कोरबा
मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर, विश्व पर्यावरण दिवस पर भाजपा का ‘एक पेड़ माँ के नाम’ महाअभियान शुरू
विश्व पर्यावरण दिवस पर “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का भव्य शुभारंभ, भाजपा ने जिले में किया वृहद वृक्षारोपण
कोरबा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 5 जून से 21 जून तक आयोजित किए जाने वाले विभिन्न जनकल्याणकारी एवं जनसंपर्क कार्यक्रमों का शुभारंभ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृहद वृक्षारोपण अभियान “एक पेड़ माँ के नाम” के साथ किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में जिले भर में कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। अभियान के तहत आत्मानंद स्कूल, एनसीडीसी, सुभाष ब्लॉक में जिला स्तरीय भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता निभाई।
माँ के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संगम, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ – गोपाल मोदी

इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और मातृशक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक व्यापक जनआंदोलन है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में विकास, सुशासन, सेवा और जनकल्याण के नए प्रतिमान स्थापित हुए हैं, जिससे जनता का विश्वास लगातार सुदृढ़ हुआ है। जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने आगे बताया कि केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल नेतृत्व में 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से लेकर 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक विभिन्न जनसंपर्क एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि “12 साल विकास, विश्वास और जनकल्याण के” तथा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर आमजन से संपर्क करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 12 वर्षों के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों, उपलब्धियों एवं जनहितकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाएंगे।

कार्यक्रम में महापौर संजू देवी राजपूत, जिला महामंत्री संजय शर्मा, अजय विश्वकर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अजय पांडेय, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक चावलानी, पवन गर्ग, पूर्व महापौर जोगेश लांबा, वरिष्ठ पार्षद नरेंद्र देवांगन, एमआईसी मेंबर हितानंद अग्रवाल, जिला उपाध्यक्ष योगेश जैन, रुक्मणी नायर, जिला सह कोषाध्यक्ष नवीन अरोड़ा, जिला मंत्री अजय दुबे, जिला संवाद प्रमुख अर्जुन गुप्ता, जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा प्रिती स्वर्णकार, मंडल अध्यक्ष डॉ. राजेश राठौर, योगेश मिश्रा, मनीष मिश्रा, मनोज लहरे, सह संवाद प्रमुख शैलेन्द्र यादव, संजय राठौर, जिला सोशल मीडिया सह प्रभारी नीरज ठाकुर, अविनाश दुबे, डॉ. विजय राठौर, रामनारायण सराफ, कुलसिंह कंवर, राजेश लहरे व शशि चन्द्रा सहित भारी संख्या में भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी भाजपा कार्यकर्ताओ ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने अभियान से जुड़कर इसे सफल बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
कोरबा
आवारा कुत्तों के हमले से 4 साल के चीतल की मौत:कोरबा में 3 किमी तक दौड़ाकर किया घायल, इलाज के दौरान मौत
कोरबा। कोरबा वन मंडल के करतला रेंज अंतर्गत पुरेना गांव में आवारा कुत्तों के हमले से एक चार वर्षीय चीतल की मौत हो गई। गुरुवार सुबह तीन से चार कुत्तों ने चीतल को करीब तीन किलोमीटर तक दौड़ाया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बरपाली में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार, यह वर्ष 2026 की पहली वन्यजीव दुर्घटना है।

ग्राम पंचायत पुरेना के सरपंच कृष्णा बिंझवार ने बताया कि मड़वारानी पहाड़ के नीचे स्थित तालाब और अन्य जल स्रोतों पर अक्सर हिरण और चीतल पानी पीने आते हैं। बुधवार सुबह करीब 6 बजे मंदिर की ओर से आए तीन-चार आवारा कुत्तों ने एक चीतल का पीछा करना शुरू कर दिया और उसे दौड़ाते हुए गांव के पास तक ले आए।
ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना चौकीदार बुधराम यादव को दी। लोगों ने मिलकर कुत्तों को भगाया, लेकिन तब तक चीतल गंभीर रूप से घायल हो चुका था।

कुत्तों ने चीतल को करीब तीन किलोमीटर तक दौड़ाकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
इलाज के दौरान हुई मौत
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम घायल चीतल को उपचार के लिए बरपाली स्थित सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी के पास लेकर पहुंची। चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद चीतल को बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में चीतल का अंतिम संस्कार किया गया।

