बिज़नस
6.5 ट्रिलियन डॉलर के उत्पादन पर खतरा, चीन की रेयर अर्थ नीति से बढ़ी टेंशन, टेक और ऑटो सेक्टर में मचेगा हाहाकार
पेरिस, एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ‘ग्लोबल क्रिटिकल मिनरल्स आउटलुक 2026’ (Global Critical Minerals Outlook 2026) की रिपोर्ट के अनुसार, यदि चीन रेयर अर्थ (Rare Earth Elements) के निर्यात प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू कर देता है, तो चीन से बाहर पूरी दुनिया में हर साल $6.5 ट्रिलियन (लगभग 6.5 लाख करोड़ डॉलर) का औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, रक्षा, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका है।
क्या हैं रेयर अर्थ मिनरल्स?
रेयर अर्थ 17 महत्वपूर्ण खनिजों का समूह है, जिनका उपयोग स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), विंड टरबाइन, लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम, सैटेलाइट और अन्य हाई-टेक उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। इनकी लागत किसी उत्पाद में कम होती है लेकिन इनकी अनुपलब्धता पूरी उत्पादन प्रक्रिया को रोक सकती है।
सप्लाई चेन पर चीन की मजबूत पकड़
IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कुछ चुनिंदा क्रिटिकल मिनरल्स पर अत्यधिक निर्भर है, जबकि उनकी सप्लाई सीमित देशों में केंद्रित है। चीन ने अक्टूबर 2025 में रेयर अर्थ निर्यात के लिए लाइसेंस नियम सख्त किए थे। हालांकि इन नियमों का पूर्ण कार्यान्वयन नवंबर 2026 तक टाल दिया गया है लेकिन वैश्विक उद्योगों में अनिश्चितता बनी हुई है।
IEA का सुझाव: वैश्विक भंडारण व्यवस्था
रिपोर्ट में देशों को मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स का बहुपक्षीय रणनीतिक भंडार (Multilateral Stockpile) बनाने की सलाह दी गई है। एजेंसी ने 11 उच्च-जोखिम वाले मिनरल्स की पहचान की है, जिनके लिए शुरुआती स्तर पर लगभग 9.2 बिलियन डॉलर का निवेश और हर वर्ष करीब 900 मिलियन डॉलर के रखरखाव खर्च का अनुमान लगाया गया है।
IEA का कहना है कि यह निवेश संभावित 6.5 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक नुकसान की तुलना में एक प्रभावी सुरक्षा उपाय साबित हो सकता है।
चीन पर निर्भरता घटाने की कोशिश
दुनिया के कई देश चीन पर निर्भरता कम करने के लिए नए निवेश कर रहे हैं। 2023 से 2025 के बीच क्रिटिकल मिनरल्स परियोजनाओं में सरकारी वित्तीय सहायता बढ़कर 65 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।
अनुमान है कि रेयर अर्थ रिफाइनिंग में चीन की हिस्सेदारी, जो कभी 90 प्रतिशत से अधिक थी, 2035 तक घटकर लगभग 70 प्रतिशत रह सकती है। वहीं अमेरिका, मलेशिया और अन्य देशों में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के प्रयास तेज हुए हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की मौजूदा बढ़त को पूरी तरह समाप्त करने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में यदि रेयर अर्थ सप्लाई में बाधा आती है, तो इसका सबसे अधिक असर अमेरिका और यूरोप के औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
देश
देश से साबुत इलायची का निर्यात दो साल में तिगुने से अधिक होकर 43.6 करोड़ डॉलर पर
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत से साबुत इलायची का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से तिगुने से अधिक होकर 43.68 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में यह 13.19 करोड़ डॉलर था। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान साबुत यानी खड़ी इलायची की निर्यात मात्रा भी दोगुने से अधिक हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में खड़ी इलायची का निर्यात 20.12 करोड़ डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 43.68 करोड़ डॉलर हो गया।
मात्रा के लिहाज से निर्यात 2023-24 के 7,083 टन और 2024-25 के 7,674 टन से बढ़कर 2025-26 में 16,399 टन हो गया। एक अधिकारी ने कहा कि निर्यात में यह तेज बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर प्रीमियम मसालों की मांग बढ़ने, बेहतर गुणवत्ता उत्पादन और भारतीय इलायची की सुगंध एवं शुद्धता के कारण विदेशी खरीदारों की बढ़ती पसंद को दर्शाती है।
खड़ी इलायची के मुख्य निर्यात गंतव्यों में संयुक्त अरब अमीरात (13.52 करोड़ डॉलर), सऊदी अरब (12.51 करोड़ डॉलर), बांग्लादेश (4.77 करोड़ डॉलर), कुवैत (2 करोड़ डॉलर), इराक (1.37 करोड़ डॉलर) और मलेशिया (0.84 करोड़ डॉलर) शामिल हैं। नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा, चीन, मिस्र और ईरान भी भारत से इलायची आयात करते हैं। भारत में इलायची की खेती मुख्य रूप से छोटी इलायची और बड़ी इलायची के रूप में होती है।
छोटी इलायची का उत्पादन प्रमुख रूप से केरल (56-58 प्रतिशत हिस्सेदारी) में होता है, जबकि कर्नाटक और तमिलनाडु अन्य प्रमुख उत्पादक हैं। वहीं, बड़ी इलायची का उत्पादन सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में होता है।
देश
शेयर बाजार में रौनक, सेंसेक्स 964 अंक उछला, निफ्टी 24,330 के पार बंद
मुंबई, एजेंसी। शुक्रवार (17 जुलाई) को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स-निफ्टी दिनभर हरे निशान पर कारोबार करते दिखे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 964.58 अंक चढ़कर 78,151.45 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 261.55 की बढ़त के साथ 24,334.30 के स्तर पर बंद हुआ। IT शेयरों में खरीदारी, वैल्यू बाइंग जैसे कई फैक्टर के कारण बाजार में आज रौनक दिखी।
शेयर बाजार में तेजी के कारण….
