तीसगढ़ में बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त:कहा-PWD-NHAI फौरन मरम्मत कराए, ब्लैक-स्पॉट और जर्जर सड़कों की मांगी रिपोर्ट, बिलासपुर में 4 साल में 107 मौतें
बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की जर्जर सड़कों और लगातार हो रहे हादसों को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे से लेकर बिलासपुर शहर की मुख्य सड़कों तक जगह-जगह गड्ढे और ब्लैक स्पॉट्स बने हुए हैं, जिनकी वजह से आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि अब सड़क मरम्मत में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सड़क सुधार के लिए तुरंत कार्ययोजना बनाई जाए। PWD और NHAI को फौरन सख्त एक्शन लेने अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश की जाए।
चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने PWD और NHAI समेत NTPC और SECL जैसे बड़े संस्थानों को भी जवाबदेह ठहराया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सुधार केवल कागजों पर नहीं बल्कि ज़मीन पर दिखना चाहिए।
हाईकोर्ट ने PWD और NHAI के अफसरों को पर्सनल एफिडेविट भी पेश करने कहा है। साथ ही कोर्ट ने कवर्धा में 19 आदिवासियों की मौत और बिलासपुर में 4 साल में 107 मौतों के बाद विभागों और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
टूटी सड़कों की पहले ये तस्वीरें देखिए….
बिलासपुर में सड़कों की हालत बेहद खराब है। सड़कों की दुर्दशा देखकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है।
बलरामपुर में सड़कों की हालत खस्ता है। जगह-जगह से सड़कें टूट गई हैं। राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बलौदाबाजार में बड़ी-बड़ी गाड़ियों की वजह से सड़कें समय से पहले टूट गई हैं। अब सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हो गए हैं।
सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और क्रेक्स
चीफ जस्टिस सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सड़कों की खराब हालत पर कहा कि बिलासपुर में पेंड्रीडीह से नेहरू चौक तक की सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और क्रेक्स उभर आए हैं, जिससे लगातार हादसों का खतरा बना रहता है। 2016 में बनी यह सड़क महज 9 साल में ही जर्जर हो रही है।
साथ ही कोर्ट ने कहा कि इसके साथ ही कई जगह ब्लैक स्पॉट बन गए हैं। डिवीजन बेंच ने कहा कि रिसर्च और रिपोर्ट का इंतजार किए बगैर ही तत्काल काम शुरू कराए। साथ ही यह भी बताने को कहा कि ब्लैक स्पॉट हटाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
मुंगेली जिले में भी सड़कों की हालात बेहद खराब है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
जानिए हाईकोर्ट ने किन सड़कों की बदहाली पर लिया है संज्ञान
दरअसल, सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों पर हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर की है। पिछले साल कवर्धा जिले में पिकअप वाहन के खाई में गिरने से 19 आदिवासियों की मौत और पिछले चार सालों में सड़क हादसों 107 मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।
इसके साथ ही बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जगहों की जर्जर सड़कों को लेकर राज्य सरकार, PWD, पुलिस, परिवहन विभाग, NHAI, SECL और NTPC समेत सभी संबंधित एजेंसियों को पक्षकार बनाते हुए जनहित याचिका की सुनवाई की जा रही है।
बिलासपुर में बदहाल सड़कों की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं, जिससे कई लोगों की जान गई है।
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट- गड्ढों से सड़कें बदहाल, ब्लैक स्पाट से बढ़ रहा खतरा
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया कि, NH-343 (बलरामपुर-रामानुजगंज रोड) की हालत बेहद खराब है, यहां दो-दो फीट गहरे गड्ढे हैं, जिनमें भारी वाहन फंस जाते हैं।
रायगढ़ जिले में 9 ब्लैक स्पाट, बिलासपुर में 2, मुंगेली में 4 और बलौदाबाजार-भाटापारा में 4 ब्लैक स्पाट मिले हैं। रायगढ़ के कुनकुनी इलाके में कोल वॉशरी की वजह से काली धूल सड़कों पर फैल रही है और हादसों का कारण बन रही है।
