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विदेशी शेयर बाजारों में निवेश करने वालों की हुई बल्ले-बल्ले, जानें क्यों बढ़ रहा है ट्रेंड

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मुंबई, एजेंसी। पिछले एक साल में कई विदेशी शेयर बाजारों ने भारतीय बाजार में तुलना से बेहतर प्रदर्शन किया है। अमेरिका, जापान, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में आई तेजी का फायदा भारतीय निवेशकों के लिए उपलब्ध कई अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंडों को भी मिला है। इसके चलते विदेशी बाजारों में निवेश एक बार फिर निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, सभी निवेशकों के लिए इन फंड्स तक पहुंच समान नहीं है। कई इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड नई एकमुश्त (लंपसम) निवेश राशि स्वीकार कर रहे हैं, जबकि कुछ फंड केवल SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए ही निवेश की अनुमति दे रहे हैं। ऐसे में कई बेहतरीन रिटर्न देने वाले फंड्स में सीधे लंपसम निवेश करना फिलहाल संभव नहीं है।

विदेशी बाजारों की ओर क्यों बढ़ रहा निवेश?

बीते एक वर्ष में भारतीय और वैश्विक शेयर बाजारों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहां भारतीय बाजार सीमित या कमजोर रिटर्न देने में सफल रहे, वहीं कई विदेशी बाजारों ने दोहरे अंकों की बढ़त दर्ज की। खासतौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े बाजारों में मजबूत तेजी रही। नैस्डैक इंडेक्स में करीब 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ताइवान के शेयर बाजार ने भी शानदार प्रदर्शन किया। इसका सीधा लाभ अंतरराष्ट्रीय इक्विटी फंड्स के निवेशकों को मिला।

SIP के जरिए निवेश का विकल्प

कई इंटरनेशनल फंड फिलहाल केवल SIP के माध्यम से निवेश स्वीकार कर रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे फंड भी शामिल हैं जिन्होंने पिछले एक साल में बेहतरीन रिटर्न दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Edelweiss Emerging Markets Opportunities Equity Offshore Fund ने एक वर्ष में लगभग 83.18 प्रतिशत का रिटर्न देकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके अलावा चीन, उभरते बाजार (Emerging Markets) और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर केंद्रित फंड्स ने भी मजबूत प्रदर्शन किया।

आंकड़ों से सामने आए तीन बड़े ट्रेंड

टेक्नोलॉजी सेक्टर का दबदबा:

अमेरिकी टेक शेयरों में तेजी के चलते नैस्डैक आधारित फंड्स ने शानदार रिटर्न दिया।

उभरते बाजारों की मजबूत वापसीः

चीन और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने वाले फंड्स ने कई मामलों में अमेरिकी बाजार आधारित फंड्स के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन किया।

निवेश पर सीमाएं:

कई हाई-रिटर्न इंटरनेशनल फंड्स में लंपसम निवेश फिलहाल बंद है और केवल SIP के जरिए निवेश की सुविधा उपलब्ध है, जिससे निवेशकों की पसंद सीमित हो जाती है।

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मायावती का विपक्ष पर हमला, बोलीं- BSP वोट के लिए धरना, हंगामा और झूठे वादों की राजनीति में विश्वास नहीं करती

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लखनऊ, एजेंसी। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्‍यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती ने शनिवार को कहा कि दूसरे दलों की तरह उनकी पार्टी अपना राजनीतिक व चुनावी स्‍वार्थ साधने के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, हवा-हवाई वादों से जनता को गुमराह करने में विश्वास नहीं करती है। बसपा प्रमुख ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद का नाम लिए बिना ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”यह सर्वविदित है कि दूसरे दलों की तरह बसपा अपना राजनीतिक व चुनावी स्‍वार्थ साधने के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व निजी संपत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिंसक घटनाओं तथा हवा-हवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।

चंद्रशेखर मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम के 15 मई को अपहरण के बाद हत्‍या के मामले को लेकर आंदोलनरत हैं। चंद्रशेखर ने शुक्रवार को ‘एक्‍स’ पर एक पोस्‍ट में बसपा प्रमुख का नाम लिए बिना कहा था, ”सत्‍ता ही सब कुछ है, सत्‍ता के बिना कुछ नहीं हो सकता है।” उन्‍होंने कहा, ”यह बात बिल्कुल सही है, लेकिन हमारे रहबर कांशीराम जी कहा करते थे कि सत्‍ता संघर्ष से मिलती है।” चंद्रशेखर आजाद ने शनिवार सुबह ‘एक्‍स’ पर एक वीडियो फुटेज साझा की, जिसमें आंदोलनरत बसपा संस्थापक कांशीराम को पुलिस से संघर्ष करते देखा जा सकता है।

सांसद आजाद ने इस पोस्ट में लिखा, ”सड़क पर संघर्ष करते हमारे प्रेरणास्रोत, बहुजन आंदोलन के महानायक, रहबर मान्यवर कांशीराम साहब को शत-शत नमन।” आजाद के इस पोस्‍ट के कुछ घंटों बाद ही मायावती ने एक पोस्‍ट में कहा, ”बसपा ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाजियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अंबेडकरवादी पार्टी है जो ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहां सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है।

उन्होंने कहा कि इसका जीता-जागता प्रमाण यहां उत्तर प्रदेश में बसपा के नेतृत्व में चार बार रही सरकार के दौरान व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास तथा अपराध-नियंत्रण रहा है। मायावती ने दावा किया, ”यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बसपा विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियों आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आंसू नहीं बहाती और न ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की तरह रंग बदलती है।” बसपा प्रमुख ने कहा, ”उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी चुनाव में बसपा के प्रभाव को तेजी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियों में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है, और इसलिए वे अपने साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकंडों के तहत कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के लोगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं।

