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छत्तीसगढ़

मानसून सत्र, अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हंगामा:विजय शर्मा बोले-राहुल गांधी हिड़मा के समर्थन वाले पोस्ट करते हैं, कांग्रेस ने मांगे सबूत

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। गृहमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने हिड़मा के समर्थन से जुड़ी एक पोस्ट को री-पोस्ट किया था। राहुल गांधी का नाम लेते ही विपक्ष ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया।

कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने गृहमंत्री के दावे पर आपत्ति जताते हुए सदन में प्रमाण पेश करने की मांग की। इसके बाद सत्ता पक्ष ने देवेंद्र यादव की बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार पर भी आपत्ति दर्ज कराई।

दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही बाधित हुई, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले प्रश्नकाल में महतारी वंदन योजना को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। योजना से 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटने और लाभार्थियों की संख्या 70.09 लाख से घटकर 68.54 लाख होने के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि नाम मृत्यु, ई-केवाईसी नहीं होने, आयकरदाता बनने और अपात्र होने जैसी वजहों से हटाए गए हैं। जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया।

प्रश्नकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा। महंत ने हसदेव अरण्य, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, कानून व्यवस्था, पेसा कानून के क्रियान्वयन, आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और अबूझमाड़ में कथित पेड़ कटाई के मुद्दे उठाए।

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने अविश्वास प्रस्ताव पर सत्तापक्ष कि ओर से जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष वाचडॉग होता है, लेकिन ऐसा विपक्ष किस काम जिसने सिर्फ औपचारिकता पूरी कर दी।

महंत बोले- हमारे जंगलों को नष्ट किया जा रहा

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने सबसे पहले उत्तर छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया कि सरकार ने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और कोयला खनन को बढ़ावा दिया।

उन्होंने जुलाई 2022 में विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस प्रस्ताव का उल्लेख किया, जिसमें हसदेव अरण्य के कोल ब्लॉकों को निरस्त करने की मांग की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्यमंत्री के पद संभालने से पहले ही खनन की अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।

महंत ने हसदेव अरण्य को ‘मध्य भारत के फेफड़े’ बताते हुए कहा कि 11 दिसंबर को राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को हसदेव अरण्य के 91 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई, जिससे करीब 15 हजार पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो गया।

महंत ने कहा, ‘यह छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला है। दूसरे राज्यों के उद्योगपतियों के कहने पर हमारे जंगलों को नष्ट किया जा रहा है। आप किसी और का महल बनाने के लिए अपनी ही जड़ें काट रहे हैं। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।’

भगवान राम का उल्लेख करते हुए महंत ने कहा कि भाजपा अक्सर उन्हें छत्तीसगढ़ का ‘भांजा’ बताती है, लेकिन उनकी यात्रा से जुड़े जंगलों की रक्षा करने में असफल रही।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘इन जंगलों को उद्योगपतियों के हवाले कर दिया गया है। आज एक उद्योगपति पूरे छत्तीसगढ़ पर हावी है। इसका खामियाजा मानव-हाथी संघर्ष बढ़ने के रूप में प्रदेश को भुगतना पड़ रहा है।’

महंत ने यह भी आरोप लगाया कि हसदेव अरण्य के कोयला भंडार का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘15 सालों के लिए आवंटित खदानें 9 सालों में ही खाली हो गईं। हसदेव अरण्य में करीब 170 प्रकार की औषधीय वनस्पतियां और वृक्ष हैं। समझ नहीं आता इसे संवेदनहीन सरकार कहूं या विवेकहीन सरकार।’

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश किया।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश किया।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर उठाए सवाल

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और प्रदेश में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था का आरोप लगाया।

उन्होंने जून 2024 में बलौदाबाजार हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा कलेक्टोरेट और एसपी ऑफिस में आग लगाने की घटना को रोकने में सरकार पूरी तरह विफल रही।

