विदेश
मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहे 3 अमेरिकी वॉरशिप:इन पर 2200 सैनिक मौजूद, दावा- खार्ग आइलैंड पर कब्जा करने का प्लान
वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहे 3 अमेरिकी वॉरशिप:इन पर 2200 सैनिक मौजूद, दावा- खार्ग आइलैंड पर कब्जा करने का प्लान
वॉशिंगटन डीसी कुछ अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना है कि USS त्रिपोली पर मौजूद मरीन सैनिकों का इस्तेमाल ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित द्वीपों पर कब्जा करने के लिए किया जा सकता है। इन द्वीपों को आगे रणनीतिक ठिकाने या दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को रोका जा सके।
ईरान के लिए बहुत खास है खार्ग आइलैंड
खार्ग द्वीप ईरान के तट से करीब 15 मील दूर है और यहीं से उसके करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। इसलिए अगर अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लेता है या वहां नाकाबंदी करता है, तो वह ईरान पर होर्मुज को खोलने का दबाव बना सकता है।
हालांकि इस योजना में बड़ा जोखिम भी है। अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर कब्जा करता है, तो उसके सैनिक सीधे हमलों के दायरे में आ जाएंगे और यह जरूरी नहीं कि ईरान इससे झुक जाए।
कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को सीधे ईरान की जमीन या खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय वह अपने युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को होर्मुज स्ट्रेट में तैनात कर सकता है, ताकि तेल ले जाने वाले जहाजों को रास्ते में सुरक्षा दी जा सके।

दूसरी वजह- ईरान के यूरेनियम पर कब्जा
दूसरा बड़ा कारण है ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम। ईरान के पास करीब 950 पाउंड यूरेनियम ऐसा है जिसे परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि यह यूरेनियम उन ठिकानों के मलबे में दबा है, जिन पर अमेरिका और इजराइल ने हमला किया था। इसे सुरक्षित करने के लिए जमीन पर सैनिक भेजने की जरूरत पड़ेगी।
28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद ट्रम्प के बयान बदलते रहे हैं, लेकिन एक बात साफ है। वे चाहते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके।
USS त्रिपोली की अहमियत यहीं सामने आती है। इस जहाज पर 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के 2200 सैनिक सवार हैं, जो जापान के ओकिनावा में तैनात रहते हैं। ये सैनिक जमीन और हवा दोनों तरह की लड़ाई, छापेमारी और समुद्र से जमीन पर उतरने वाले ऑपरेशन में माहिर होते हैं।
USS त्रिपोली एक ऐसा वॉरशिप है जो समुद्र से ही हवाई और जमीनी ऑपरेशन चला सकता है। इसमें F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट, MV-22 ऑस्प्रे हेलीकॉप्टर और सैनिकों को किनारे तक पहुंचाने वाले विशेष जहाज मौजूद हैं।
अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंचेगा USS त्रिपोली
उम्मीद है कि USS त्रिपोली अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंच जाएगा। अगर ट्रम्प जमीन पर सैनिक भेजने का फैसला लेते हैं, तो यह पिछले दो दशकों में पहली बार होगा जब अमेरिकी सैनिक सीधे युद्ध में उतारे जाएंगे
इस वॉरशिप का नाम 1805 में त्रिपोली के खिलाफ अमेरिका की जीत की याद में रखा गया था। यह पहली बार था जब अमेरिका ने विदेशी जमीन पर जीत हासिल कर अपना झंडा फहराया था।
मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा अमेरिका
अमेरिका ने 28 फरवरी से ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ानी शुरू की है। अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस समय अरब सागर में तैनात है, जिसमें USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर और USS स्प्रूअंस जैसे मिसाइल डेस्ट्रॉयर शामिल हैं। इसके अलावा पांच अन्य मिसाइल डेस्ट्रॉयर भी इलाके में अलग-अलग तैनात हैं।
जेराल्ड आर. फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले लाल सागर में था, लेकिन इसका मुख्य जहाज USS जेराल्ड आर. फोर्ड अब ग्रीस के सूडा बे जा रहा है। इस जहाज में पिछले हफ्ते आग लग गई थी। इसके बाद उसकी मरम्मत होगी। इसके साथ USS बैनब्रिज, USS माहन और USS विंस्टन एस. चर्चिल जैसे जहाज हैं।
पूर्वी मैडिटेरिन सी में भी तीन अमेरिकी मिसाइल डेस्ट्रॉयर तैनात हैं। इसी बीच USS गोंजालेज नाम का एक डेस्ट्रॉयर अमेरिका के नॉरफोक बेस से रवाना हुआ है। यह कहां तैनात होगा, अभी पता नहीं है, लेकिन संभावना है कि इसे मिडिल ईस्ट या किसी अन्य अहम इलाके में भेजा जा सकता है।