IT शेयरों में बढ़त
आईटी सेक्टर में मजबूत खरीदारी ने बाजार की तेजी को गति दी। Tech Mahindra के जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, जिससे कंपनी के भविष्य के कारोबार को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा। Nifty IT इंडेक्स 1.29 प्रतिशत बढ़ा। टेक महिंद्रा और इंफोसिस के शेयरों में 1.6 प्रतिशत, टीसीएस में 1.7 प्रतिशत, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 1.5 प्रतिशत और HCL Tech में 2.4 प्रतिशत की तेजी दिखी।
Jio Financial के नतीजों से शेयर में उछाल
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का शेयर 4 फीसदी उछला, कंपनी का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 156 प्रतिशत और रेवेन्यू 227 प्रतिशत बढ़ा।
वैल्यू बाइंग से निवेशकों का भरोसा मजबूत
विश्लेषकों के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने बड़ी कंपनियों के शेयरों में वैल्यू बाइंग की। कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद मजबूत कॉरपोरेट नतीजों और चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों में खरीदारी से बाजार का सेंटीमेंट सकारात्मक बना रहा।
देश
CCI ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम समेत अन्य कंपनियों के खिलाफ शिकायत खारिज की
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के खिलाफ दायर शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के आरोप अनुमान आधारित हैं तथा इसके लिए कोई साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। प्रतिस्पर्धा आयोग ने बृहस्पतिवार को जारी आदेश में कहा कि उसने विभिन्न क्षेत्रों की 4,500 से अधिक कंपनियों के खिलाफ लगाए गए ऐसे ही आरोपों को भी खारिज कर दिया है।
शिकायतकर्ता ने दूरसंचार, लॉजिस्टिक्स, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) खरीद, ऊर्जा, दैनिक उपभोग की वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) और स्वास्थ्य सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा तीन और चार के उल्लंघन का आरोप लगाया था। धारा तीन और चार क्रमशः प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों और प्रभुत्व के दुरुपयोग से संबंधित हैं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन कंपनियों ने माल ढुलाई एवं आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में मूल्य निर्धारण में समानता, प्रतिस्पर्धियों को बाहर रखने वाली गतिविधियों और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को सीमित करने जैसे समन्वित आचरण अपनाए हैं।
साथ ही उसने महानिदेशक (डीजी) से मामले की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया था। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता विपक्षी पक्षों की विशिष्ट भूमिका बताने या आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराने में विफल रहा। सीसीआई ने कहा कि मिलीभगत या समन्वित आचरण के दावों के समर्थन में माल ढुलाई के भाव, चालान, निविदा दस्तावेज या पत्राचार जैसे कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। दूरसंचार क्षेत्र के मामले में आयोग ने कहा कि अल्पाधिकार वाले बाजार में ‘प्रीपेड टैरिफ’ योजनाओं, उनकी वैधता अवधि या रिचार्ज राशि में समानता मात्र से प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
जीईएम खरीद से जुड़े आरोपों पर आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता ने न तो कथित रूप से बोली में हेराफेरी में शामिल कंपनियों की पहचान की और न ही समन्वय, सूचनाओं के आदान-प्रदान या बारी-बारी से बोली लगाने के संबंध में कोई सामग्री उपलब्ध कराई। आयोग ने कहा कि आरोपों में बुनियादी तथ्यों का अभाव है और उनके आधार पर व्यापक एवं साक्ष्य तलाशने के उद्देश्य से की जाने वाली जांच को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए विपक्षी पक्षों (रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड एवं अन्य) के खिलाफ अधिनियम की धारा तीन और चार के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।
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