हाईकोर्ट ने कहा- कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखे सुधार
हाईकोर्ट ने PWD सचिव और NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी को व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया है। इसमें ब्लैक स्पाट और जर्जर सड़कों पर तत्काल कार्ययोजना बनाने को कहा है। SECL और NTPC को निर्देश दिए कि कागजों पर नहीं, जमीन पर सुधार दिखना चाहिए।
डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि सड़कों की दुर्दशा और लापरवाही से हो रहे हादसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर यदि सुधार नहीं दिखा तो संबंधित विभागों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
सड़क पर गड्ढे होने की वजह से लोगों को आने-जाने में तकलीफें हो रही हैं।
NHAI ने कहा- हाईवे पर काम हो रहा है
सुनवाई के दौरान NHAI ने कोर्ट को बताया कि रायपुर से बिलासपुर के बीच 105.98 किमी लंबे नेशनल हाईवे पर दो कंपनियों को मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा सौंपा गया है। रायपुर से सिमगा (48.58 किमी) तक एमएस पुंज लायड और सिमगा से पेंड्रीडीह (57.40 किमी) तक एमएस कन्हैयालाल अग्रवाल काम कर रही है।
अब तक किए गए कार्यों में 57.22 किमी तक घास और झाड़ियों की सफाई, 53.2 किमी सड़क की सफाई, 43 नए हेजर्ड मार्कर, 17,795 रिफ्लेक्टर स्टिकर, 14,658 रोड स्टड्स और 59 ट्रैफिक संकेतक लगाए गए हैं।
23 किमी पर रोड मार्किंग, 622 मीटर पर क्रैश बैरियर बदले गए और 1041 नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। इसके अलावा 3.54 करोड़ की नई मरम्मत योजना का टेंडर भी स्वीकृत कर काम शुरू करने का आदेश जारी किया गया है।
सड़कों पर दरारें पड़ रही हैं। गड्ढे हो गए हैं, जहां बाइक चलाना भी मुश्किल है।
टूटी सड़कों पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
पेंड्रीडीह चौक से नेहरू चौक (15.375 किमी) तक 2016 में बनी सीमेंट कन्क्रीट रोड में बड़ी दरारें आ गई हैं। अपनी रिपोर्ट में PWD ने माना कि अगर सीधे इस पर डामर बिछाया गया तो वह भी दरारों के साथ टूट जाएगा।
इसी वजह से विभाग ने NIT रायपुर, IIT खड़गपुर, IIT रुड़की और CRRI नई दिल्ली जैसे संस्थानों को तकनीकी राय देने के लिए पत्र लिखा है। फिलहाल, NIT रायपुर ने जांच और मरम्मत का तकनीकी-आर्थिक प्रस्ताव भेजा है, जबकि अन्य संस्थानों से जवाब आना बाकी है।
इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है। PWD सचिव तत्काल प्रभाव से सड़क मरम्मत कराए और अगली सुनवाई 4 सितंबर को रिपोर्ट पेश करें।
रतनपुर से सेंदरी रोड पर कई ब्लैक स्पाट हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। साथ ही सड़क की दुर्दशा भी जानलेवा है।
रतनपुर-सेंदरी रोड पर भी ध्यान दें
हाईकोर्ट के न्यायमित्र ने कोर्ट को बताया कि रतनपुर से सेंदरी रोड पर कई ब्लैक स्पाट हैं और नालियों से निकलने वाला पानी सड़क पर बह रहा है, जिससे खतरा बढ़ गया है। इस पर कोर्ट ने NHAI से भी अलग शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया।
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार और NHAI दोनों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर सड़कों की मरम्मत नहीं हुई तो हादसों की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
SECL का जवाब- अब बिना ढके ट्रक बाहर नहीं निकलेंगे
SECL ने कोर्ट को शपथपत्र के साथ बताया कि अब कोयला और फ्लाई ऐश ढोने वाले ट्रक बिना मजबूत (200 जीएसएम) तिरपाल के बाहर नहीं निकलेंगे। हर वाहन का फोटो और वीडियो रिकार्ड किया जा रहा है।
24 घंटे CCTV कैमरे की निगरानी की व्यवस्था की गई है। ट्रक की पहचान और ओवरलोडिंग रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई तय की गई है। खान परिसर से बाहर धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
NTPC सीपत इलाके और आसपास की सड़कें बदहाल हो गई हैं। बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