पहले हर साल होती थीं कई मौतें
वन विभाग के एसडीओ एसके सोनी ने बताया कि इस वर्ष वन्यजीव से जुड़ी यह पहली दुर्घटना है। उन्होंने कहा कि पूर्व में मड़वारानी क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमलों से हर साल पांच से छह चीतलों की मौत हो जाती थी।
एसडीओ के अनुसार, जंगलों के भीतर जल स्रोत विकसित किए जाने के बाद वन्यजीवों का गांवों की ओर आना कम हुआ है, जिससे ऐसी घटनाओं में कमी आई है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में चौकीदार भी तैनात किए गए हैं।
ग्रामीणों ने जताई चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में बड़ी संख्या में भालू, जंगली सुअर और अन्य वन्यजीव भी रहते हैं। इससे पहले भी कई बार आवारा कुत्तों ने हिरणों और चीतलों पर हमला किया है, हालांकि ग्रामीणों की सतर्कता से उनकी जान बच गई थी।
वन विभाग ने लोगों से वन्यजीवों की गतिविधियों की सूचना तत्काल देने और आवारा कुत्तों की समस्या पर सतर्क रहने की अपील की है। विभाग का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
कोरबा
कोरबा में दो ट्रेलर भिड़े, केबिन में फंसा हेल्पर:कोरबा-कटघोरा मार्ग पर हादसा, एक घंटे के रेस्क्यू के बाद निकाला गया हेल्पर
कोरबा। कोरबा के कटघोरा मुख्य मार्ग पर शुक्रवार को छुरी के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार से आ रहे एक ट्रेलर ने आगे चल रहे दूसरे ट्रेलर को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पीछे वाले ट्रेलर का हेल्पर केबिन में बुरी तरह फंस गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों ट्रेलर कोरबा से कटघोरा की ओर जा रहे थे। पीछे चल रहे ट्रेलर के ड्राइवर ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए आगे वाले ट्रेलर को टक्कर मारी। हादसे के बाद दूसरा ट्रेलर ड्राइवर समेत मौके से फरार हो गया, जबकि घटनास्थल पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले यातायात को नियंत्रित किया और केबिन में फंसे हेल्पर को निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू किया।

हादसे के कारण मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया।
एक घंटे तक चला रेस्क्यू
आरक्षक भुवनेश्वर प्रजापति और 112 के चालक संगम श्रीवास्तव ने स्थानीय लोगों की मदद से करीब एक घंटे तक मशक्कत की। हेल्पर को केबिन से निकालना आसान नहीं था, इसलिए पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए दूसरी गाड़ी की मदद से टोचन कर ट्रेलर के क्षतिग्रस्त हिस्से को खींचा।
केबिन से सुरक्षित निकाला गया हेल्पर
काफी मशक्कत के बाद हेल्फर को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस की तत्परता से उसकी जान बच गई। घायल हेल्फर को तत्काल 112 वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा भेजा गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज शुरू किया। फिलहाल, उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
घंटों जाम के बाद सामान्य हुआ यातायात
हादसे के कारण मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मौके पर पहुंची पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त ट्रेलरों को सड़क से हटवाया। करीब दो घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका।
कोरबा
SECL में ठेका श्रमिकों के ऐतिहासिक शोषण के खिलाफ 12 जून को कोरबा में गूंजेगा शंखनाद, नए श्रम कानूनों (OSHW Code) के तहत स्थायी रोजगार और समान वेतन की मांग को लेकर जुटेगा विशाल जनसैलाब
RCWF के महामंत्री प्रो. भागवत प्रसाद दुबे के नेतृत्व में 12 जोन के कोयला खदानों के हजारों ठेका मजदूर करेंगे एकजुटता का ऐतिहासिक इजहार
बिना साप्ताहिक अवकाश व बिना ओवर-टाइम (OT) भुगतान के 12-12 घंटे काम कराने जैसी अमानवीय परिस्थितियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान
नए श्रम कानून (OSHW Code 2020) के तहत मुख्य कार्यों (Core Activities) में ठेका प्रथा बंद कर सीधे SECL में समायोजित करने की मांग
कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में कार्यरत हजारों ठेका श्रमिकों के आर्थिक उत्पीड़न, मानसिक शोषण और उनके कानूनी अधिकारों के क्रूर हनन के खिलाफ राष्ट्रीय कोलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। ठेका श्रमिकों के हितों व न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी 12 जून 2026 शुक्रवार को दोपहर 03:00 बजे से कुसमुंडा के महतारी अंगना प्रांगण में एक ऐतिहासिक और विशाल ठेका मजदूर महासभा का आयोजन किया जा रहा है ।

यह विशाल महासभा RCWF के राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के नेतृत्व में संपन्न होगी। इस महारैली और संवाद कार्यक्रम में कोरबा, कुसमुंडा, दीपका, गेवरा सहित लगभग 12 जोन की कोयला खदानों से जुड़े हजारों ठेका श्रमिक मजदूर एकजुट होकर अपनी ताकत और अधिकारों का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में कोयला उद्योग और देश के श्रमिक आंदोलनों से जुड़े कई वरिष्ठ व दिग्गज नेता शामिल होकर आगामी आंदोलन की रणनीति तय करेंगे ।
तैयारियों को लेकर बैठकों का दौर शुरू, मजदूरों ने पारित किया प्रस्ताव

