विदेश
रूस पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला: कई शहरों में मची तबाही, 8 लोगों की मौत व 60 से ज्यादा घायल
मॉस्को/कीव, एजेंसी। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच शनिवार तड़के यूक्रेन ने रूस के कई इलाकों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए। इन हमलों में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हो गए। हमलों में रूस के प्रमुख लॉजिस्टिक गोदाम, तेल डिपो और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। कई स्थानों पर भीषण आग लग गई, जबकि रूस ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सैकड़ों ड्रोन मार गिराए। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन ने रात के समय रूस के विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन हमले किए। सबसे बड़ा हमला रूस की प्रमुख ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज (Wildberries) के दो बड़े गोदामों पर हुआ। इनमें से एक गोदाम तांबोव क्षेत्र के कोतोव्स्क में और दूसरा मॉस्को के पास इलेक्ट्रोस्टाल में स्थित है। हमले के बाद दोनों गोदामों में भीषण आग लग गई। बाद में कंपनी की संस्थापक तात्याना किम ने बताया कि कोतोव्स्क स्थित गोदाम में लगी आग पर काबू पा लिया गया है, जबकि इलेक्ट्रोस्टाल के गोदाम से धुएं के विशाल गुबार उठते रहे।
मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि यूक्रेनी ड्रोन ने नोगिंस्क शहर के एक तेल डिपो पर भी हमला किया, जिससे वहां आग लग गई। सुरक्षा के मद्देनजर पास के एक प्रसूति अस्पताल और आवासीय इमारत को खाली कराया गया। ड्रोन का मलबा एक किंडरगार्टन (प्री-स्कूल) पर भी गिरा, जिससे वहां भी आग लग गई। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। तांबोव क्षेत्र के गवर्नर येवगेनी पेरविशोव के अनुसार, कोतोव्स्क स्थित गोदाम में रात्रि पाली में काम कर रहे 7 कर्मचारियों की मौत हो गई और 25 अन्य घायल हो गए। वहीं मॉस्को क्षेत्र में कुल 37 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा व्लादिमीर शहर में एक यूक्रेनी ड्रोन आवासीय इमारत से टकरा गया, जिससे आग लग गई। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि लंबी दूरी की कार्रवाई के तहत मॉस्को और तांबोव क्षेत्रों में स्थित दो महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक केंद्रों पर हमला किया गया। उनके अनुसार इन प्रतिष्ठानों का इस्तेमाल रूस ड्रोन और नौवहन उपकरणों के निर्माण में उपयोग होने वाले प्रतिबंधित कलपुर्जों की आपूर्ति के लिए कर रहा था।जेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन के विशेष अभियान बलों ने आजोव सागर और रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थित सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में 19 क्षेत्रों, क्रीमिया, आज़ोव सागर और काला सागर के ऊपर उड़ रहे 379 यूक्रेनी ड्रोन को नष्ट कर दिया। रूस का कहना है कि हमलों का मुख्य उद्देश्य उसकी ऊर्जा और सैन्य अवसंरचना को नुकसान पहुंचाना था।
देश
ईरान ने जगाया अपना ‘कुंभकरण’; दुनिया में मच जाएगी हाहाकार, भारत की भी बढ़ेगी टेंशन
तेहरान/नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। लगातार हो रहे हमलों के बीच अब ईरान का कुंभकरण जाग गया है और उसने ऐसा दांव चलने की तैयारी कर ली है जिससे पूरी दुनिया में हाहाकार मच जाएगी। अगर ईरान ने यह पासा फैंक दिया तो तेल और गैस की आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों को संकेत दिया है कि अगर अमेरिका ने उसके तेल संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले किए तो वे लाल सागर (Red Sea) के रणनीतिक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) को बंद कर सकते हैं।
होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंदेब भी निशाने पर
दुनिया के लिए पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि बाब-अल-मंदेब भी बंद हो जाता है तो मध्य पूर्व से यूरोप, एशिया और अफ्रीका तक तेल व गैस की सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट और महंगाई दोनों बढ़ने की आशंका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बाब-अल-मंदेब के आसपास मिसाइलों और ड्रोन की तैनाती कर दी गई है। विद्रोही अब केवल अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) यह तय करेगी कि जलडमरूमध्य को कब और किस तरह बंद किया जाए।
तेल आपूर्ति पर पड़ेगा बड़ा असर
जहाजों की निगरानी करने वाली संस्था Kpler के अनुसार जून महीने में बाब-अल-मंदेब से प्रतिदिन लगभग 74 लाख बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 7 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 42 लाख बैरल प्रतिदिन था। होर्मुज में बढ़ते खतरे के कारण हाल के महीनों में इस मार्ग का महत्व और बढ़ गया है। खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने अपनी बड़ी तेल खेपों को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह के जरिए भेजना शुरू कर दिया है। साथ ही वह लाल सागर तक कच्चा तेल पहुंचाने वाली पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। ऐसे में यदि बाब-अल-मंदेब भी बंद हो जाता है तो खाड़ी क्षेत्र के दोनों प्रमुख समुद्री मार्ग प्रभावित हो जाएंगे।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
इस संकट का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। खाड़ी देशों से आने वाला तेल मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है, जबकि रूस से आने वाला यूराल्स कच्चा तेल स्वेज नहर और बाब-अल-मंदेब के रास्ते भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचता है। यदि दोनों मार्ग बाधित होते हैं तो भारत में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, शिपिंग लागत बढ़ सकती है और पेट्रोल-डीजल समेत ऊर्जा की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ता है तथा दोनों प्रमुख समुद्री मार्गों पर आवाजाही बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा और ऊर्जा संकट पहले से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है।