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PM मोदी 3 देशों का सफल दौरा पूरा कर स्वदेश रवाना, न्यूजीलैंड से मिली भावुक विदाई

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ऑकलैंड, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिन की न्यूजीलैंड यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार को भारत के लिए रवाना हो गए। इस यात्रा के दौरान भारत और न्यूजीलैंड ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक विस्तार दिया। प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की यात्रा के आखिरी चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी को विदा किया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “इस यात्रा ने रिश्तों को मजबूत किया, साझेदारी को नयी मजबूती दी और साझा भविष्य की दिशा तय की। न्यूजीलैंड में महत्वपूर्ण बैठकों और कई अहम फैसलों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के लिए रवाना हुए।

विशेष सम्मान के तौर पर प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने उन्हें हवाई अड्डे पर विदाई दी।” विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा से व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, शिक्षा, नवाचार और लोगों के बीच आपसी संबंधों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण परिणाम हासिल हुए। न्यूजीलैंड में मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ वार्ता की, जिसके बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक विस्तार दिया और अगले पांच वर्ष में दोनों देशों के बीच वस्तुओं व सेवाओं के वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। इस बैठक में 18 ठोस फैसले हुए, जिनमें 10 समझौते शामिल हैं। इनमें अगले चार वर्ष में संबंधों को मजबूत करने की रूपरेखा तैयार करना, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाना और भारतीय नौसेना तथा न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक सहायता से जुड़ा समझौता प्रमुख हैं।

यह यात्रा भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हाल ही में हस्ताक्षर होने के बाद हुई। साथ ही, यह पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चुनिंदा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और उद्योग जगत के नेताओं से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाएगा तथा बाजार तक पहुंच और निवेश के नए अवसर खोलेगा। उन्होंने ऑकलैंड में आयोजित ‘किया ओरा मोदी’ कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रमुख खिलाड़ियों और खेल जगत की हस्तियों की ओर से प्रदर्शित आधुनिक खेल उपकरणों और नयी खेल प्रौद्योगिकी की प्रदर्शनी भी देखी।

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प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड से पहले ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ शिखर वार्ता की। दोनों नेताओं ने शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। दोनों नेताओं की बातचीत का एक प्रमुख विषय रक्षा सहयोग, खासकर समुद्री क्षेत्र में सहयोग को प्रगाढ़ बनाना रहा। दो वर्ष से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा समझौता भी हुआ। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया भारत की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए यूरेनियम की आपूर्ति कर सकेगा। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया गए थे, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।  

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आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत, BP, हार्ट और शूगर समेत केंद्र सरकार ने तय किए 39 जरूरी दवाओं के दाम, चेक करें लिस्ट

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में बढ़ते इलाज के खर्च और महंगी दवाओं के बोझ से परेशान आम जनता के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने 39 जरुरी दवाइयों के दाम तय किए हैं। कोई भी रिटेल दुकानदार इन दवाइयों के निर्धारित कीमत से ज्यादा पैसे नहीं वसूल सकता। सरकार ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानि की NPPA के तहत ये बड़ा कदम उठाया है। केमिकल और फर्टिलाइज़र मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय ड्रग्स (प्राइसेज़ कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत लिया गया है ताकि आपातकालीन और रोजमर्रा की जीवन रक्षक दवाएं आम लोगों की जेब के अनुकूल हो सकें।

इन प्रमुख बीमारियों की दवाओं पर लागू होगी नई कीमतें

सरकार की इस नई सूची में निम्नलिखित बीमारियों से जुड़ी दवाओं को शामिल किया गया है:

  • हाइपरटेंशन यानी हाई बीपी
  • दिल की बीमारियां
  • डायबिटीज, बैक्टीरियल इंफेक्शन, मिर्गी, दर्द, HIV, आंखों की बीमारियों और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए ली जाने वाली दवाएं शामिल हैं।
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जरूरी दवाओं की नई आधिकारिक Price List

NPPA और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख साल्ट्स और फॉर्मूलेशन की तय की गई कीमतें इस प्रकार हैं:
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इसके अलावा संक्रमण के लिए Amoxicilline+Clavulanate, ग्लूकोमा की आई ड्रॉप और कैंसर उपचार के लिए Imatinib Oral Solution की कीमतों को भी नियंत्रित किया गया है।

ज्यादा पैसे वसूलने वाले मेडिकल स्टोर्स पर होगी सख्त कार्रवाई

अथॉरिटी ने साफ कर दिया है कि तय की गई इन कीमतों का उल्लंघन करने वाली फार्मा कंपनियों या मेडिकल स्टोर संचालकों को बख्शा नहीं जाएगा।

जुर्माना और ब्याज: यदि कोई रिटेलर या कंपनी निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलती है, तो उसे ग्राहकों से ली गई अतिरिक्त रकम ब्याज सहित सरकार के पास जमा करनी होगी।

कानूनी कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ DPCO 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दुकानों पर प्राइस लिस्ट लगाना होगा जरुरी:

एनपीपीए के आदेशानुसार, सभी दवा विक्रेताओं (Retailers & Dealers) को अपनी दुकान के ऐसे हिस्से में निर्माताओं द्वारा जारी मूल्य सूची (Price List) को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा, जहाँ से आने-जाने वाले ग्राहक इसे आसानी से देख सकें।

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