NTPC ने भी कहा- जीरो टालरेंस नीति लागू
NTPC सीपत ने शपथपत्र में बताया कि उसने नया एसओपी (स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर) लागू किया है कि, 200 जीएसमी से अधिक तिरपाल से ढके बिना कोई ट्रक बाहर नहीं निकलेगा। वाहनों की फोटो खींचकर रिकार्ड में रखा जाएगा।
ANPR कैमरे और डिजिटल वजनी पुल लगाए गए हैं। ताकि ओवरलोडिंग पर रोक लग सके। वाहनों की धुलाई व्यवस्था भी शुरू की गई है, जिससे सड़क पर राख या धूल न गिरे। सभी ट्रांसपोर्टरों को जीएसएम मानक तिरपाल खरीदने का निर्देश दिया गया और उनके बिल भी मांगे गए।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ प्रदेश तीरंदाजी संघ ने राज्य में तीरंदाजी को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को जरूरी खेल सामग्री और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं देने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष कैलाश मुरारका ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी है।
संघ ने बताया कि वह करीब 30 साल से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने और उन्हें प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए तैयार करने का काम कर रहा है। संघ का कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में तीरंदाजी की प्रतिभाएं हैं, जिन्हें बेहतर सुविधाएं मिलने पर आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
संघ के मुताबिक राज्य, जिला, स्कूल और आदिवासी स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिताएं जल्द शुरू होने वाली हैं। इन प्रतियोगिताओं के लिए आर्चरी स्टैंड, बट्स, टारगेट फेस, पिन समेत कई अन्य खेल सामग्री की जरूरत होगी।
संघ खिलाड़ियों और खेल संस्थाओं को यह सामग्री करीब 25 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध कराता है। जिला संघ, स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और खिलाड़ी अपनी जरूरत की सामग्री की जानकारी समय पर संघ को दे सकते हैं।
संघ के मुताबिक राज्य, जिला, स्कूल और आदिवासी स्तर की प्रतियोगिताएं शुरू होने वाली हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को अवसर
संघ अध्यक्ष ने बताया कि पिछले करीब 30 सालों से जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों से भाग लेने या प्रतियोगिता में भेजने के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था एनएमडीसी, एनटीपीसी, राज्य सरकार और अन्य सहयोगियों की मदद से चलती रही है।
संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के खिलाड़ियों को भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
हर जिले में संसाधन और कोच की मांग
संघ ने कहा कि पदक के लिए प्रतिभा के साथ नियमित अभ्यास, प्रशिक्षित कोच, बेहतर खेल सामग्री और प्रतियोगिताओं का अनुभव जरूरी है। इसलिए हर जिले में तीरंदाजी के लिए जरूरी संसाधन और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संघ का मानना है कि इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के अधिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिलेगा।
सरकार से सहयोग की उम्मीद
संघ ने मुख्यमंत्री से तीरंदाजी के लिए आवश्यक खेल संसाधन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। साथ ही संबंधित विभाग को इस दिशा में जरूरी पहल के निर्देश देने की मांग की है। संघ का लक्ष्य हर जिले से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के लिए अधिक पदक हासिल करना है।
जशपुर, एजेंसी। जशपुरनगर में राष्ट्रीय खेल दिवस पर शनिवार को जशपुर में खेल और विकास का संगम देखने को मिला। पुरानी टोली स्थित कम्युनिटी हॉल में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘चेकमेट एट जशपुर–अखिल भारतीय ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता 2026’ का शुभारंभ किया।