विदेश
इजराइल को धमकी देने के बाद ईरानी अफसर की मौत:कहा था- नेतन्याहू के लिए सरप्राइज तैयार, कुछ घंटे बाद एयरस्ट्राइक में मारे गए
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता जनरल अली मोहम्मद नैनी की शुक्रवार को हवाई हमले में मौत हो गई। IRGC ने एक बयान जारी कर उनकी मौत की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नैनी को हालिया हमले में निशाना बनाया गया।
नैनी ने अपने आखिरी बयान में कहा था कि इजराइल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए ‘सरप्राइज’ तैयार है। उन्होंने दावा किया था कि ईरान की मिसाइल क्षमता अपने चरम पर है और दुश्मन को जल्द ही इसका असर देखने को मिलेगा।
नैनी ने यह भी कहा था कि युद्ध के बावजूद ईरान लगातार मिसाइल उत्पादन कर रहा है और उसके पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। लेकिन उनका यह बयान सामने आने के कुछ ही घंटों बाद IRGC ने पुष्टि की कि नैनी अमेरिकी-इजराइली हमले में मारे गए।
ईरान ने इस हमले को ‘कायराना’ करार देते हुए कहा कि यह उसके शीर्ष सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा है।
ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल की एक सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप ने शुक्रवार को लेबनान के दक्षिणी हिस्से की ओर गोले दागे।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार को अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को निशाना बनाया था।

ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कई हवाई हमले किए।

कतर के रास लाफान गैस प्लांट पर गुरुवार को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के दौरान भीषण आग लग गई।

इजराइल ने बुधवार को ईरान की पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था।

देश
भारत ने जंग के बीच ईरान को मेडिकल मदद भेजी:ईरानी दूतावास ने धन्यवाद दिया, इजराइल का दावा- ईरानी इंटेलिजेंस मिनिस्टर की मौत
तेल अवीव/तेहरान/नई दिल्ली,एजेंसी। इजराइल-अमेरिका और ईरान जंग के बीच भारत ने ईरान को मेडिकल सहायता की पहली खेप भेजी है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, यह खेप ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंपी गई, जिसमें जरूरी दवाइयां और मेडिकल सप्लाई शामिल हैं।
भारत में ईरान के दूतावास ने इस सहायता के लिए भारतीय लोगों का आभार जताया। दूतावास ने कहा कि यह मदद सफलतापूर्वक पहुंचा दी गई है और इसे भारत के लोगों की ओर से मिला सहयोग बताया। दूतावास ने मेडिकल सप्लाई सौंपने का वीडियो भी शेयर किया।

दूसरी ओर इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खातिब को एयरस्ट्राइक में मार गिराया है। हालांकि इस दावे की ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस्माइल खातिब ईरान की सुरक्षा के लिए बेहद अहम व्यक्ति माने जाते हैं। वे देश की आंतरिक सुरक्षा, विदेशों में जासूसी और राजनीतिक कंट्रोल बढ़ाने का काम करते हैं।
भारतीय जहाज ‘जग लाडकी’ गुजरात पहुंचा
भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ गुजरात के मुंद्रा स्थित अडाणी पोर्ट्स पर पहुंच गया है। यह UAE के फुजैराह पोर्ट से होर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए आया है।
इसपर 80,886 मीट्रिक टन(लगभग 5.8–6 लाख बैरल) कच्चा तेल लदा है। भारत में हर रोज लगभग 5.5–5.6 मिलियन बैरल (करीब 90 करोड़ लीटर) तेल की खपत होती है।
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…

ईरान ने मंगलवार रात इजराइल पर 100 से ज्यादा मिसाइल दागीं।

UAE पर मंगलवार रात ईरान के हमले का फुटेज।

इजराइली डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार रात ईरान की एक मिसाइल को मार गिराया है।

विदेश
पाकिस्तान की अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक, 400 की मौत:250 घायल, तालिबान का आरोप- PAK ने नशा मुक्ति सेंटर पर बम गिराए
काबुल,एजेंसी। पाकिस्तान ने सोमवार रात एक बार फिर अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की है। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया, जिनमें एक हॉस्पिटल भी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इसमें 400 लोगों की मौत हो गई, वहीं 250 से ज्यादा घायल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई जगहों पर धमाकों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं।
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए।

तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया है।
वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि काबुल में किसी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया।
पाकिस्तानी हमले से जुड़ी तस्वीर…

राजधानी काबुल में PAK एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने कई हमले किए। (सोर्स- आमज न्यूज)

पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद काबुल में एक 2000 बेड के हॉस्पिटल में आग लग गई।

अफगान रेस्क्यू टीम के मेंबर शवों को ढंकते हुए।

हॉस्पिटल पर हमले के बाद शवों को स्ट्रेचर पर रखकर बाहर निकाला गया।

अफगान सेना के जवान शव को कंबल में रखकर ले जाते हुए।

अफगानिस्तान में घायल व्यक्ति को अस्पताल लेकर जाते हुए।

पाकिस्तानी हमले में अफगानिस्तान में कई घर तबाह हो गए।

अफगानिस्तान में सुबह तबाह हुए घरों को देखते रहवासी।
हमले से 2000 बेड वाले हॉस्पिटल को भारी नुकसान
अफगानिस्तान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 9 बजे हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हॉस्पिटल 2000 बेड का है। इसे भारी नुकसान हुआ है।
मीडिया की टीमें जब वहां पहुंची तो अस्पताल के कुछ हिस्सों में तब भी आग लगी हुई थी। करीब 30 से ज्यादा शव स्ट्रेचर पर बाहर निकाले जा रहे थे। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि वहां बहुत ज्यादा मरीज थे, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है।
अफगान क्रिकेटर राशिद खान ने UN से जांच की मांग की
अफगानिस्तान के क्रिकेटर राशिद खान ने पाकिस्तानी हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा काबुल में हाल ही में हुए हवाई हमलों से लोग दुखी हैं। इन हमलों में कई आम लोगों की जान चली गई। कुछ हमले घरों, स्कूलों और अस्पतालों के आसपास भी हुए।
आम लोगों के इलाकों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से युद्ध अपराध माना जाता है, चाहे वह जानबूझकर किया गया हो या गलती से। खासकर रमजान के पवित्र महीने के दौरान ऐसी घटना से लोगों में और ज्यादा दुख और गुस्सा है।
लोगों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और मानवाधिकार संगठनों से मांग की है कि इस मामले की पूरी जांच की जाए और जो भी जिम्मेदार हो उसे सजा दी जाए।

अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमले के बाद की तस्वीर।
भारत बोला- काबुल अस्पताल पर हमला जनसंहार है
भारत ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अस्पताल पर हुए हमले को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है। भारत ने इस हमले को ‘कायरतापूर्ण’ और ‘जनसंहार’ करार दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह एक बेहद अमानवीय और अनैतिक हिंसक कृत्य है, जिसमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि जिस जगह को किसी भी हालत में सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता, उसे निशाना बनाना पूरी तरह गलत है।
बयान में पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि वह इस हमले को सैन्य कार्रवाई के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।
भारत ने कहा,
पाकिस्तान का यह घिनौना हमला अफगानिस्तान की संप्रभुता पर खुला हमला है और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। यह पाकिस्तान के लापरवाह व्यवहार के पुराने पैटर्न को दिखाता है, जिसमें वह अपनी आंतरिक नाकामियों को छिपाने के लिए अपनी सीमाओं के बाहर हिंसक कदम उठाता रहा है।
भारत ने कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बयान में यह भी कहा गया है कि भारत इस मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान के साथ खड़ा है।
PAK ने रविवार रात भी अफगानिस्तान में हमले किए
पाकिस्तान ने रविवार रातभर भी कंधार प्रांत में एयर स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था। पाकिस्तान ने यह कार्रवाई ऑपरेशन ‘गजब-लिल-हक’ के तहत की। इसके जवाब में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के सैन्य कैंप पर हमला किया।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, हमले में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी तालिबान (TTP) जैसे संगठन सीमा पार हमलों की तैयारी के लिए करते थे।
पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात अफगानिस्तान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था, जिसका मलबा गिरने से क्वेटा में दो बच्चों समेत कुछ नागरिक घायल हो गए।
1 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर
पिछले कुछ हफ्तों में अफगान और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में 56 नागरिक मारे गए हैं। इनमें 24 बच्चे भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक इन हमलों के कारण करीब 1.15 लाख लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं।

पाकिस्तान सीमा के पास विस्थापित अफगान लोग शनिवार को बॉर्डर पार करने की कोशिश करते हुए।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी।
पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया।
अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।
पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों?
2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था।
TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है।
TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं।
2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।

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