महासभा को ऐतिहासिक बनाने के लिए कुसमुंडा, दीपका, गेवरा, तथा अन्य खदानों के मजदूरों ने जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। आज कुसमुंडा खदान से जुड़े ठेका श्रमिकों की एक अति महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें सर्वसम्मति से इस महासभा को पूर्णतः सफल बनाने का दृढ़ संकल्प और प्रस्ताव पारित किया गया। श्रमिक नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा अब तक हम अलग-अलग टुकड़ों में बंटकर अपनी लड़ाई लड़ रहे थे, जिससे प्रबंधन हमारे शोषण का फायदा उठा रहा था, अब RCWF के मजबूत और राष्ट्रीय नेतृत्व में एकजुट होकर हम अपने हक की अंतिम लड़ाई लड़ेंगे और इसे सफल बनाना हर ठेका श्रमिक का परम कर्तव्य है ।
शोषण के प्रमुख बिंदु और नए श्रम कानूनों (OSHW Code) का खुला उल्लंघन

महासभा में प्रबंधन की निम्नलिखित दमनकारी नीतियों और विसंगतियों के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई जाएगी:-
अमानवीय कार्य परिस्थितियां:- खदानों में कार्यरत श्रमिकों से बिना किसी साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off) और बिना किसी ओवर-टाइम (OT) भुगतान के खुलेआम 12-12 घंटे तक जबरन काम कराया जा रहा है जो पूर्णतः गैर-कानूनी है ।
HPC वेतन योजना में भारी विसंगति:- पूर्व में बनाई गई हाई पावर कमेटी (HPC) की वेतन योजना में उच्च कुशल (Highly Skilled) ठेका श्रमिकों का वेतन भी SECL के कैटेगरी-1 के सबसे सामान्य रेगुलर मजदूर से कम रखा गया, इस विसंगतिपूर्ण समझौते पर जेबीसीसीआई (JBCCI) के सदस्य यूनियनों ने भी हस्ताक्षर कर मजदूरों को असहाय छोड़ दिया ।
नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) से वंचना:- 21 नवंबर 2025 से देश में लागू नए चार श्रम कानूनों के अंतर्गत OSHW Code 2020 की धारा 6 के तहत प्रत्येक श्रमिक को लिखित नियुक्ति पत्र और एम्प्लॉयमेंट कार्ड देना अनिवार्य है, जिससे प्रबंधन पूरी तरह बच रहा है ।
समान कार्य – समान वेतन (धारा 8):- नए कानून की धारा 8 साफ कहती है कि ठेका श्रमिकों को भी नियमित श्रमिकों के समान ही वेतन और सेवा शर्तें पाने का पूरा कानूनी अधिकार है ।
मुख्य कार्यों (Core Activities) में ठेका प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध:- OSHW Code की धारा 57 के तहत किसी भी संस्थान के मुख्य कार्यों में ठेका मजदूर नहीं लगाए जा सकते, इसके बावजूद SECL कोयला उत्खनन सपोर्ट रूफ वोल्टिंग लाइन बिछाना ट्रामर ओबी हटाना कोयला परिवहन ड्रिलिंग और डोज़र/ग्रेडर/PC ऑपरेटर जैसी भारी मशीनों के संचालन जैसे मुख्य कार्यों में ठेका मजदूरों का इस्तेमाल कर उनका हक मार रहा है ।
महासभा की मुख्य मांग, सीधे SECL में किया जाए समायोजन (Merge)
राष्ट्रीय कोलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) ने दो टूक कहा है कि अब ठेका श्रमिकों को कोई अंतरिम HPC वेतन या झूठी सुरक्षा नहीं चाहिए, चूंकि SECL का पूरा अस्तित्व और कोयला उत्पादन इन्हीं ठेका श्रमिकों के कंधों पर टिका है, इसलिए नए कानून की धारा 57 के तहत इन सभी ठेका श्रमिकों को सीधे SECL के नियमित (रेगुलर) कर्मचारी के रूप में समायोजित (मर्ज) किया जाए तथा नियमित कर्मचारियों की भांति ही ड्रेस कोड आवास सुविधा और उनके परिवारों को पूर्ण मेडिकल सुरक्षा प्रदान की जाए ।
श्रमिकों से महा-अपील
श्रम सेवा भूविस्थापित कामगार संगठन ने अपील की है कि यदि किसी भी कंपनी में ईपीएफ (EPF), सुरक्षा उपकरण, पेमेंट स्लिप या चिकित्सा सुविधा में कोई भ्रष्टाचार हो रहा है तो श्रमिक साथी अपने साथ लिखित शिकायत/आवेदन लेकर 12 जून को दोपहर 3 बजे कुसमुंडा महतारी अंगना में भारी से भारी संख्या में उपस्थित हों ।
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