विदेश
अमेरिका का भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक:कंट्रोल टावर को निशाना बनाया, लगातार छठी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका ने शुक्रवार को लगातार छठी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इस दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट को भी निशाना बनाया गया। हमले में पोर्ट के कंट्रोल (निगरानी) टावर को नुकसान पहुंचा है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कंट्रोल टावर के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीर भी शेयर की है। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर ने चाबहार पोर्ट और कंट्रोल टावर पर अमेरिकी हमले की पुष्टि की है। पिछले एक हफ्ते में इस टावर पर यह तीसरा हमला है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। CENTCOM ने कहा कि हमलों में तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। भारत ने इसके विकास में निवेश किया है और इसका संचालन भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) कर रही है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराता है।
पिछले 24 घंटे के बड़े अपडेट्स…
ईरान बोला- अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम होगा
ईरानी सांसद बेहनाम सईदी ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया, तो अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम कर दिया जाएगा।
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर खतरा बढ़ा
ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे पर हमला करता है तो वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने के लिए तैयार रहें।
होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 9 जहाज गुजरे
समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को सिर्फ 9 जहाजों ने होर्मुज पार किया। मंगलवार को यह संख्या 13 थी।
होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं होगी
भारत सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं।
कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला
ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए।
देश
FCNR योजना से भारत आ सकते हैं 70-80 अरब डॉलर, NRI निवेश पर बड़ा अनुमान
सिंगापुर/नई दिल्ली, एजेंसी। अनिवासी भारतीय (NRI) मौजूदा एफसीएनआर पहल के तहत भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं। इसके तहत बैंक सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं। सिंगापुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने शुक्रवार को यह बात कही।
भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) की सिंगापुर शाखा द्वारा बुधवार को आईसीएआई की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति और उसकी 25 विदेशी शाखाओं के सहयोग से आयोजित वैश्विक वेबिनार में भी इस पर चर्चा की गई। विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR) योजना के तहत एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) भारतीय बैंकों में प्रमुख विदेशी मुद्राओं में अपनी विदेश में अर्जित आय को सुरक्षित रूप से जमा कर उस पर प्रतिफल प्राप्त कर सकते हैं। यह पारंपरिक सावधि जमा की तरह काम करता है, लेकिन इसमें राशि भारतीय रुपये में परिवर्तित होने के बजाय विदेशी मुद्रा में ही रहती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने और रुपए को समर्थन देने की रणनीति के तहत सीमित अवधि के लिए बैंकों को एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की अनुमति दी है। आईसीएआई की सिंगापुर शाखा के चेयरमैन संजय गट्टानी ने कहा, ”30 सितंबर, 2026 तक खुली इस एफसीएनआर पहल के तहत अब तक 10 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं।” वेबिनार में विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त विचारों से सहमति जताते हुए गट्टानी ने कहा कि इस पहल के तहत एनआरआई भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं।
उन्होंने कहा, ”इस तरह की आमद से भारत की बाह्य वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी और साथ ही एनआरआई को देश के विकास में सीधे योगदान देने का अवसर भी मिलेगा।” यहां 15 जुलाई को आयोजित इस वेबिनार में दुनियाभर से करीब 1,800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, एनआरआई, मान्यता प्राप्त निवेशक, कारोबारी नेता, फैमिली ऑफिस और वित्त क्षेत्र के पेशेवर शामिल थे। वेबिनार का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों को हाल में घोषित एफसीएनआर अवसर और निवेशकों तथा भारतीय अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए इसके संभावित लाभों से परिचित कराना था।
एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी और भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने एफसीएनआर ढांचे, निवेश प्रक्रिया, नियामकीय आवश्यकताओं, कराधान संबंधी पहलुओं और एनआरआई के लिए उपलब्ध लाभों की जानकारी दी। आईसीएआई सिंगापुर शाखा के वाइस चेयरमैन कुशल जाजू ने कहा कि संवाद सत्र में निवेशकों के अनेक सवालों के जवाब दिए गए, जिससे प्रतिभागियों को योजना के तहत निवेश के व्यावहारिक पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
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