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छत्तीसगढ़

रायपुर : पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ का आधार है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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डिजिटल सुशासन से छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नागरिक केंद्रित शासन व्यवस्था ही सुशासन की वास्तविक पहचान है: मुख्यमंत्री

प्रशासनिक सुधारों से बदल रहा छत्तीसगढ़: प्रशासनिक सुधारों से शासन हुआ अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित

डिजिटल सुशासन के मॉडल के रूप में उभर रहा छत्तीसगढ़

उत्कृष्ट भूमि सुधार एवं एग्रीस्टैक के लिए केंद्र सरकार ने दिए रू.598 करोड़

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।

इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु

सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।

सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ

राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘सेवा सेतु’ को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय, 
सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।

औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण

राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।
इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा ‘सुगम’ एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा

भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।

विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।

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मैकेनिक बोला- पुलिसवाले के कारण फांसी लगा रहा हूं:कहा- मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी, वसूली का आरोप, सुसाइड के बाद मोबाइल में मिला वीडियो

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर में मैकेनिक महेश दास मानिकपुरी की खुदकुशी से पहले का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वो कह रहा है कि, मैं प्रतिमा और बंटी पुलिस वाले की वजह से फांसी लगा रहा हूं। उसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

महेश ने वीडियो में कहा कि, बंटी क्राइम ब्रांच खमतराई, प्रतिमा मानिकपुरी, मोगरा दास, गोपीदास मानिकपुरी और उनके पिता ने मुझे बहुत परेशान किया। मुझे मरने के लिए मजबूर किया है। परिजनों ने पुलिस पर वसूली के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

घटना के 9 दिन बाद मृतक के मोबाइल से वीडियो मिला है। परिजनों ने दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई है। अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है। मामला खमतराई थाना इलाके का है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, खमतराई निवासी महेश दास मानिकपुरी ने 3 जुलाई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। महेश की पत्नी कुछ दिनों पहले उसे छोड़कर चली गई थी। घटना के बाद परिजनों ने महेश का मोबाइल सुरक्षित रख लिया था। करीब 9 दिन बाद जब उन्होंने मोबाइल की जांच की, तो उसमें रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो मिला।

वीडियो में महेश ने पुलिसकर्मी बंटी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वह उसे लगातार परेशान कर रहा था और कथित रूप से वसूली के लिए दबाव बना रहा था। महेश ने वीडियो में अपनी मानसिक प्रताड़ना का भी जिक्र किया है।

महेश दास मानिकपुरी ने 3 जुलाई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

महेश दास मानिकपुरी ने 3 जुलाई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

वीडियो देखने के बाद परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि, यदि समय रहते शिकायत पर ध्यान दिया जाता, तो शायद महेश की जान बच सकती थी। परिजनों ने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

मैकेनिक महेश दास मानिकपुरी की फाइल फोटो।

मैकेनिक महेश दास मानिकपुरी की फाइल फोटो।

अधिकारियों ने जांच का दिया आश्वासन

इस मामले में खमतराई टीआई जितेंद्र जायसवाल ने दैनिक भास्कर को बताया कि, मृतक के परिजनों की शिकायत पर जांच की जा रही है। सुसाइड करने वाले महेश दास मानिकपुरी पर 6 महीने पहले फर्जी पुलिसकर्मी बनकर पैसे लेने के आरोप में कार्रवाई की गई थी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, वीडियो की सत्यता, उसमें लगाए गए आरोपों और बाकी परिस्थितियों की बारीकी से जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई और मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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मुनि शाश्वतरत्न सागर बोले-संसार स्वार्थ और पापों से भरा हुआ:कहा- नवकार जाप से होगी आत्मा की शुद्धि, दोषों से मुक्त होने का करें प्रयास

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर के भैरव सोसायटी स्थित अरिहंत भवन में रविवार को नवकार जाप ग्रुप और अरिहंत हाईट्स वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में 31वें नवकार जाप का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम मुनि शाश्वतरत्न सागर ठाणा-2 के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

मुनि शाश्वतरत्न सागर ने कहा कि नवकार जाप से मन को शांत रखने और अपने अंदर की बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति नियमित रूप से जाप और आत्मचिंतन करे, तो वह अपने जीवन को सही दिशा में ले जा सकता है।

दोषों को दूर करने का प्रयास जरुरी

उन्होंने कहा कि संसार में स्वार्थ, पाप और अज्ञान जैसी कई बुराइयां हैं। इनकी वजह से इंसान सही रास्ते से भटक जाता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। यही आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत है।

कार्यक्रम में आशीष जैन, वीरेंद्र डागा, कमल जैन, दीपक कवाड़, निकुंज साचला और कमलेश ललवानी सहित समाज के कई लोग मौजूद रहे। वीरेंद्र डागा ने बताया कि नवकार जाप का उद्देश्य लोगों को धर्म, आत्मचिंतन और अच्छे जीवन की ओर प्रेरित करना है।

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BSP में करंट लगने से कर्मचारी की मौत:इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस के दौरान हादसा, हॉट सॉ-3 में कर रहे थे काम

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में रविवार को इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस के दौरान बड़ा हादसा हो गया। काम करते समय करंट लगने से संयंत्र के कर्मचारी विनोद कुमार (36) की मौत हो गई। हादसा यूआरएम (यूनिवर्सल रेल मिल) के हॉट सॉ-3, एबी बे स्थित क्रेन-407 के पास हुआ। सूचना मिलते ही संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।

जानकारी के अनुसार, विनोद कुमार भिलाई इस्पात संयंत्र में जेईए (जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट) के पद पर कार्यरत थे। रविवार को उनकी बी शिफ्ट में ड्यूटी थी। वे यूआरएम के हॉट सॉ-3, एबी बे स्थित क्रेन-407 के पास इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अचानक करंट की चपेट में आ गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

शाम 4:53 बजे मेडिकल पोस्ट लाया गया

हादसे के बाद वहां मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना अधिकारियों को दी। गंभीर रूप से घायल विनोद कुमार को इलाज के लिए प्लांट के मेन मेडिकल पोस्ट-1 ले जाया गया। उन्हें शाम 4:53 बजे मेडिकल पोस्ट पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

प्रबंधन ने कर्मचारी की मौत की पुष्टि की

घटना की सूचना मिलते ही प्लांट के संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। बीएसपी प्रबंधन ने कर्मचारी विनोद कुमार की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।

जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह

भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के अनुसार, हादसे की शुरुआती जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मेंटेनेंस के दौरान विनोद कुमार करंट की चपेट में कैसे आए।

जांच में सुरक्षा मानकों के पालन, कार्यस्थल की स्थिति और हादसे से जुड़े अन्य सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

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