प्रतियोगिता में देश के 12 राज्यों से 175 से अधिक खिलाड़ी और कोच शामिल हो रहे हैं। साथ ही, उप मुख्यमंत्री ने जिले को करीब 93 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात भी दी।
12 राज्यों से पहुंचे खिलाड़ी-कोच, साथ ही 93 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन
29 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगी प्रतियोगिता
अखिल भारतीय शतरंज प्रतियोगिता 29 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होगी। इसके लिए कुल 2.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। मुख्य वर्ग के विजेता को 50 हजार रुपए और ट्रॉफी, उपविजेता को 30 हजार और तीसरे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी को 20 हजार रुपए व ट्रॉफी दी जाएगी।
महिला, वरिष्ठ, विभिन्न आयु और रेटिंग वर्गों के साथ जशपुर व सरगुजा संभाग के खिलाड़ियों के लिए भी विशेष पुरस्कार रखे गए हैं। प्रतियोगिता फिडे स्विस प्रणाली के तहत 8 चक्रों में खेली जाएगी।
बोले- शतरंज जीवन में धैर्य और रणनीति सिखाता है
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद की जयंती पर 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। जशपुर की प्राकृतिक वादियों में अखिल भारतीय शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि शतरंज भारत की प्राचीन परंपरा से जुड़ा खेल है। इसके 64 खानों और 32 मोहरों में जीवन की कई सीख छिपी हैं। यह व्यक्ति को धैर्य, एकाग्रता, रणनीति और सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने विश्वनाथन आनंद जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए जशपुर से नई शतरंज प्रतिभाओं को आगे लाने पर जोर दिया।
दादा-पोता भी साथ खेल सकते हैं शतरंज
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने कहा कि वनांचल क्षेत्र जशपुर में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता होना बड़ी उपलब्धि है। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को देशभर के खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि शतरंज की खासियत है कि उम्र की कोई सीमा नहीं होती। दादा और पोता भी एक साथ बैठकर खेल सकते हैं। यह खेल एकाग्रता, अनुशासन, शांति और धैर्य सिखाता है। खिलाड़ी जीतता है या कुछ सीखता है, इसलिए इसे सिर्फ हार-जीत के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने प्रतियोगिता को जशपुर के लिए गौरव बताया। कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि जिले में इंडोर स्टेडियम, कुनकुरी स्टेडियम के साथ फुटबॉल, क्रिकेट और रॉक क्लाइंबिंग की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
93 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने करीब 93 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 86.99 करोड़ रुपए की अमृत मिशन जल प्रदाय योजना और करीब 7 करोड़ रुपए की गंदे पानी के शुद्धीकरण से जुड़ी वाटर फिल्टर परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा जशपुर नगर के लिए 4.68 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की गई। इसमें रानी सती तालाब के विकास के लिए 4.30 करोड़ रुपए, हाईटेक बस स्टैंड के लिए 11.99 करोड़ रुपए और वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल के जीर्णोद्धार के लिए 80 लाख रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर के विकास में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
रायपुर, एजेंसी। राज्य खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से शनिवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्य खेल अलंकरण समारोह-2026 आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि रहे, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अध्यक्षता की। केंद्रीय मंत्री तोखन लाल साहू, डॉ. रमन सिंह समेत प्रदेश के कई मंत्री और विधायक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस बार समारोह में 2023-24, 2024-25 और 2025-26 यानी तीन साल के राज्य खेल अलंकरण एक साथ दिए गए। राज्य खेल अलंकरण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। तीन साल का सम्मान एक साथ दिए जाने से लंबे समय से लंबित सम्मान भी दिए गए।