उन्होंने कोरिया जिले के कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

महंत ने सरकार के विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें कृषि क्षेत्र की उपेक्षा की गई है, जबकि राज्य की करीब 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई बेरोजगारी भत्ता योजना बंद कर दी गई और पिछले खरीफ सीजन में लगभग 2 लाख किसान अपना धान बेचने से वंचित रह गए।

महंत ने पेसा कानून के क्रियान्वयन, आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण, अबूझमाड़ में कथित पेड़ कटाई, भारतमाला सड़क परियोजना और आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे भी उठाए।

सामूहिक विवाह में नकली मंगलसूत्र का मामला सदन में गूंजा

प्रश्नकाल के दौरान पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री और कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह आयोजन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने नकली मंगलसूत्र का मामला उठाते हुए सरकार से पूछा कि संबंधित एजेंसी के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बालोद जिले से नकली मंगलसूत्र की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में कार्रवाई का सवाल नहीं उठता।

अविश्वास प्रस्ताव क्यों अहम?

अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार गिराना नहीं होता। विपक्ष इस बहस के जरिए सरकार के पूरे कार्यकाल के कामकाज पर सवाल उठाता है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है। चर्चा के बाद अगर मत विभाजन की स्थिति होती है, तब मतदान होता है। अगर सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव गिर जाता है। कई बार ध्वनिमत से ही फैसला लिया जाता है।

इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कई प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष रखेगी।

विधानसभा में बीजेपी के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। ऐसे में संख्या बल बीजेपी के पक्ष में है। यही वजह है कि प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक है, जबकि गणित सरकार के पक्ष में दिखाई देता है।

अब तक का रिकॉर्ड भी सरकार के पक्ष में

छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अब तक 9 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है। हर बार सरकार बहुमत साबित करने में सफल रही है। पहली विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ 2002 और 2003 में भाजपा ने दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था।

इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कुल पांच बार कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। वहीं भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ 2022 और 2023 में भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। इन सभी प्रस्तावों पर लंबी बहस हुई, लेकिन कोई भी पारित नहीं हो सका।

सबसे लंबी चर्चा जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी। मंगलवार को विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ पेश होने वाला अविश्वास प्रस्ताव राज्य गठन के बाद 10वां होगा।

भूपेश सरकार में भी लाया गया था अविश्वास प्रस्ताव

प्रदेश में भूपेश बघेल (कांग्रेस) की पूर्ववर्ती सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ विधानसभा में दो बार 2022 और 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे 32 मिनट चर्चा चली थी।

जबकि जुलाई 2023 के मानसून सत्र के दौरान बीजेपी ने सरकार के खिलाफ 109 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश किया था। हालांकि, भारी बहुमत (कांग्रेस के 72 विधायक) के कारण यह प्रस्ताव विधानसभा में ध्वनिमत से गिर गया था ।

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हाथी ने ग्रामीण को दौड़ाकर कुचला, मौत:बलरामपुर में महुआ खाने के लिए घर की दीवार तोड़ रहा था, 4 हाथी गांव के पास डटे

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बलरामपुर, एजेंसी। बलरामपुर जिले के रेवतीपुर में शुक्रवार रात हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत हो गई। घर के बाकी सदस्यों ने भाग कर जान बचाई। दल से अलग होकर पहुंचा हाथी ग्रामीण का घर तोड़ रहा था, भागने के दौरान हाथी ने उसे कुचल दिया। मामला राजपुर वन परिक्षेत्र का है।

जानकारी के मुताबिक, रात करीब 9 बजे 4 हाथी विचरण करते हुए रेवतपुर पहुंचे। इसमें से एक हाथी ने नावापारा निवासी बालम साय के घर को पीछे से तोड़ना शुरू कर दिया। आवाज़ आने पर बालम साय देखने के लिए गया। हाथी को देखकर उसने शोर मचाया और निकलकर भागने की कोशिश की।

महुआ खाने के लिए घर की दीवार तोड़ रहा था हाथी

महुआ खाने के लिए घर की दीवार तोड़ रहा था हाथी

भागने के दौरान हाथी ने दौड़ाकर कुचला

घर से निकलकर भागने के दौरान हाथी ने उसे दौड़ाकर सूंढ़ से पकड़ लिया और पटककर कुचल दिया। बालम साय की मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों के अनुसार बालम साय को कुछ कम दिखाई देता था। घर के अन्य सदस्य हाथी को देखकर भाग निकले और अपनी जान बचाई।

घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। सूचना मिलने पर वनविभाग के अधिकारी और हाथी मित्र दल के सदस्य गांव में पहुंचे और लोगों को सतर्क किया। 4 हाथियों का दल अभी भी रेवतपुर के पास ही मौजूद है, जिससे ग्रामीण सहमे हुए हैं।

महुआ व कटहल के कारण गांव में आ रहे हाथी

वन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार 4 हाथी कई दिनों से रेवतपुर के आसपास विचरण कर रहे हैं। हाथी पके कटहल, आम और महुआ के कारण गांवों में आ रहे हैं। बालम साय के घर में भी महुआ रखा हुआ था, जिसकी महक आने के बाद हाथी उसके घर को तोड़ रहा था।

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छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड की तैयारी शुरू:ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई लेवल कमेटी बनी, रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई होंगी अध्यक्ष

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने और इससे जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई होंगी।
समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघन सिंह और एम.के. राऊत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा रिटायर्ड प्राचार्य ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। यह समिति राज्य में यूसीसी लागू करने से जुड़े मौजूदा कानूनों और कानूनी व्यवस्था का अध्ययन करेगी।

संबंधित पक्षों से लिया जायेगा सुझाव

समिति विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे विषयों पर समान नागरिक संहिता के लिए सुझाव तैयार करेगी। इसके अलावा नागरिकों, सामाजिक संगठनों, कानून के जानकारों और अन्य संबंधित पक्षों से भी सुझाव लेकर उनका अध्ययन किया जाएगा।

समिति की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई होंगी।

समिति की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई होंगी।

अन्य राज्यों की भी करेगी स्टडी

समिति अन्य राज्यों में लागू यूसीसी से जुड़े प्रावधानों का भी अध्ययन करेगी। इसके आधार पर समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी। साथ ही इसे लागू करने के लिए जरूरी कानूनी और प्रशासनिक सुझाव भी देगी।

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अविश्वास प्रस्ताव पर सीएम साय का पलटवार:बोले- यह सरकार नहीं, जनता के जनादेश के खिलाफ, विधानसभा में ढाई साल की उपलब्धियां गिनाईं

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आक्रामक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के विश्वास और जनादेश का अपमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और नगरीय निकाय चुनावों में जनता ने भाजपा और विकास की राजनीति पर भरोसा जताया है।

विपक्ष जनता के फैसले पर सवाल उठा रहा: सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसका अविश्वास आखिर किस पर है 25 लाख किसानों पर, जिन्हें 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का लाभ मिला, 70 लाख महिलाओं पर जिन्हें महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपये मिल रहे हैं, या उन प्रदेशवासियों पर जिन्होंने भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया।

किसानों और महिलाओं के लिए योजनाएं गिनाईं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, दो साल का बकाया बोनस और शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण जैसी सुविधाएं दी हैं। वहीं महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख महिलाओं को 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है। उन्होंने बताया कि 10.40 लाख से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया गया है।

आदिवासी और गरीबों के लिए कई फैसले

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए तेंदूपत्ता पारिश्रमिक में वृद्धि, चरणपादुका योजना, वनाधिकार लाभ, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना के जरिए विकास कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कानून व्यवस्था और नक्सल मोर्चे पर उपलब्धियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की गई है। रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है और साइबर अपराध रोकने के लिए नए साइबर थाने खोले जा रहे हैं।

निवेश और रोजगार पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत राज्य को 8.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इससे लाखों रोजगार सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है।

ऊर्जा, डिजिटल सेवाएं और सुशासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 76 हजार से अधिक घरों में सोलर प्लांट लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना से 12 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है। उन्होंने बताया कि सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं और 435 प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं।

विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प दोहराया

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनता का विश्वास सरकार के साथ है और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करती रहेगी।

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