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17 जुलाई को क्यों सस्ता हुआ सोना-चांदी? इन 5 फैक्टर्स से तय होगी बाजार की दिशा

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मुंबई, एजेंसी। शुक्रवार (17 जुलाई) को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग बनी हुई है। COMEX पर सोने का भाव 0.12 प्रतिशत गिरकर 3,987.50 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी की कीमत 1.24 प्रतिशत गिरकर 55.49 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे दोनों धातुओं की कीमतों पर दबाव बना। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में निवेशकों का रुझान टेक्नोलॉजी शेयरों से हटकर अन्य सेक्टर्स की ओर बढ़ने से भी बुलियन बाजार प्रभावित हुआ।

सोने की तुलना में चांदी में अधिक गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि इसकी कीमतें निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग पर भी निर्भर करती हैं।

वेस्ट एशिया तनाव से सोने को मिला सहारा

हालांकि कीमतों में नरमी रही लेकिन वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने सोने की गिरावट को सीमित रखा। अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ नए हमलों के बाद क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ी है, जिससे निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बना हुआ है।

तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड करीब 84.8 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता रहा और तीन महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ता नजर आया।

फेडरल रिजर्व की नीति पर बाजार की नजर

निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति पर भी नजर बनाए हुए हैं। हालिया महंगाई के आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में संभावित नरमी की उम्मीद बढ़ी है। आमतौर पर कम ब्याज दरें सोने जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे इन्हें रखने की अवसर लागत घट जाती है।

इन पांच कारकों पर रहेगी बाजार की नजर

  • वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम
  • कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी संकेत
  • अमेरिकी डॉलर की चाल
  • सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों की वैश्विक मांग
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महिला आरक्षण का समर्थन, ….परिसीमन विधेयक का पार्टी करेगी विरोध- मानसून सत्र से पहले बोले- कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में उप नेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार‘महिला आरक्षण विधेयक’के नाम पर परिसीमन विधेयक लाने का प्रयास करती है तो कांग्रेस उसका पुरजोर विरोध करेगी।  तिवारी ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के समर्थन में पहले भी थी, आज भी है और भविष्य में भी रहेगी लेकिन महिला आरक्षण के नाम पर किसी अन्य एजेंडे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को परिसीमन विधेयक पर अलग-अलग राजनीतिक दलों से अलग-अलग बातचीत करने के बजाय सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बैठक में परिसीमन से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की ओर से पहले भी इस संबंध में पत्र भेजा गया था और अब कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। 

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पास पहले भी लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत नहीं था, न आज है और न भविष्य में रहेगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में पूरी मजबूती से खड़ी है लेकिन यदि सरकार महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर परिसीमन विधेयक लाने का प्रयास करती है तो कांग्रेस उसका कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने सरकार से इस महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की भी मांग की। 

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संसद के मॉनसून सत्र से पहले NDA की बड़ी बैठक, 7 अहम विधेयकों को पारित कराने पर रणनीति की तैयार

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नई दिल्ली, एजेंसी। संसद के मॉनसून सत्र से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय में NDA की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में NDA के शीर्ष नेताओं ने आगामी मॉनसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने और विधायी कामकाज को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति तय कर ली है। करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अलावा सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता जैसे जेडीयू के ललन सिंह और टीडीपी के राम मोहन नायडू भी शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष के संभावित हमलों से निपटने, फ्लोर मैनेजमेंट को मजबूत करने और प्राथमिक विधेयकों को संसद के पटल पर रखने की रूपरेखा तैयार करना था।

सत्र में पेश होंगे 5 नए विधेयक

सरकार इस सत्र में पांच नए बिल पेश करने की तैयारी में है। इनमें से दो विधेयक हाल ही में जारी किए गए अध्यादेशों का स्थान लेंगे:

1.      आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 (अध्यादेश की जगह)

2.      सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 (अध्यादेश की जगह)

3.      जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026

4.      राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026

5.      सूक्ष्मलघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास संशोधन विधेयक, 2026

पहले से लंबित 2 विधेयकों पर भी बढ़ेगी बात

  • विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को इस साल मार्च में लोकसभा में पेश किया गया था।
  • विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 को दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश करने के बाद संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट अब पटल पर रखी जा सकती है।
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PM मोदी ने किया बाड़मेर रेलवे स्टेशन का लोकार्पण, 127 साल पुराने स्टेशन ने देखा युद्ध, इतिहास और विकास का सफर

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बाड़मेर, एजेंसी। राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर का ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन अब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अमृत भारत स्टेशन योजना का हिस्सा बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से नवनिर्मित बाड़मेर रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, बायतु विधायक आदूराम मेघवाल तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

करीब 127 वर्ष पुराने इस रेलवे स्टेशन का इतिहास देश की आजादी, भारत-पाक संबंधों और युद्धों का साक्षी रहा है। वर्ष 1899 में स्थापित इस स्टेशन ने समय के साथ कई बड़े बदलाव देखे हैं। कभी टीन की छत वाले छोटे स्टेशन के रूप में शुरुआत करने वाला यह रेलवे स्टेशन आज आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस आकर्षक स्टेशन बन चुका है।

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, तत्कालीन जोधपुर रियासत के महाराजा सरदार सिंह के सुझाव पर सादड़ी, पाली, बालोतरा और बाड़मेर को जोड़ने वाली रेल लाइन का निर्माण 15 मई 1899 को पूरा हुआ था। इसके बाद 22 दिसंबर 1900 को बाड़मेर से कराची तक लगभग 74 मील लंबी रेल लाइन बिछाई गई। आजादी से पहले यह मार्ग भारत और तत्कालीन अविभाजित क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण संपर्क का माध्यम था। वर्ष 1965 तक इस मार्ग पर कराची के लिए रेल सेवा संचालित होती रही।

बाड़मेर रेलवे स्टेशन ने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध का कठिन दौर भी देखा। 8 और 9 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने स्टेशन परिसर के आसपास बमबारी की थी। उस समय स्टेशन के निकट डीजल के बड़े भंडार मौजूद थे। समय रहते उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया और रेलवे स्टेशन को गंभीर नुकसान से बचाया जा सका।

ब्रिटिश काल में स्टेशन की इमारत विशेष गोलाकार छतों वाली वास्तुकला में बनाई गई थी। उस समय इस तरह की छतें गर्मी और बारिश से बेहतर सुरक्षा देने के लिए तैयार की जाती थीं। कई वर्षों तक यही भवन यात्रियों की सेवा करता रहा और बाड़मेर रेलवे स्टेशन की पहचान बना रहा।

वर्ष 2005-06 में स्टेशन के विकास का नया दौर शुरू हुआ, जब जोधपुर से मुनाबाव तक मीटर गेज लाइन को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया गया। इस परियोजना में तत्कालीन रक्षा मंत्री जसवंत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद बाड़मेर से मालाणी एक्सप्रेस की शुरुआत हुई और स्टेशन पर आधुनिक रेल सुविधाओं का विस्तार किया गया।

फरवरी 2006 में भारत और पाकिस्तान के बीच थार एक्सप्रेस सेवा शुरू होने के बाद बाड़मेर और मुनाबाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। इस रेल सेवा ने दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा दी।

अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बाड़मेर रेलवे स्टेशन का व्यापक पुनर्विकास किया गया है। आधुनिक प्रतीक्षालय, बेहतर यात्री सुविधाएं, आकर्षक भवन, सुगम प्रवेश मार्ग और उन्नत आधारभूत ढांचा इसे पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल करता है। नया स्टेशन न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देगा, बल्कि बाड़मेर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास का प्रतीक भी बनकर उभरा है।

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