2025-26 के नगद पुरस्कारों में 21 खेलों के खिलाड़ियों और प्रतिभागियों को कुल 325 पुरस्कार दिए गए। इनमें किक बॉक्सिंग और कुडो के पुरस्कार सबसे ज्यादा रहे। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 पुरस्कार दिया गया।
टीम प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। समारोह में अलग-अलग जिलों के खिलाड़ियों के साथ पैरा खेलों के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया।
राज्य खेल अलंकरण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
तीन साल के खेल अलंकरण एक साथ, 2025-26 में 325 सम्मान
राज्य खेल अलंकरण सामान्य तौर पर हर साल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को दिए जाते हैं। इस बार 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के तीन वर्षों के लंबित अलंकरण एक साथ दिए गए।
पुरस्कारों में शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद विनोद चौबे सम्मान और शहीद पंकज विक्रम सम्मान शामिल हैं। टीम स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी भी दी गई।
अलग-अलग खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर अलंकरण दिए गए।
21 खेलों के खिलाड़ियों को 325 पुरस्कार
2025-26 के नगद पुरस्कारों में 21 खेलों के खिलाड़ियों और अन्य प्रतिभागियों को कुल 325 पुरस्कार दिए गए। इनमें किक बॉक्सिंग और कुडो के खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा पुरस्कार मिले। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 पुरस्कार दिया गया। अलग-अलग खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर ये पुरस्कार दिए गए।
दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी
अलंकरण सूची में दुर्ग-भिलाई के खिलाड़ियों ने हॉकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, नेटबॉल और मास्टर्स बैडमिंटन जैसे खेलों में जगह बनाई। हॉकी में भूमिका उपाध्याय, टेबल टेनिस में काजल, बैडमिंटन में संगीता राजगोपाल, कुश्ती में गामा यादव और वेटलिफ्टिंग में भूपेंद्र कुमार गडे का नाम शामिल है।
वहीं, बिलासपुर के खिलाड़ियों ने शूटिंग, तैराकी, तीरंदाजी समेत कई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया। सीता साहू, शशांक मसीह, स्वाती साहू, संकेत सामुएल और अजित्या सिंह सहित कई खिलाड़ियों को अलंकरण सूची में शामिल किया गया है।
अलंकरण सूची में दुर्ग-भिलाई के खिलाड़ियों की हॉकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, नेटबॉल और मास्टर्स बैडमिंटन जैसे खेलों में भागीदारी रही।
पैरा खिलाड़ियों को भी मिला सम्मान
खेल अलंकरण में पैरा खिलाड़ियों और पैरा खेलों को भी शामिल किया गया। सूची में पैरा एथलेटिक्स, पैरा फेंसिंग, पैरा जूडो, पैरा तैराकी और व्हीलचेयर फेंसिंग के खिलाड़ी शामिल रहे। महासमुंद के सुखदेव ने 100 मीटर और 1500 मीटर में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।
बिलासपुर की सीता साहू और स्वाती साहू ने व्हीलचेयर फेंसिंग में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते हैं। पैरा जूडो और पैरा तैराकी के खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
अलंकरण सूची में बालोद, राजनांदगांव, बीजापुर और रायगढ़ समेत अन्य जिलों के खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं।
दूसरे जिलों के खिलाड़ियों की भी रही भागीदारी
अलंकरण सूची में बालोद, राजनांदगांव, बीजापुर और रायगढ़ समेत अन्य जिलों के खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं। बालोद के अमित कुमार ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। राजनांदगांव के महेंद्र ध्रुवे का वॉलीबॉल और ज्ञानेश्वरी यादव का बैडमिंटन में नाम शामिल है।
बीजापुर के राकेश कडती सॉफ्टबॉल और रायगढ़ के अमन तिवारी व दिव्यांशु देवांगन भी सूची में हैं। सॉफ्टबॉल और तीरंदाजी की बालिका टीमों में छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली खिलाड़ियों की भी भागीदारी रही।
मुख्यमंत्री ट्रॉफी में टीमों का प्रदर्शन
व्यक्तिगत खिलाड़ियों के अलावा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी दी गई। 2023-24 में व्हीलचेयर फेंसिंग पुरुष टीम ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। टीम में बिरेन्द्र नवरंग, हरिहर सिंह राजपूत, आशीष पटेल और महेंद्र साहू शामिल थे, जबकि सूरज साहू टीम मैनेजर रहे।
इसी वर्ष जूनियर बालिका सॉफ्टबॉल टीम ने 41वीं जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, पटना में कांस्य पदक जीता। टीम में चंद्रकांता बरेठ, प्रतिमा सोना और रेणुका तेलम समेत 16 से अधिक खिलाड़ी शामिल थीं।
महिला तीरंदाजी टीम ने रजत के बाद जीता स्वर्ण
2024-25 में सीनियर महिला तीरंदाजी टीम ने झारखंड में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। टीम में सुलोचना राज, चंदनी साहू, हर्षिता साहू और सुशीला नेताम शामिल थीं। टीम के कोच ईतवारी सिंह राज रहे। 2025-26 में इसी टीम ने हैदराबाद में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। टीम में चांदनी साहू, सुलोचना राज, पायल मरावी और माया शामिल थीं। कोच इतवारी राज रहे।
महासमुंद के सुखदेव ने पैरा एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर 100 मीटर और 1500 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किए। बिलासपुर की सीता साहू और स्वाती साहू ने व्हीलचेयर फेंसिंग में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते। पैरा फेंसिंग, पैरा जूडो और पैरा तैराकी के खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के आधार पर सम्मान मिला।
रायपुर की जानकारी, पैरा खिलाड़ियों की जानकारी और बाकी विश्लेषण को अलग कर दिया है। अनावश्यक सवाल और दोहराव हटाए हैं, जबकि दिए गए प्रमुख तथ्य रखे हैं।
रायपुर के खिलाड़ियों की भी रही मजबूत मौजूदगी
राजधानी रायपुर के खिलाड़ियों को भी अलग-अलग खेलों में उनके प्रदर्शन के लिए सम्मान मिला। टेबल टेनिस, वुशु, बैडमिंटन और वेटलिफ्टिंग में रायपुर के कई खिलाड़ी सूची में शामिल हैं। भाठागांव के राजीव साहू का नाम शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार 2023-24 की सूची में है।
विवेकानंद नगर के गिरीराज बागड़ी ने वेटरन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। प्रणय नंद मजूमदार का नाम 2025-26 की सूची में शामिल है। प्रदीप जोशी और अस्विनम देवांगन भी सूची में हैं।
वुशु में दिहलापारा की प्रियंका ठाकुर ने राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक हासिल किया है, जबकि सत्ती बाजार की मानसी डुंभरे 2024-25 की सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में शामिल रहीं। बैडमिंटन में सुजय तम्बोली को 2025-26 के शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार के लिए चुना गया।
दिव्यांश अग्रवाल ने जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया और देवेंद्र नगर के ईशान भटनागर का नाम 2024-25 की बैडमिंटन सूची में शामिल है। वेटलिफ्टिंग में अजय दीप सारंग को वीर हनुमान सिंह सम्मान 2025-26 के लिए चुना गया है। उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए हैं। एवन कुमार जैन का नाम भी सूची में शामिल है।
किक बॉक्सिंग और कुडो के सबसे ज्यादा अलंकरण
2025-26 की सूची में किक बॉक्सिंग और कुडो को मिलाकर 146 अलंकरण दिए गए हैं। यह कुल 325 अलंकरणों का करीब 45 प्रतिशत है। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 अलंकरण दर्ज है। अलंकरण अलग-अलग खेलों की प्रतियोगिता, श्रेणी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर दिए गए हैं।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी जगह
अलंकरण सूची में बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं। सॉफ्टबॉल और तीरंदाजी की बालिका टीमों में ऐसे खिलाड़ियों की भागीदारी रही। इससे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मौजूदगी सामने आती है।